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टैरिफ वॉर के बीच ट्रंप प्रशासन का फरमान... चीनी लोगों से रोमांस ना करें अमेरिकी वर्कर्स

अमेरिका की नई नीति की तहत चीन में रहकर काम कर रहे यूएस के सरकारी कर्मचारियों और चीनी नागरिकों के बीच प्रेम संबंधों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. यह बढ़ती जासूसी चिंताओं को दर्शाता है.

अमेरिकी राजनयिक व उनके परिवार वाले नहीं कर सकते चीनी लोगों से रोमांस (सांकेतिक तस्वीर, Pexels) अमेरिकी राजनयिक व उनके परिवार वाले नहीं कर सकते चीनी लोगों से रोमांस (सांकेतिक तस्वीर, Pexels)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 5:22 PM IST

अमेरिक के टैरिफ नीति इन दिनों जहां पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. वहीं अब ट्रंप प्रशासन ने चीन में रह रहे अपने कर्मियों के लिए गोपनीय तरीके से एक सख्त निर्देश जारी किया है. इसके तहत चीन में रह रहे अमेरिका के सरकारी कर्मियों को चीन के स्थानीय नागरिकों के साथ रोमांटिक या निजी संबंध रखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

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एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक यह निर्देश राजनयिकों, उनके परिवार के सदस्यों और सुरक्षा मंजूरी वाले कान्ट्रेक्टरों पर लागू होता है.जनवरी में अमेरिकी राजदूत निकोलस बर्न्स ने चीन से जाने से ठीक पहले ये निर्देश दिया था.

चीन स्थित दूतावास में रह रहे अमेरिकी कर्मियों के लिए सख्त निर्देश
यह प्रतिबंध चीन में अमेरिकी मिशनों को कवर करता है, जिसमें बीजिंग स्थित दूतावास और गुआंगज़ौ, शंघाई, शेनयांग, वुहान और हांगकांग स्थित वाणिज्य दूतावास शामिल हैं. यह अमेरिकी कर्मियों और चीनी नागरिकों के बीच किसी भी प्रकार के रोमांटिक या निजी संबंधों पर प्रतिबंध लगाता है.

कोई राजनयिक लोकल के साथ नहीं रख सकता संबंध
यह संवेदनशील जानकारी तक पहुंच रखने वाले परिवार के सदस्यों और कान्ट्रेक्टरों पर भी लागू होता है. यह नया निर्देश चीन से बाहर तैनात अमेरिकी कार्मिकों पर लागू नहीं होगा, तथा जिन लोगों के चीनी नागरिकों के साथ पहले से ही संबंध हैं, वे छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं. हालांकि, किसी भी इनकार पर उन्हें संबंध समाप्त करने या अपना पद छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.

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यह नीति, जिसे सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं किया गया है, लेकिन जनवरी में ही अमेरिकी कार्मियों को आंतरिक रूप से इस बारे में सूचित कर दिया गया था. यह संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनावपूर्ण संबंधों को रेखांकित करती है.

शीत युद्ध का दौर याद दिला रहे ये प्रतिबंध
यह निर्णय व्यापार, प्रौद्योगिकी और वैश्विक प्रभाव पर चल रहे विवादों के बीच लिया गया है. नए प्रतिबंध को शीत युद्ध के दौर की याद दिलाते हुए एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जब सोवियत नियंत्रित क्षेत्रों और चीन में अमेरिकी कर्मियों पर इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए गए थे. उस समय, अमेरिकी सरकार ने जासूसी और व्यक्तिगत संबंधों के माध्यम से संवेदनशील जानकारी के संभावित जोखिम को रोकने के लिए राजनयिकों पर सख्त नियम लागू किए थे.

बढ़ता तनाव, कड़ा नियंत्रण
1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद इस नीति में ढील दी गई थी, लेकिन हालिया कदम से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन का मानना ​​है कि हाल के वर्षों में चीनी अधिकारियों द्वारा जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने का खतरा बढ़ गया है. हाल के वर्षों में, व्यापार, प्रौद्योगिकी और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ गया है.

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अमेरिकी राजनयिकों को बहकाते हैं चीनी एजेंट
पूर्व सीआईए विश्लेषक और वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक, द जेम्सटाउन फाउंडेशन के अध्यक्ष पीटर मैटिस ने कहा कि कम से कम दो मामले ऐसे थे, जिनमें चीनी एजेंटों ने चीन में तैनात अमेरिकी राजनयिकों को बहकाया, हालांकि उन्होंने हाल के वर्षों में ऐसे किसी मामले के बारे में नहीं सुना है.

मैटिस ने कहा कि एक और मुद्दा यह है कि चीनी राज्य सिर्फ जासूसों के जरिए ही खुफिया जानकारी नहीं जुटाती, बल्कि आम चीनी लोगों पर दबाव डालकर भी जानकारी जुटाती है. अक्सर धमकियों या डराने-धमकाने के जरिए.  मैटिस ने कहा कि इसका मतलब यह है कि कोई भी चीनी नागरिक जो किसी अमेरिकी राजनयिक के साथ डेट करता है, वह दबाव में आ सकता है.

'चीनी सुरक्षा मंत्रालय जानकारी जुटाने के हर हथकंडे अपनाता है'
मैटिस ने चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय का संदर्भ देते हुए कहा कि एमएसएस किसी भी मानवीय संपर्क का लाभ उठाने के लिए तैयार हैं, जिसका लक्ष्य खुफिया जानकारी एकत्र करना है. नियम में यह बदलाव बताता है कि दूतावास और अमेरिकी सरकार तक पहुंचने की कोशिश में एमएसएस बहुत अधिक आक्रामक हो गया है.

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