
हाल में NCERT ने अपने सिलेबस में नई शिक्षा नीति के तहत बदलाव के लिए 19 सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी. समिति के अध्यक्ष सीआई. आइजैक ने पीटीआई को दिए को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'समिति ने सर्वसम्मति से सिफारिश की है कि सभी कक्षाओं के छात्रों की पाठ्यपुस्तकों में भारत नाम का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.'
ये खबर आने के बाद से सोशल मीडिया पर भारत बनाम इंडिया की अलग ही जंग छिड़ गई. यहां यूट्यूबर फ्लाइंग बीस्ट (Flying Beast) यानी गौरव तनेजा और जर्मनी में रह रहे भारतीय यूट्यूबर ध्रुव राठी की भी बहस देखने को मिली.
दरअसल, बीते 18 जून को न्यूज़ एजेंसी ANI ने X पर एक पोस्ट किया कि 'NCERT की कमेटी ने सिफारिश की है कि स्कूल की सभी किताबों में 'इंडिया' की जगह 'भारत' लिख दिया जाना चाहिए.' अब सद्गुरु के नाम से प्रसिद्ध जगदीश वासुदेव (जग्गी वासुदेव) ने इस पोस्ट को रीपोस्ट किया. उन्होंने इस बात का समर्थन किया और NCERT को बधाई भी दे दी.
सद्गुरु ने लिखा- अंग्रेजों के भारत छोड़ने के बाद से ही हम लोगों को अपना नाम ‘भारत’ वापस ले लेना चाहिए था. नाम सब कुछ नहीं होता लेकिन यह जरूरी है कि देश का नाम ऐसा हो कि वह सभी के दिलों में गूंजे. भले ही राष्ट्र हमारे लिए सब कुछ है, लेकिन ‘इंडिया’ शब्द का कोई मतलब नहीं है. अगर हम आधिकारिक तौर पर राष्ट्र का नाम नहीं बदल रहे, तो अब समय आ गया है कि हम कम से कम ‘भारत’ को अपनी बोलचाल में शामिल करें. युवा पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि भारत का अस्तित्व इंडिया कहलाए जाने से बहुत पहले से है.
इसपर कमेंट में ध्रुव राठी ने लिखा- जगदीश वासुदेव, क्या आप अपने भारत विरोधी एजेंडा बंद करेंगे? सब जानते हैं कि हमारे संविधान में इंडिया और भारत दोनों ही शब्द लिखे हैं लेकिन सिर्फ राजनीति के लिए आप फूट डालो और राज करो का गंदा खेल खेल रहे हैं.
राठी के पोस्ट पर गौरव तनेजा ने तंज कसते हुए जवाब दिया- लोग इंटरनेट पर अलग-अलग राय क्यों नहीं रख सकते? कुछ विदेशी लोग इंटरनेट के सारे कंटेंट पर कंट्रोल क्यों करना चाहते हैं? राठी ने फिर गौरव को जवाब देने के लिए कमेंट किया- कोई भी विवाद आपके डूबते करियर को नहीं बचा सकता गौरव, यहां तक कि ड्रामा करने के लिए आपके बच्चों के शोषण भी नहीं. आपको इसके लिए अच्छा कॉन्टेंट बनाना होगा. अगर आपको मदद की ज़रूरत है तो मैं आपको अपना YouTube ब्लूप्रिंट कोर्स बता सकता हूं.
नई बुक में दोनों शब्दों का होगा
इधर, NCERT प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी ने साफ कहा है कि 'भारत बनाम इंडिया' इन शब्दों पर बहस बेकार है, क्योंकि संविधान दोनों को बरकरार रखता है. उन्होंने आगे कहा कि एनसीईआरटी को अपनी नई किताबों में ‘भारत’ या ‘इंडिया’ का इस्तेमाल करने से कोई परहेज नहीं है.