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बार-बार हुआ फेल, फिर बिहार के लड़के ने कैसे इंटरनेशनल कंपनी में पाई नौकरी?

बिहार के संतोष कुमार शर्मा की सफलता की कहानी वायरल हो रही है. वह बार-बार फेल हुए, लोगों ने उन पर सवाल उठाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. संतोष का कहना है कि 10वीं तक गांव के स्‍कूल में पढ़े जहां लाइट तक नहीं थी. AIEEE में उनकी 7 लाख रैंक आई थी और किसी कॉलेज में एडमिशन नहीं मिला था.

संतोष कुमार शर्मा ने शेयर की अपनी इमोशनल कहानी (Credit: Santosh Kumar Mishra/LinkedIn ) संतोष कुमार शर्मा ने शेयर की अपनी इमोशनल कहानी (Credit: Santosh Kumar Mishra/LinkedIn )
aajtak.in
  • नई दिल्‍ली ,
  • 30 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 8:50 AM IST

बिहार के एक छात्र ने 10वीं तक, पढ़ाई करने के साथ-साथ खेती भी की. फिर उसने इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए टेस्ट दिया, लेकिन बहुत बुरा स्कोर किया. वह AirForce, Navy, Railways, Banks की नौकरी पाने में भी असफल रहा. लेकिन फिर भी शख्स ने हार नहीं मानी और कठिन मेहनत से अपनी मंजिल तक पहुंचा. ये कहानी है संतोष कुमार शर्मा. उन्होंने खुद linkedin.com पर आपबीती शेयर की है जो वायरल हो गई है.

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3 हफ्ते पहले किए उनके linkedin पोस्ट को 44,000 लाइक्स, 2100 कमेन्ट्स और करीब 250 रिट्वीट्स किए गए हैं. संतोष कुमार शर्मा अब माइक्रोसॉफ्ट में काम करते हैं. अंग्रेजी ना आते हुए भी वह कैसे इस मुकाम तक पहुंचे? उन्होंने इसका जवाब भी दिया है.

संतोष ने एयरफोर्स, नेवी, रेलवे और बैंक के भी एग्‍जाम दिए. पर हर जगह वह फेल हुए. इसके बाद उनका एडमिशन डिस्‍टैंस लर्निंग के तहत बीसीए (BCA) में हो गया. एमसीए (MCA) में एडमिशन के लिए 25 अलग-अलग एंट्रेस एग्‍जाम दिए, लेकिन हरेक में फेल हुए. 

संतोष ने हिम्‍मत नहीं हारी और मेहनत जारी रखी. इसके बाद MCA IIT-BHU में उनकी ऑल इंडिया रैंक 4 आई. अन्‍य एग्‍जाम्‍स में भी उनकी रैंक टॉप-100 के बीच थी. 

संतोष कुुमार शर्मा की कमाई अब लाखों में है (Credit: Santosh Kumar Mishra / LinkedIn)

संतोष ने लिंक्‍डइन पोस्‍ट में आगे बताया कि जिंदगी में पहली बार अंग्रेजी में पढ़ाई NIT त्रिची में की. यह उनके लिए बहुत मुश्किल था. पहले सेमेस्‍टर में 6 प्‍वाइंटर आए, जो पूरे क्‍लास में सबसे कम थे. कहीं इंटर्नशिप भी नहीं मिली.

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पोस्‍ट में उन्‍होंने लिखा कि माइक्रोसॉफ्ट उन कंपनियों में शामिल थी, जहां काम करने का उन्‍होंने सपना देखा था. माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के पहले राउंड का टेस्‍ट भी नहीं निकाल पाए. शुरुआत की सभी 15 कंपनियों का पहला राउंड निकालने में असफल रहे.

संतोष ने मानना शुरू कर दिया था कि उन्‍हें कभी भी नौकरी नहीं मिलेगी. संतोष ने हिम्‍मत नहीं हारी और मेहनत करनी शुरू कर दी. संतोष का प्‍लेसमेंट हो तो गया लेकिन उनका पैकेज पूरे क्‍लास में सबसे कम था. हालांकि, जब पहली नौकरी छोड़कर, दूसरी नौकरी हासिल की तो उन्हें अच्छी सैलरी मिल गई.

इसके बाद संतोष ने और मेहनत किए और जिस माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में काम करने का सपना उन्‍होंने देखा था, उसमें उनकी नौकरी लग गई.

'जब मेरे कम्‍युनिकेशन पर सवाल उठाते थे लोग'
संतोष ने लिखा कि एक समय ऐसा था, जब लोग उनके कम्‍युनिकेशन स्किल्स, बोलने के तरीके पर सवाल उठाते थे. संतोष से अक्‍सर लोग यही कहते थे कि तुम कुछ नहीं कर पाओगे. संतोष ने इस पोस्‍ट में एक बेहद खास बात लिखी 'दुनिया तब तक आपको नहीं हरा सकती है, जब तक आप खुद अपनी हार स्‍वीकार ना कर लो'.

 

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