महाराष्ट्र के अकोला जिले के पातुर वन परिक्षेत्र से कुछ दिन पहले चार तेंदुए के बच्चे अपनी मां से बिछड़ गए थे. जैसे ही इसकी जानकारी वन विभाग को लगी वैसे ही अधिकारियों ने इन बच्चों का रेस्क्यू कर मां से मिलाने की ठानी. लेकिन वन विभाग की टीम के लिए यह काम किसी भी लिहाज से आसान नहीं था.
(Photo Aajtak)
तेंदुए के बिछड़े इन बच्चों को मां से मिलाने की जद्दोजहद शुरू हुई. इस काम में वन विभाग की टीम को कड़ी मेहनत करनी पड़ी. उनकी रातों की नींद और दिन का चैन पूरी तरह से खत्म हो गया. क्योंकि जिस इलाके में यह बच्चे मिले वहां से लेकर पूरे जंगल में इन शावकों की मां को ढूंढना आसान नहीं था. इस दौरान इन चार नन्हें शावकों को सही सलामत रखना भी बड़ी चुनौती थी.
इन शावकों की मां को खोजने के लिए वन विभाग ने ड्रोन कैमरे की मदद ली. जंगल के कई जगहों पर सोलर सीसीटीवी कैमरे लगाए. फिर जाकर मादा का पता चल सका. लेकिन असली चुनौती तो अब शुरू होनी थी. जैसे इन शावकों को इनकी मां के पास पहुंचाया गया वो इनके पास नहीं आई. यह देखकर हर कोई हैरान रह गया.
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मां से मिलने के लिए इन शावकों को उसकी आवाज के इर्द-गिर्द रखा गया. लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ. हारकर वन विभाग ने इन चारों शावकों को अपने नागपुर के मुख्य कार्यालय स्थित गोरेवाडा प्रकल्प में रख दिया.
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वन विभाग की टीम लगभग 15 दिनों तक इन शावकों को उनकी मां से मिलाने की हर मुमकिन कोशिश करती रही. इस दौरान डॉक्टर की सलाह से शावकों को प्रोटीन युक्त बकरी का दूध पिलाया गया. समय-समय पर इन बच्चों की डॉक्टरी जांच कराई जाती रही, जिससे ये स्वस्थ रहें. कर्मचारियों ने इन शावकों को अपने बच्चे की तरह इनका पालन पोषण किया. लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद भी इन शावकों की मां की ममता इन पर नहीं छलकी.
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