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अब मैं तुम्हारे लायक नहीं... SDM ज्योति और बक्सर के पिंटू को ज़रूर पढ़नी चाहिए आदित्य-वर्षा की ये कहानी

SDM ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य की कहानी का असर अब दूसरे लोगों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है. दो लोगों के बीच में अब अविश्वास का दौर भी देखने को मिल रहा है. लेकिन इस दौर में कई कहानियां ऐसी हैं, जिनके बारे में चर्चा की जानी चाहिए.

एसडीएम ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक का मामला काफी चर्चा में है (तस्वीर- सोशल मीडिया) एसडीएम ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक का मामला काफी चर्चा में है (तस्वीर- सोशल मीडिया)
Shilpa/Akashdeep Shukla
  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2023,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST

इस वक्त पूरे देश में एक महिला की 'बेवफाई' की चर्चा जोर शोर से हो रही है. ये महिला हैं बरेली की SDM ज्योति मौर्य. ज्योति और उनके पति आलोक ने एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शक और टूटे भरोसे से कूट कूटकर भरी पति पत्नी की ये कहानी अब दूसरे कपल्स के बीच भी अविश्वास पैदा कर रही है. समाज के दिमाग पर पड़े जिन तालों को खोलने के लिए न जाने कितनी कुर्बानियां और मशक्कत की गईं, वो ताले अब फिर से जड़े जा रहे हैं. 

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बिहार के बक्सर से एक मामला सामने आया, जहां पिंटू नाम के शख्स ने अपनी पत्नी खुशबू की कोचिंग छुड़वा दी. उसने कहा कि वो पत्नी से प्यार करता है और नहीं चाहता कि वो बड़ी अफसर बनने के बाद ज्योति मौर्य की तरह उसे छोड़ दे. उसने ज्योति के कई वीडियो देखे हैं. दूसरी तरफ खुशबू का कहना है कि वो बीपीएससी की कोचिंग कर अफसर बनना चाहती है. मगर ज्योति के वीडियो वायरल होने के बाद उसका पति कोचिंग में पढ़ने नहीं दे रहा.  

पति बोल रहे- 'बेटी पढ़ाओ पत्नी नहीं' 

गौर करने वाली बात ये है कि आज ज्योति मौर्य और आलोक मौर्य की कहानी हर किसी की जुबान पर है. कई पति अब अपनी पत्नियों को अफसर नहीं बनाना चाहते. जिनकी पत्नियां बाहर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए गई हैं, वो भी चाहते हैं कि वो अब घर वापस लौट आएं. उनका कहना है, 'बेटी पढ़ाओ पत्नी नहीं.' सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आई हुई है. एक पत्नी की बेवफाई, न जाने कितनी पत्नियों की वफ़ा पर भारी पड़ रही है. 

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ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर शायद वो विश्वास वापस लौट आए, जो ज्योति मौर्य की कहानी से खत्म हो रहा है. ये कहानी है आदित्य वशिष्ट और वर्षा शुक्ला की. आदित्य की जिंदगी में जब भयंकर तूफान आया, तब उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि उन्हें छोड़कर चली जाए. लेकिन पत्नी ने इससे साफ इनकार कर दिया. वो हर कदम पर अपने पति का साथ देती रहीं. वो उन्हें एक बार फिर हंसती खेलती जिंदगी के धरातल पर लाने में सफल भी हुईं. 

ग्रेजुएशन के बाद की थी शादी

आदित्य उस वक्त 24 साल के थे, जब उन्होंने कॉलेज से ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद शादी की. फिर 2018 के नवंबर महीने में वो काफी बीमार पड़ गए. उन्हें तेज बुखार और फ्लू हुआ. जब जांच करवाई तो रिपोर्ट्स में सब ठीक था. इसके 10 दिन बाद वो जमीन पर गिर पड़े और उठ नहीं पा रहे थे. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर समस्या क्या है. 

एक दिन ब्रश करते वक्त आदित्य के चेहरे के दाईं तरफ लकवा मार गया. उन्हें इमरजेंसी में अस्पताल ले जाना पड़ा. वो अपनी एक उंगली भी नहीं हिला पा रहे थे. मुसीबत कम होने के बजाय और बढ़ती चली गईं. आदित्य के चेहरे के बाईं तरफ और पूरे शरीर पर भी लकवा मार गया. वो 26 साल की उम्र में Guillain-Barre Syndrone के शिकार हो गए. डॉक्टरों ने कहा कि इस बीमारी से रिकवर होना काफी दुर्लभ है.

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पत्नी से कहा- मुझे छोड़ दो

आदित्य नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी को किसी भी तरह की दिक्कत हो. इसलिए उन्होंने वर्षा से कहा कि वो उन्हें छोड़कर चली जाएं. लेकिन वर्षा ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया. वो अपने पति के साथ इस मुश्किल वक्त में उनका हाथ थामे खड़ी रहीं. वो आदित्य की सबसे मजबूत सपोर्ट सिस्टम बन गईं. 

आदित्य हर दिन अपने शरीर के हिस्सों को मूव करने की कोशिश करते लेकिन हर दिन फेल होते. फिर एक दिन वो अपनी उंगली को हिलाने में सफल हुए और अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे. इसके बाद वो अपने पैरों पर भी खड़े हो गए. तभी उन्हें माइनर कार्डिक अरेस्ट आ गया. 

वर्षा ने नहीं छोड़ा पति का साथ

हिम्मत बंधती बंधती भी टूटती सी दिखने लगी. मगर आदित्य और वर्षा ने एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा. आदित्य आखिरकार रिकवर हुए. और 9 महीने में एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े हो गए. नवंबर 2019 में उन्होंने एक फिटनेस ट्रेनर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की. 

इसके बाद उन्होंने अपने लिए एक नई कार खरीदी. और पहले से बेहतर कमाने लगे. आदित्य का मानना है कि जिंदगी का कुछ नहीं पता कब क्या हो जाए. ऐसे में कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और हर दिन को खुलकर जीना चाहिए. इस कपल की एक बेटी भी है. 

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कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि जिस रिश्ते की नींव में हमेशा साथ निभाने के वचन को रखा गया, उसी रिश्ते में 'बेवफाई' जैसे शब्द को जगह कैसे मिल रही है. इस पर विचार करना बहुत जरूरी है. वरना ज्योति-आलोक के मामले के बाद अविश्वास का दौर न जाने कितने ख्वाबों को दफ़न और मेहनत को ज़ाया कर देगा.
 

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