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AI ड्रोन ने पहली बार वर्ल्ड चैंपियन ह्यूमन पायलटों को हराया, सामने आया प्रतियोगिता का धमाकेदार VIDEO

एक AI-संचालित ड्रोन ने हाल ही में एक हाई स्पीड रेसिंग प्रतियोगिता में तीन वर्ल्ड-चैंपियंस मानव ड्रोन पायलटों को हरा दिया. इसका वीडियो भी सामने आया है. जो काफी हैरान करने वाला है.

AI ड्रोन ने ह्यूमन पायलट्स को हराया (तस्वीर- यूट्यूब) AI ड्रोन ने ह्यूमन पायलट्स को हराया (तस्वीर- यूट्यूब)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:44 PM IST

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) के आने के बाद कई क्षेत्रों में क्रांति देखने को मिली है. कई मामलों में तो इसने इंसानों को ही पीछे छोड़ दिया है. इसने बीते कुछ वर्षों में अपनी ताकत को साबित भी किया है. ये विभिन्न क्षेत्रों में मानवीय उपलब्धियों के आगे निकलना जारी रखे हुए है. एक AI-संचालित ड्रोन ने हाल ही में एक हाई स्पीड रेसिंग प्रतियोगिता में तीन वर्ल्ड-चैंपियंस मानव ड्रोन पायलटों को हरा दिया. इसका एक वीडियो सामने आया है.

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द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस ड्रोन ने वर्ल्ड चैंपियंस के खिलाफ 25 में से 15 रेस जीतीं और सबसे तेज लैप हासिल की. ड्रोन 50 मील प्रति घंटे (80 किमी / घंटा) की गति तक पहुंच गया. इसे देखने वाले लोगों के सामने ब्लैक आउट वाली स्थिति आ गई थी. AI ड्रोन स्विफ्ट को विकसित करने में मदद करने वाली शोधकर्ता एलिया कॉफमैन ने कहा, 'हमारे नतीजे से पहली बार पता चला है कि AI द्वारा संचालित रोबोट ने इंसानों द्वारा डिजाइन किए गए वास्तविक फिजिकल खेल में इंसानी चैंपियंस को ही हरा दिया है.'

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अभ्यास के लिए कितना वक्त मिला?

एक जर्नल नेचर में लिखते हुए कॉफमैन और उनके सहयोगियों ने स्विफ्ट और तीन वर्ल्ड चैंपियन ड्रोन रेसर्स थॉमस बिटमैटा, मार्विन शापर और एलेक्स वनोवर के बीच आमने-सामने की रेस के बारे में बताया है. प्रतियोगिता से पहले, इंसानी पायलटों के पास अभ्यास करने के लिए एक सप्ताह का समय था, जबकि स्विफ्ट को एक सिमुलेटेड वातावरण (एक आभासी दुनिया, जिसे वर्चुअल स्पेस भी कहा जाता है) में प्रशिक्षण दिया गया. 

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सैकड़ों बार दुर्घटनाग्रस्त हुआ था ड्रोन

स्विफ्ट ने सर्किट के चारों ओर घूमने के लिए जिस तकनीक का इस्तेमाल किया, उसे डीप रेनफोर्समेंट लर्निंग कहा जाता है. ट्रेनिंग के दौरान ड्रोन सैकड़ों बार दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. मगर ये एक आभासी वातावरण था, इसलिए शोधकर्ता आसानी से पूरी प्रक्रिया को फिर से शुरू कर सकते थे. स्टडी की लेखिका एलिया कॉफमैन ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि आभासी वातावरण और वास्तविक वातावरण से मिलने वाले परिणाम कितना एक दूसरे के करीब हो सकते हैं. इसके लिए हमने वास्तविक डाटा के साथ सिमुलेटर को अनुकूलित करने के लिए एक मेथड तैयार किया था.'

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