Advertisement

ट्रेंडिंग

Chandrayaan-1 की बड़ी खोजः चांद को लग रही है जंग, मौजूद है लोहे के अंश

aajtak.in
  • 04 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 3:19 PM IST
  • 1/6

लोहे में जंग लगते सुना था लेकिन कभी किसी ग्रह या उपग्रह को जंग लगते सुना है. जी हां, ये सच है. भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के चंद्रयान-1 ने बड़ी खोज की है. उसने कुछ ऐसी तस्वीरें ली हैं, जिससे ये पता चल रहा है कि चांद को जंग लग रहा है. इसपर जंग लगने के दाग दिख रहे हैं. यानी की चांद पर लोहे की मौजूदगी है. चांद की सतह पर ऑक्सीडाइज्य आयरन यानी लोहे के अंश हेमेटाइट दिखाई पड़े हैं. 

  • 2/6

धरती पर तो लोहे की मात्रा बहुत ज्यादा है लेकिन चांद पर लोहे के अंश मिलने से वैज्ञानिक भी हैरान हैं. लोहे पर जंग लगने का मतलब ये है कि वहां पर हवा और पानी यानी ह्यूमिडिटी यानी नमी मौजूद है. साइंटिस्ट्स को चांद पर बर्फ की मौजूदगी तो मिली थी लेकिन हेमेटाइट की खोज बहुत बड़ी है. 

  • 3/6

‘साइंस एडवांसेस’ नामक साइट पर प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई की रिसर्च के मुताबिक चांद की सतह पर हेमेटाइट का पता भारतीय चंद्रयान-1 के ऑर्बिटर की ली हुई तस्वीरों से चला है. इस यूनिवर्सिटी के के विशेषज्ञ शुआई ली का कहना है कि चांद की सतह पर हेमेटाइट बनना हैरानी वाली बात है क्योंकि धरती का यह उपग्रह लगातार सूर्य की सौर तूफानों को झेलता है. 

Advertisement
  • 4/6

सौर तूफानों की वजह से हाइड्रोजन के परमाणु चांद की सतह पर इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं, जबकि आयरन ऑक्सीडेशन सिर्फ इलेक्ट्रॉन कम होने पर ही होता है. चांद पर हेमेटाइट की मौजूदगी उसी हिस्से में ज्यादा है, जो पृथ्वी के नजदीक है. यानी धरती के वायुमंडल का असर चांद पर भी पड़ रहा है. शुआई ली का कहना है कि हो सकता है यह धरती के वायुमंडल का असर हो.

  • 5/6

शुआई ली ने बताया कि धरती के नजदीक वाले चांद के हिस्सों पर ही पहले बर्फ मिली थी. अब हेमेटाइट का उसी स्थान पर मिलना ये बताता है कि नमी और लोहे की मौजूदगी है वहां पर. उल्का टकराने से चांद की सतह के नीचे की बर्फ पिघली और सतह पर आ गई. पानी के बेहद छोटे कण पैदा हुए होंगे. इससे यह साबित होता है कि पृथ्वी के वायुमंडल की ऑक्सीजन, सोलर विंड्स के साथ चांद तक जाती है. 

  • 6/6

इससे चांद की सतह पर ऑक्सीजन के कण पहुंचने से ऑक्सीडेशन हो सकता है. जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आती है तो चांद तक सोलर विंड्स नहीं पहुंच पाती. ऐसे में हाइड्रोजन की बमबारी से भी चांद बचा रहता है. इसी समय आयरन ऑक्सीडेशन हो सकता है. (सभी फोटोः इसरो/शुआई ली)

Advertisement
Advertisement

लेटेस्ट फोटो

Advertisement