
कई बार लोग कहीं कोई सामान कूरियर से भेजते हैं तो पहुंचने में उसे थोड़ी देरी हो जाती है. वहीं कई बार जरूरी आधिकारिक चिट्ठियां भी पहुंचने में इतनी लेट हो जाती हैं कि काम खराब हो जाता है. फिर भी कोई चीज कितनी ही लेट हो सकती है, 15 दिन, एक महीने या ज्यादा से ज्यादा 6 महीने. लेकिन हाल में साउथवेस्ट इंग्लैंड में वेस्टगेट के एक घर पर एक पोस्टकार्ड कुल 42 साल देरी से पहुंचा. इसे ऑस्ट्रेलिया के सिड्नी से 42 साल पहले भेजा गया था.
1981 को भेजा गया 2023 में पहुंचा पोस्टकार्ड
पोस्टकार्ड 27 अगस्त 1981 को भेजा गया था. यह दिसंबर 2023 में जाकर सही पते पर पहुंचा है. यहां रहने वाली सामंथा विलियम्स ने बीबीसी को बताया कि पोस्टकार्ड किसने भेजा था ये रहस्य बना हुआ है. विलियम्स ने कहा कि वह कभी यहां रहने वाले स्टीव पैडगेट उर्फ "पैडेज" को चिट्ठी देना चाहती हैं क्योंकि ये उसी के नाम पर है. वहीं इसे भेजने वाले का नाम गैरी लिखा है लेकिन उसके बारे में और कुछ नहीं पता है.
कार्ड के साथ खास तस्वीरें
विलियम्स ने कहा, "इसे भेजने वाला जरूर स्टीव का अच्छा दोस्त था. कार्ड में सिडनी ओपेरा हाउस की कई तस्वीरें शामिल हैं, तब इसे बने केवल 10 साल हुए थे. उन्होंने बताया कि ऐसा लगता है कि गैरी के यहां डिलीवरी समस्य थी क्योंकि चिट्ठी में उसने पैडगे को बताया कि उसे तीन महीने पहले केवल 8 मई को उसका एक खत मिला है. उसने लिखा था कि कॉन्टैक्ट न कर पाने के लिए दुख है. साथ ही उसने स्टीव को गर्मियों की छुट्टी की बधाई दी थी. उसने कहा था कि वह सिडनी में शानदार समय बिता रहा है.
35 सेंट का डाक टिकट
हालांकि यह स्पष्ट है कि पोस्टकार्ड लिखे जाने के बाद से अब तक दुनिया बहुत बदल गई है, लेकिन जो चीज बार- बार इस बात का अहसास दिल रही है वह है पोस्टकार्ड के कोने पर लगा 35 सेंट का डाक टिकट. अगर गेरी आज अपना पोस्टकार्ड भेजता तो इस टिकट की कीमत उसे 2.61 डॉलर हो सकती थी. ऑस्ट्रेलिया पोस्ट के अनुसार, स्टांप देखकर यह भी समझ आ रहा है कि यह पूरे समय के लिए छंटाई कार्यालय में अटका हुआ है.
ब्रिटेन की मेल सर्विस में दिक्कतें
ब्रिटेन की मेल सर्विस, रॉयल मेल, ऐसी डाक सेवाओं में से एक है जो हमेशा से देरी के लिए आलोचना का सामना करती रही है. पिछले 12 महीनों में इसे बड़े पैमाने पर हड़तालों का भी सामना करना पड़ा है. बीबीसी न्यूज़ को दिए एक बयान में, रॉयल मेल के प्रवक्ता ने कहा कि पोस्टकार्ड के साथ क्या हुआ होगा इसका अनुमान लगाना मुश्किल है.