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'मैं नरक में था, टॉयलेट पिया...' झकझोर देगी म्यांमार भूकंप के 5 दिन बाद मलबे से बाहर आए टीचर की आपबीती

पांच दिन होटल के मलबे में दबे टीचर माउंग एक बेड के नीचे जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे थे. भूकंप के समय दो चीजों ने उनकी मदद कि एक स्कूल की पढ़ाई और दूसरा खुद का टॉयलेट. जब  7.7 तीव्रता का भूकंप आया, तब प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर टिन माउंग हटवे भूकंप के केंद्र के सबसे नजदीक सागाइंग में थे.

म्यांमार भूकंप के पांच दिन बाद मलबे से बाहर निकाले गए टीचर टिन माउंग हटवे की तस्वीर (फोटो सोर्स - AFP) म्यांमार भूकंप के पांच दिन बाद मलबे से बाहर निकाले गए टीचर टिन माउंग हटवे की तस्वीर (फोटो सोर्स - AFP)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 7:29 PM IST

"पूरा होटल गिर गया, मुझे लगा मैं नरक में था, मैं 'मुझे बचाओ, मुझे बचाओ' चिल्ला रहा था. मेरा शरीर बहुत गर्म हो रहा था और मुझे बस पानी की जरूरत थी. मुझे कहीं से पानी नहीं मिल पा रहा था. इसलिए मुझे अपनी बॉडी से निकलने वाले तरल पदार्थों को पीना पड़ा." म्यांमार भूकंप के पांच दिन बाद मलबे से बाहर निकाले गए टिन माउंग हटवे (Tin Maung Htwe) की जिंदगी के लिए संघर्ष की कहानी भावुक कर देगी.

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पांच दिन बाद मलबे से बाहर निकाला
शुक्रवार (28 मार्च 2025) को म्यांमार और थाईलैंड में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई है. भूकंप में मरने वालों की संख्या तीन हजार के करीब पहुंच गई है जबकि 4,639 लोग घायल हैं और करीब 400 लोग अभी भी लापता हैं. वहीं, थाईलैंड में भूकंप से कम से कम 18 लोग मारे गए हैं. भूकंप के पांच दिन बाद 47 साल के टिन माउंग हटवे को जिंदा बाहर निकाला गया.

जिंदा रहने के लिए दो चीजें काम आई- स्कूल में पढ़ाया पाठ और टॉयलेट
पांच दिन होटल के मलबे में दबे टीचर माउंग एक बेड के नीचे जिंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे थे. भूकंप के समय दो चीजों ने उनकी मदद कि एक स्कूल की पढ़ाई और दूसरा खुद का टॉयलेट. जब  7.7 तीव्रता का भूकंप आया, तब प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर टिन माउंग हटवे भूकंप के केंद्र के सबसे नजदीक सागाइंग में थे. भूकंप के समय माउंग को अपने स्कूल का वो पाठ याद आ गया जिसमें बताया गया था कि अगर भूकंप आए तो बिस्तर या टेबल के नीचे चले जाओ.

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म्यांमार के भूकंप के बाद की तस्वीर (एएफपी)

मलबे के नीचे दबे टिन माउंग ने क्या-क्या बताया?
न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, शख्स ने कहा, "जैसे ही मैं बिस्तर के नीचे गया, पूरा होटल गिर गया और रास्ता ब्लॉक हो गया. मैं केवल 'मुझे बचाओ' कह सकता था. मैं 'मुझे बचाओ, मुझे बचाओ' चिल्ला रहा था. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं नरक में था. मेरा शरीर बहुत गर्म हो रहा था और मुझे बस पानी की ज़रूरत थी. मुझे वह पानी कहीं से नहीं मिल पा रहा था. इसलिए मुझे अपने शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों (पसीना और मूत्र) को पीना पड़ा." यह उन्होंने तब बताया जब उनकी नाक में ऑक्सीजन की नली लगी हुई थी और उनके कमजोर शरीर में पानी या दवा पहुंचाने के लिए दो इंट्रावेनस ड्रिप लगी हुई थी.

भूकंप में सबकुछ तबाह हो गया
जिस स्वाल तॉ नैन गेस्टहाउस में वे ठहरे थे, वह ईंटों और मुड़ी हुई मेटल की पट्टियों के ढेर में तब्दील हो गया था, इसकी ऊपरी मंजिल का टूटा हुआ हिस्सा नीचे के लोगों के अवशेषों पर टिका हुआ था, और टिन माउंग हटवे नीचे के फ्लोर के कमरे में थे. भूकंप के केंद्र के नजदीक सागाइंग में बहुत से इमारतों का ऐसा ही हाल था, चंद पलों में सब कुछ मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका था. मेन रोड पर बड़ी-बड़ी दरारें थीं, पीड़ितों की मदद करने की कोशिश करने वालों को ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा था. इरावदी नदी पर दो शहरों को जोड़ने वाला अवा पुल ढह गया है, जिसके 10 में से छह पुलों का एक सिरा शांत पानी में जा टिका.

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म्यांमार भूकंप के बाद बचाव कर्मी (फोटो- PTI)

किसी के जिंदा मिलने की उम्मीद खो चुके थे बचावकर्मी
वहां रहने वाले लोगों ने कहा कि म्यांमार रेड क्रॉस घटनास्थल से शवों को बरामद कर रहा था और जब उन्होंने टिन माउंग हटवे को ढूंढा तो उन्हें वहां किसी के जिंदा मिलने की उम्मीद नहीं थी. उसे निकालने के लिए मलेशियाई बचाव दल को बुलाया गया.

जब भाई को मलबे से बाहर लाए तो खुशी से नाची बहन
टिन माउंग के आठ भाई-बहनों में से 50 वर्षीय बहन नान योन बचाव दल को देख रही थी. जब उन्होंने बचाव टीम को अपने भाई को मलबे से निकालते देखा तो रो पड़ी, खुशी से नाचने लगी. बुधवार को नान योन ने कहा, "मैं इसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती, मैं नाच रही थी, रो रही थी और अपनी छाती पीट रही थी क्योंकि मैं बहुत खुश थी. जब भाई सागाइंग के मुख्य अस्पताल पहुंचा तो उसने उसे थम्स अप दिखाते हुए कहा,"बहन मैं बहुत ठीक हूं." उसकी इच्छाशक्ति बहुत मजबूत है और मुझे लगता है कि इसीलिए वह बच गया."

सरवाइवर टिन माउंग हटवे के साथ उसकी बहन. (एएफपी)

बौद्ध भिक्षु बनने पर विचाकर रहे टिन माउंग
टिन माउंग ह्टवे ने एएफपी को बताया, "मुझे खुशी है कि मैं अब आजाद हू, अगर मैं मर जाता तो मैं कुछ भी नहीं कर पाता. मैं नहीं मरा इसलिए अब मैं जो चाहूं कर सकता हूं." टिन माउंग अब वापस स्कूल टीचर जाकर बच्चों को पढ़ाना चाहता है, लेकिन उन्होंने आगे कहा, "मैं बौद्ध भिक्षु बनने पर भी विचार कर रहा हूं."

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