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शराब नहीं, दूध से नए साल की शुरुआत... चर्चा में है जयपुर का ये खास ट्रेंड!

जयपुर से जुड़ी एक परंपरा हर साल सुर्खियां बटोरती है, जो नए साल का स्वागत एक अलग ही अंदाज में करती है. 22 साल पहले इंडियन अस्थमा केयर सोसायटी और राजस्थान युवा छात्र संस्था ने 'दारू नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत' नाम की मुहिम शुरू की. इस अनोखी पहल का उद्देश्य था  एक स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना.

चर्चा में है जयपुर का ये खास ट्रेंड! ( Image Credit-Social Media) चर्चा में है जयपुर का ये खास ट्रेंड! ( Image Credit-Social Media)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:18 PM IST

हर साल नए साल का जश्न अपने आप में खास होता है. जहां कुछ लोग बार में जाकर पार्टी करते हैं, तो कुछ तेज संगीत और दोस्तों के साथ थिरकते हुए इस खास दिन को यादगार बनाते हैं. सोशल मीडिया पर ऐसी कई तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रही हैं, जिनमें लोगों को अपने-अपने अंदाज में जश्न मनाते देखा जा सकता है.

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लेकिन जयपुर से जुड़ी एक परंपरा हर साल सुर्खियां बटोरती है, जो नए साल का स्वागत एक अलग ही अंदाज में करती है. 22 साल पहले इंडियन अस्थमा केयर सोसायटी और राजस्थान युवा छात्र संस्था ने 'दारू नहीं, दूध से करें नववर्ष की शुरुआत' नाम की मुहिम शुरू की. इस अनोखी पहल का उद्देश्य था  एक स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना.

दूध पिलाने की अनोखी परंपरा
31 दिसंबर की रात को राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर इस अभियान की शुरुआत हुई. आयोजकों ने उस रात लोगों को मुफ्त दूध पिलाया और उन्हें जागरूक किया कि नए साल की शुरुआत शराब के नशे में नहीं, बल्कि दूध के साथ होनी चाहिए. यह पहल धीरे-धीरे इतनी लोकप्रिय हो गई कि अब जयपुर के लगभग हर बड़े चौराहे पर दूध पिलाने का आयोजन होता है.

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सोशल मीडिया पर तारीफ
इस साल भी सोशल मीडिया पर जयपुर की इस परंपरा के वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं. लोग इसे एक सकारात्मक पहल बताते हुए जमकर तारीफ कर रहे हैं. नए साल का जश्न भले ही अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता हो, लेकिन जयपुर की यह परंपरा हर साल लोगों के दिलों में खास जगह बना लेती है.

देखें वायरल वीडियो

 

सामाजिक जागरूकता का संदेश
इस अभियान ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पर्यटकों को भी आकर्षित किया है. हर साल हजारों लोग इसमें हिस्सा लेते हैं और इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनकर खुश होते हैं. आयोजकों का कहना है कि इस मुहिम का मकसद सिर्फ दूध पिलाना नहीं है, बल्कि समाज में शराब से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता फैलाना भी है.


 

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