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साइकिलिस्ट बेटी जीत चुकी है कई मेडल, गरीबी में लगाई मदद की गुहार

बलवंत सिंह विक्की
  • 13 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 7:14 PM IST
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पंजाब के संगरूर की रहने वाली बलजीत कौर एक साइक्लिस्ट के तौर पर राज्य के लिए कई गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं. अब गरीबी के चलते वह अपना गेम छोड़ने को मजबूर हैं. उनको सरकार की तरफ से भी कोई मदद नहीं मिल पा रही है. वह सरकार से मदद की गुहार लगा रही हैं.

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बलजीत की मां लोगों के घरों में काम कर 5000 रुपये प्रति माह कमाती हैं. गरीबी का आलम ये है कि बलजीत को अपनी साइकिलिंग जारी रखने के लिए पूरी डाइट तक नहीं मिल पाती है. बलजीत का कहना है कि वह सिर्फ रोटी के सहारे ही अपने गेम को चालू रखे हुए हैं. एक बार तो उसकी साइकिल की हालत बहुत खराब थी लेकिन फिर भी उसने स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीत लिया.

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बलजीत ने संगरूर से कांग्रेस के विधायक और  कैबिनेट मंत्री विजय इंदर से लेकर सांसद भगवंत मान और जिले के डिप्टी कमिश्नर से भी मुलाकात की ताकि कोई मदद मिल सके. बलजीत की फरियाद थी कि सरकार उसको कोई नौकरी दे दे जिससे वह अपने गेम को आगे बढ़ा सके लेकिन उसे किसी से भी कोई जवाब नहीं मिला.

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जानकारी के मुताबिक, बलजीत के घर की हालत काफी खराब है. उनके पास अपना घर तक नहीं है. साइकिल चलाने के लिए अच्छी डाइट और पैसे दोनों की जरूरत होती है लेकिन बलजीत के पास कुछ भी नहीं है. बलजीत ने दुखी होते हुए कहा कि उन्हें इस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वह एक गरीब परिवार में पैदा हुई है. अगर वह किसी बड़े नेता या फिर बड़े अधिकारी की बेटी होती तो उनको नौकरी भी मिल जाती और वह अपने गेम को भी आगे बढ़ा पाती.


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बलजीत के परिवार वालों का कहना है कि अगर उसके पास एक अच्छी साइकिल होती तो वह नेशनल पर गोल्ड जीत लेती क्योंकि उसके हौसले बुलंद हैं. लेकिन गरीबी के आगे अब सब खत्म होता जा रहा है.

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बलजीत की मां का कहना है कि मैंने अपनी बेटी का गेम जारी रखने के लिए उसकी पूरी मदद की. कई बार एक समय का खाना छोड़ कर हमने गुजारा किया है. मैं घरों में सफाई का काम कर 5000 रुपये कमाती हूं. इतने पैसे से कुछ नहीं होता. हमारे पास तो अपना घर भी नहीं है. हम लोग किराए के मकान में रहते हैं. हमें सरकार से मदद की उम्मीद है.

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