भारत में कोरोना वायरस की वजह से पिछले करीब डेढ़ महीने से लॉकडाउन जारी है. सड़कें सूनी पड़ी हैं और कामकाज ठप है. लेकिन इन सबके बीच एक अच्छी खबर ये है कि लॉकडाउन की वजह से पूरे देश में वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण में भारी कमी आई है. आसमान, नदियां साफ हो गई हैं. प्रकृति निखर कर सामने आई है. लोग साफ हवा में सांस ले रहे हैं.
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर में बीते दिन जमकर बारिश होने की वजह से पर्यावरण शुद्ध हो गया. जब लोग सुबह सोकर उठे तो स्थानीय लोगों को नैनीताल की पहाड़ियां भी दिखाई दीं. जहां सूर्य को उगते देखा गया. लोगों ने इसकी फोटो भी खींची. बिजनौर के लोगों ने पहली बार ऐसा नजारा देखा. यह सब इसलिए हो पाया क्योंकि लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण में काफी कमी देखी आई है.
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बिजनौर से नैनीताल की दूरी 175 किलोमीटर है. लोगों का कहना है कि पहले कभी भी यह पहाड़ियां बिजनौर से नहीं दिखाई दीं और ना ही कभी सूर्य इस तरह पहाड़ों के पीछे से उदय होते हुए नजर आए. लोगों का मानना है कि प्रकृति का यह चमत्कार लॉकडाउन की वजह से हुआ है. क्योंकि हर जगह से प्रदूषण कम हुआ है. नैनीताल की पहाड़ियों के अलावा बिजनौर से लैंसडाउन की पहाड़ियां और पर्वत भी दिखाई दे रहे हैं.
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बारिश से मौसम काफी साफ हो जाता है. धूल-मिट्टी बैठ जाती है और इस समय प्रदूषण का स्तर काफी कम हो गया है. इसलिए विजिबिलिटी काफी बढ़ गई है. यही कारण है यह सब दिखने लगा. प्रदूषण के मानचित्र में देखें तो प्रदूषण कम होने के कारण ये सभी स्पॉट ग्रीन हो गए हैं, प्रदूषण बढ़ने पर ये लाल हो जाते हैं.
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जीवाश्म ईंधन उद्योग से वैश्विक कार्बन उत्सर्जन इस साल रिकॉर्ड 5% की कमी के साथ 2.5 बिलियन टन घट सकता है, ऐसी उम्मीद की जा रही है. क्योंकि कोरोना वायरस महामारी रिकॉर्ड पर जीवाश्म ईंधन की मांग में सबसे बड़ी गिरावट का कारण बनी है. कोरोना वायरस के कारण यात्रा, कार्य और उद्योग पर अभूतपूर्व प्रतिबंधों ने हमारे घुटे हुए शहरों में अच्छी गुणवत्ता वाली हवा के साथ अच्छे दिन सुनिश्चित किए हैं. प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन स्तर सभी महाद्वीपों में गिर गए हैं.
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