फिल्म एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत की हकीकत क्या है, यह अभी तक सामने नहीं आया है और इसकी जांच अब सीबीआई के पास चली गई है. अब राजस्थान में भी एक दिल दहला देने वाले केस को सीबीआई के हाथ में देने की मांग हो रही है, जहां 11 लोगों की जहर के इंजेक्शन से मौत हो गई. इस मामले में कभी इसी परिवार के इकलौते बचे सदस्य को हत्यारा बताया जाता है, कभी इसी परिवार की मर चुकी बेटी के कातिल होने की आशंका पुलिस जता रही है.
जोधपुर में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत को लेकर विस्थापितों के लिए काम करने वाले संगठन इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग कर रहे हैं. संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि पुलिस से इस मामले की जांच नहीं करवाई जानी चाहिए.
11 पाक विस्थापितों की मौत के मामले में पाक विस्थापित संघों ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई या उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है. सीमांत लोक संगठन के हिंदू सिंह सोढा ने बताया कि जो सुसाइड नोट मिला है उसमें मंडोर थाना पुलिस पर गंभीर आरोप हैं. ऐसे में इस मामले की जांच पुलिस के द्वारा नहीं होनी चाहिए.
सोढा ने यहां तक कहा कि ताज्जुब की बात है कि मुख्यमंत्री के गृह नगर में भी इस मामले में पुलिस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई जबकि आरोप गंभीर हैं. सोढा ने बताया कि पुलिस के साथ-साथ ऐसे लोगों पर भी आरोप है जो इन पाक विस्थापितों का उत्पीड़न करते थे. उन पर भी कार्रवाई पुलिस को करनी थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसे में अब इस मामले की जांच उच्च स्तरीय एजेंसी सीबीआई से होनी चाहिए.
इसी तरह से पाक विस्थापितों के लिए काम करने वाली संस्था निमिकेतम के भागचंद भील ने कहा कि नागरिकता के अभाव में हम लोगों को ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है. 11 लोगों की मौत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए.
कृषि मंडी की पूर्व अध्यक्ष कीर्ति सिंह भील ने कहा कि सरकार को पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने के साथ उच्च स्तरीय जांच करवानी चाहिए. गौरतलब है कि इस परिवार से जुड़ा एक प्रकरण मंडोर थाने में दर्ज है जिसको लेकर लंबे समय से जांच ही चल रही है. सुसाइड नोट में इसी बात का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. वहीं, सभी पाक विस्थापितों की मौतों का पोस्टमॉर्टम करवाकर जोधपुर में हिंदू रीति-रिवाज से दाह संस्कार कर दिया गया.
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बता दें कि जोधपुर जिले के किला बता गांव में पाकिस्तान से आया हिंदू शरणार्थी बुद्धाराम का परिवार पिछले 3 महीने से खेती के काम के लिए रह रहा था. इस परिवार में 12 लोग थे.
परिवार में बचे केवल राम के अनुसार, शनिवार की रात सभी लोगों ने खाना खा लिया था और वह नीलगाय भगाने के लिए खेत में गया था जहां पर उसको नींद आ गई और वह सो गया. सुबह जब वह घर लौटा तो पूरे परिवार का खात्मा हो चुका था. पुलिस को शव के पास से जहर की शीशियां और इंजेक्शन भी मिले.
इस बारे में पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि केवल राम और उसके भाई रवि की शादी जोधपुर में एक ही परिवार में हुई थी. इनकी 4 बहनें थी, जिनमें से दो पाकिस्तान से नर्सिंग का कोर्स करके आईं थी.
दोनों बहनों का रिश्ता भी जोधपुर के उसी परिवार में हुआ था जिस परिवार में भाइयों का रिश्ता हुआ था. एक बहन पास में ही शादी करके रह रही थी. पारिवारिक क्लेश काफी दिनों से चल रहा था. इसी वजह से बुद्धाराम का एक बेटा वापस पाकिस्तान लौट गया था.
दिसंबर 2015 में दोनों ही परिवार पाकिस्तान से आए थे. मृतक का परिवार भी और जोधपुर में रहने वाला परिवार भी. यहां पर रहने के बावजूद इनको भारत की नागरिकता नहीं मिली थी. हालांकि इनका कहना है कि आधार कार्ड बन गया था. इस मामले में केवल राम का आरोप है कि हत्या उसके ससुराल वालों ने ही करवाई है.
वहीं यह भी कयास लगाया जा रहा है कि 38 साल की प्रिया उर्फ प्यारी ने सबको जहर का इंजेक्शन देकर मारा है. प्रिया 75 वर्षीय बुद्धाराम की बेटी थी. पुलिस को शव के पास से जहर की शीशियां और इंजेक्शन मिले हैं.
पुलिस को शक है कि प्रिया ने ही परिवार के सभी सदस्यों को इंजेक्शन दिया क्योंकि वह इंजेक्शन देना जानती थी. उसने पाकिस्तान से नर्सिंग का कोर्स किया था. शक गहराने की एक वजह यह भी है कि मरने वाले सभी 10 सदस्यों के हाथ में सुई दी गई हैं, जबकि प्रिया के पैर में. इससे लगता है कि प्रिया ने पहले परिवार के सदस्यों को हाथ में इंजेक्शन दिया और बाद में अपने पैर में इंजेक्शन लगा लिया.
पुलिस ने अभी तक की जांच में पाया है कि मरने वाले सभी लोगों को चूहे मारने की दवा का इंजेक्शन दिया गया है. मौके से अल्प्राजोलम टेबलेट भी मिले थे जो नींद की दवाई के तौर पर इस्तेमाल की जाती है.
इस मामले में मौत का एक और कारण भी सामने आ रहा है कि कुछ दिनों से दोनों परिवार टोना-टोटका और तांत्रिकों के चक्कर में भी फंसा हुआ था. कहीं यह भी तो दिल्ली के बुराड़ी कांड की तरह सामूहिक आत्महत्या का मामला तो नहीं है.