कोरोना काल में जहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है तो वहीं इस बीच ऐसे शिक्षक भी हैं जो बिना रुके बच्चों को उचित शिक्षा देने में लगे हुए हैं. मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक ऐसे शासकीय दिव्यांग शिक्षक हैं जो एक महीने से लगातार बच्चों को पढ़ा रहे हैं. कोरोना के कारण बच्चों के स्कूल बंद हैं लेकिन फिर भी उनकी पढ़ाई और होमवर्क बराबर चला रहे हैं.
रामेश्वर नागरिया नाम के इस शिक्षक की तारीफ प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह ने खुद ट्वीट करके की है. वहीं, बच्चों का कहना है कि सर उन्हें प्रतिदिन पढ़ाते हैं, समय पर होमवर्क देते हैं और चेक भी करते हैं. स्कूल बंद होने की कमी नहीं खलती. दूसरी तरफ, महिला मजदूर भूली बाई का कहना है कि कोरोना के कारण स्कूल बंद है लेकिन मेरे बच्चे फिर भी शिक्षा पा रहे हैं और उसके बच्चों की पढ़ाई लगातार चल रही है. सर के पैर में दिक्कत है फिर भी वो एक दिन छोड़कर लगातार आ रहे हैं.
लॉकडाउन में बच्चों के स्कूल भी बन्द हो गए जिस पर प्रदेश सरकार ने 07 जुलाई से 'अपना घर, अपना विद्यालय योजना' के तहत बच्चों को उनके घर में ही पढ़ाने का आदेश जारी कर दिया था. अब सरकारी आदेश का कितना सही पालन होता है, ये बात किसी से छुपी नहीं है. लेकिन इन सब बातों से अलग मंदसौर में एक दिव्यांग शिक्षक ऐसे भी हैं, जो पूरी ईमानदारी और निष्ठा से बच्चों को प्रतिदिन पढ़ाते हैं.
जहां एक ओर दिव्यांग शिक्षक रामेश्वर में बच्चों को पढ़ाने की असीमित इच्छा शक्ति है तो वहीं बच्चे भी अपने मास्टर साहब से पढ़ने के लिए इंतजार करते हैं. शिक्षक और छात्र के बीच कोरोना की सरहद शून्य सी हो गई है. बच्चों को भी स्कूल की कमी नहीं खल रही है. ये गरीब बच्चे ऑनलाइन पढ़ने के लिए सक्षम नहीं है,लेकिन एक लाइन में बैठाकर मास्टर जी इन्हें जरूर पढ़ा रहे हैं.
रामेश्वर नागरिया नाम के दिव्यांग शिक्षक बच्चों के भी अच्छे खासे हीरो से कम नहीं है. ये अपने वाहन से प्रतिदिन सुबह शहर के अलग-अलग इलाकों में समय पर पहुंच जाते हैं और जहां जगह मिल जाती है, वहीं बच्चों को पढ़ाने लगते हैं. सभी बच्चों को होमवर्क देते हैं और चेक भी करते हैं. इनसे पढ़ने वाले बच्चो में अधिकांश गरीब या मजदूर वर्ग के बच्चे हैं. बच्चों के परिजन भी कहते है कि सर के पैरों में तकलीफ होने के बावजूद भी ईमानदारी से बच्चों को घर जाकर पढ़ा रहे हैं.
दिव्यांग शिक्षक रामेश्वर नागरिया का कहना है कि शासन की योजना हमारा घर, हमारा विद्यालय योजना के तहत 07 जुलाई से ये प्रतिदिन सुबह बच्चों को पढ़ाने निकल जाते हैं. जहां जगह मिल जाती है वहीं बैठकर पढ़ाने लगते हैं. बच्चों को स्कूल की तरह होमवर्क दिया जाता है और समय पर चेक भी किया जाता है. सुबह 10 बजे से एक बजे तक इन बच्चों को पढ़ाया जाता है. रामेश्वर अलग-अलग इलाके में बच्चों को पढ़ाने जाते हैं.
दिव्यांग शिक्षक की खबर जब सीएम शिवराज सिंह को लगी तो उन्होंने भी ट्वीट करके, शिक्षक की तारीफ की है. चंद्रपुरा प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाले दिव्यांग शिक्षक रामेश्वर चंदरपूरा, खिलचिपुरा ,जगतपुरा के बच्चों को पढ़ाते हैं जिनमें से अधिकांश बच्चे गरीब मजदूरों के परिवार से हैं.