हॉलीवुड फिल्म द मार्शियन में एक्टर मैट डेमन ने एक ऐसे शख्स का रोल निभाया था जिसे मंगल ग्रह की सतह पर कई दिन बिताने पड़े थे. अब नासा ने भी धरती पर रहने वाले लोगों के लिए कुछ ऐसा ही ऑफर तैयार किया है. दरअसल, नासा मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने से पहले उन्हें मंगल ग्रह की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करना चाहता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
अमेरिका के ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर की एक इमारत में 3डी-प्रिंटर से मंगल ग्रह जैसी इस जगह को तैयार किया गया है. 1,700 वर्ग फीट में फैली इस जगह का नाम मार्स ड्यून अल्फा है. नासा ने इस स्पेशल जगह के लिए चार लोगों के आवेदन मांगे हैं और इन लोगों को एक साल तक यहां रखा जाएगा.
(फोटो क्रेडिट: नासा)
नासा का मकसद इन वॉलंटियर्स को मंगल ग्रह की चुनौतियों से रूबरू कराना होगा. इन वॉलंटियर्स को इस जगह पर स्पेस वॉक करना होगा. इनका घर से बेहद कम संपर्क कराया जाएगा, खाने और संसाधनों की सीमित मात्रा होगी. इसके अलावा भी कई और पर्यावरण से जुड़े तनाव शामिल होंगे जो मंगल ग्रह पर देखने को मिलेंगे.(प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
हालांकि नासा की इस जॉब के लिए अप्लाई करने के लिए आपका अमेरिकी नागरिक होना जरूरी है. इसके अलावा जो भी शख्स इस प्रोग्राम के लिए अप्लाई कर रहा है, उसके पास साइंस, इंजीनियरिंग या मैथ्स में मास्टर्स डिग्री होनी जरूरी है. किसी शख्स के पायलट होने के अनुभव को भी वरीयता दी जाएगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
नासा की एप्लीकेशन में ये भी लिखा है कि इस पोस्ट के लिए 30 साल से 55 साल तक के लोग अप्लाई कर सकते हैं. उनकी फिजिकल हेल्थ अच्छी होनी चाहिए. मोशन सिकनेस की परेशानी नहीं होनी चाहिए और इसके अलावा एक फुल बॉडी मेडिकल सर्टीफिकेट भी उपलब्ध कराना आवश्यक है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
कनाडा के पूर्व एस्ट्रोनॉट क्रिस हैडफील्ड ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि नासा की लोगों को चुनने की ये तकनीक मुझे पसंद आई. इससे पहले रूस ने भी एक ऐसा प्रयोग किया था. मार्स 500 नाम का वो प्रयोग खास सफल नहीं हो पाया था क्योंकि उसमें रोजमर्रा के सामान्य लोगों की तादाद काफी ज्यादा थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
गौरतलब है कि क्रिस खुद साल 2013 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 5 महीने बिता चुके हैं. उन्होंने यहां मशहूर पॉप स्टार डेविड बोवी का सॉन्ग गाते हुए गिटार भी बजाया था. उन्होंने कहा कि नासा की डिमांड जायज है. ये जरूरी है कि इस प्रोजेक्ट के लिए ऐसे लोगों को तैयार किया जाए जो मानसिक तौर पर काफी मजबूत हों. ऐसी जगहों पर आपका एटीट्यूड काम आता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर/getty images)
उन्होंने आगे कहा कि जिस किसी शख्स का इस प्रोजेक्ट के लिए चयन होता है, उसे काफी शार्प होना होगा, अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना होगा और दूसरे लोगों पर डिपेंड होने की आदत से बाहर आना होगा. ये साफ है कि किसी भी शख्स के लिए ये प्रोजेक्ट बेहद अद्भुत फीलिंग्स से सराबोर कर देने में कामयाब होगा और इसे सही मायनों में रियल आजादी कहा जा सकता है. (फोटो क्रेडिट: NASA)