कानपुर शूटआउट में मोस्ट वॉन्टेड विकास दुबे की गुरुवार को गिरफ्तारी के बाद जब उज्जैन में सर्चिंग हुई तो एक कार मिली जिसका कनेक्शन विकास दुबे से बताया जा रहा है. यह कार 7 जुलाई की रात शिवपुरी के पास एक टोल प्लाजा से निकली थी जिसकी इमेज वहां लगे सीसीटीवी में कैद हो गई.
विकास दुबे जिस गाड़ी के जरिए उज्जैन पहुंचा था, वह गाड़ी लखनऊ के इंदिरा नगर में रहने वाले मनोज यादव के नाम पर दर्ज है. इस कार को 2019 में खरीदा गया है.
यह कार 7 जुलाई को रात 11 बजकर 22 मिनट पर शिवपुरी जिले के पूरणखेड़ी टोल प्लाजा से निकली थी. टोल पर कार खड़ी रखकर शुल्क भी चुकाया गया. विकास दुबे उज्जैन जाते समय विकास इसी मार्ग से गुजरा था. उसी समय के ये सीसीटीवी फुटेज बताये जा रहे हैं. यहां इसका सत्यापन करने कोई तैयार नहीं है.
यही कार उज्जैन पुलिस ने जब्त भी की है. हालांकि एक खबर यह भी है कि इस कार में बैठकर विकास के वकील उज्जैन पहुंचे थे. ऐसा है तो विकास की गिरफ्तारी सुनियोजित हो सकती है.
बता दें कि विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद पूरे उज्जैन में तलाशी अभियान चलाया गया था. इस दौरान एक गाड़ी मिली, जिस पर लखनऊ का नंबर और हाई कोर्ट लिखा था. पुलिस गाड़ी को थाने ले आई. इसके बाद गाड़ी को ढूंढते हुए दो लोग थाने पहुंचे और उन्होंने बताया कि यह मेरी गाड़ी है.
उज्जैन के थाने में पहुंचे दोनों लोगों ने अपने आपको वकील बताया और कहा कि वो उज्जैन घूमने आए थे. इसके बाद दोनों वकीलों को पुलिस ने थाने में बैठा लिया है और पूछताछ की गई. पुलिस को शक है कि विकास दुबे इसी कार से उज्जैन आया है.
इस बीच आजतक की टीम लखनऊ में मनोज यादव के घर पहुंची. मनोज यादव भी वकील है. उनकी पत्नी ने विकास दुबे के संपर्क में होने के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है. इसके साथ ही मनोज यादव ने भी अपनी पत्नी से फोन पर बात की और सभी आरोपों को खारिज किया है.
मनोज यादव के लखनऊ घर पर पुलिस की टीम भी पहुंच गई है. मनोज यादव की पत्नी से पूछताछ की गई. पत्नी से पूछा जा रहा है कि किन हालात में मनोज यादव उज्जैन गए हैं. इस बीच खबर है कि विकास दुबे ने जिस बिट्टू का नाम लिया था, अब उज्जैन पुलिस उसकी तलाश कर रही है.
इन दोनों वकीलों के अलावा एक स्थानीय नागरिक को पुलिस ने हिरासत में लिया है. सूत्रों ने बताया कि विकास दुबे ने दो वकीलों से मुलाकात की थी और इन्हीं ने विकास दुबे को उज्जैन पहुंचाने में मदद की थी. इन्हीं दोनों वकीलों और एक स्थानीय नागरिक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
2 जुलाई की रात को कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के 6 दिन बाद विकास दुबे की जिस तरह से गिरफ्तारी हुई है वो कम फिल्मी नहीं है. इस गिरफ्तारी से कई सवाल भी उठे हैं. ऐसा लग रहा है कि ये गिरफ्तारी महज इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे विकास दुबे और उसके साथियों की सोची-समझी चाल है.
मिली जानकारी के मुताबिक, विकास दुबे गुरुवार सुबह ही महाकाल मंदिर पहुंचा. उसने दर्शन किए, फिर गार्ड को बताया कि मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला. इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई. फिर विकास दुबे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान वह चिल्लाता रहा कि मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला.