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कोरोना के बाद इस बीमारी ने उड़ाई चीन की नींद, दो लोगों की मौत

aajtak.in
  • 09 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST
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कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया को मुसीबत में डालने वाले चीन में अब ब्यूबोनिक प्लेग नाम की बीमारी ने दस्तक दे दी है. इससे वहां के स्वास्थ्य अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है. इस बीमारी की वजह से वहां एक ही हफ्ते में दो लोगों की मौत हो चुकी है.

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ब्यूबोनिक प्लेग बैक्टीरियल इंफेक्शन की वजह से फैलता है. इस बीमारी को पहले ब्लैक डेथ के नाम से भी जाना था. इस बीमारी के लिए प्लेग बैक्टीरिया जिम्मेदार होता है और ये कोई वायरस नहीं है. यही वजह से है कि अगर समय रहते एंटीबायोटिक दवाओं से इलाज किया जाए तो मरीज की जान भी बच सकती है.

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ये बीमारी चीन के मंगोलियाई क्षेत्र के एक गांव में फैली है. ब्यूबोनोयर शहर के स्वास्थ्य आयोग के मुताबिक  ब्यूबोनिक प्लेग के मामले में मरीज के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया जिससे उसकी मौत हो गई.

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जिस क्षेत्र में ब्यूबोनिक प्लेग की वजह से मरीज की मौत हुई है उसे पूरी तरह सील कर दिया गया है और उस शख्स के सात संबंधियों की मेडिकल टीम निगरानी कर रही है.

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मानवों में यह बीमारी आमतौर पर कुछ खास जानवरों की वजह से फैलती है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार चूहा, गिलहरी और मैमल्स के शरीर में प्लेग बैक्टीरिया मौजूद रहता है और इनके काटने या फिर संपर्क में आने से इंसानों में भी यह बीमारी फैल जाती है.
ब्यूबोनिक प्लेग सबसे पहले जंगली चूहों को होता है. चूहों के मरने के बाद इस प्लेग का बैक्टीरिया पिस्सुओं (मैमल्स) के जरिए मानव शरीर में प्रवेश कर जाता है. इसके बाद जब पिस्सू इंसानों को काटता है वह संक्रामक लिक्विड इंसानों के खून में छोड़ देता है.

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बात अगर हम ब्यूबोनिक प्लेग के लक्षणों की करें तो इससे पीड़ित मरीज को सिर में दर्द और बुखार की समस्या होती है. शरीर में कमजोरी महसूस होती है और शरीर के कई अंगों में सूजन आ जाती है.

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इस बीमारी की शुरुआत 6ठीं और 8वीं सदी में हुई थी और उस वक्त इसे प्लेग ऑफ जस्टिनियन कहा जाता था, उस वक्त इस बीमारी ने पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों की जान ली थी. इस बीमारी का दूसरा हमला मानवों पर सन 1347 में हुआ था. तब इसे ब्लैक डेथ कहा जाने लगा और इस बीमारी की वजह से यूरोप की एक तिहाई आबादी की मौत हो गई थी.

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