
भीषण गर्मी में बारिश की ठंडी बूंदों को सिर्फ इंसान ही नहीं, अगर कद्दू भी दुआएं दें तब क्या? जी हां भले ही ये सुनने बताने में थोड़ा अजीब लगे. मगर जो यूके के हाल हैं. वहां गर्मियों में हुई बारिश ने किसी को फायदा पहुंचाया हो या न हो. मगर कद्दू जिस तरह फले फूले हैं उसने सभी को हैरत में डाल दिया है. बताया जा रहा है कि इस बारिश का सीधा असर हमें हैलोवीन के पर्व पर देखने को मिलेगा. इस पर्व का मुख्य आकर्षण कद्दू होते हैं इसलिए इस बार हैलोवीन के त्योहार में जो भी कद्दू हमारे सामने होंगे, वो पूर्व में हुए कद्दुओं की अपेक्षा कहीं ज्यादा बड़े होंगे. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इन विशाल कद्दुओं के कारण इस बार हैलोवीन के पर्व में लोगों को दोगुना मजा मिलेगा.
कद्दुओं की फसल पर ख़ुशी जाहिर करते हुए ओकले फार्म्स के स्टीव व्हिटवर्थ ने कहा कि, जुलाई और अगस्त का मौसम कद्दू उगाने के लिए सबसे बेहतर था. उन्होंने ये भी कहा कि जून इस बार काफी गर्म रहा जिससे कद्दू के पौधों की ग्रोथ प्रभावित हुई और हमें उम्दा फसल प्राप्त हुई. व्हिटवर्थ ने ये भी बताया कि भले ही धूप पसंद करने वालों और बारबेक्यू फैंस को जुलाई और अगस्त में हुई बारिश न अच्छी लगी हो लेकिन कद्दू के विकास के लिहाज से इस बारिश से बेहतर कुछ नहीं था.
बढ़े हुए कद्दू को देखकर टेस्को पंपकिन बायर लुसी मॉस भी कम उत्साहित नहीं हैं. मॉस ने कहा है कि मौसम ने हमें धूप के अंतराल के साथ सही मात्रा में बारिश दी जिससे इस साल कद्दू सामान्य से बड़े होंगे. सुपरमार्केट को उम्मीद है कि इस बार कार्विंग वाला कद्दू लोगों के बीच सबसे लोकप्रिय होगा.
गौरतलब है कि बीते कुछ सालों से यूके और आसपास में लोगों में स्क्वैश खाने की रुचि बढ़ी हैं. बताया जा रहा है कि सिर्फ टेस्को की ही फूड वेबसाइट पर कद्दू से बने व्यंजनों की खोज करने वाले लोगों में दस गुना वृद्धि हुई. इसपर मॉस ने कहा है कि भोजन की बर्बादी के दृष्टिकोण से यह अच्छी खबर है, खाने का कोई भी सामान बर्बाद नहीं होना चाहिए.
ध्यान रहे यूके का शुमार विश्व के उन देशों में है जहां हर साल हेलोवीन जैसे त्योहार में कद्दू की खूब बर्बादी होती है. ऐसे में अब जबकि लोग इसकी डिशेज खाना पसंद कर रहे हैं उन किसानों के चेहरे पर मुस्कान है जो कद्दू की खेती करते थे.