
इस देश की पुलिस ने दो मुस्लिम महिलाओं का हिजाब जबरन उतरवा दिया था. जिसके बाद अब इन महिलाओं को मुआवजे के रूप में 7.5 मिलियन डॉलर (करीब 145 करोड़ रुपये) मिलेंगे. मामला अमेरिका की न्यूयॉर्क सिटी का है. शहर की पुलिस ने इन महिलाओं को गिरफ्तार किया था. फिर इनकी तस्वीरें खींचने के लिए इन्हें हिजाब उतारने पर मजबूर कर दिया. इसे महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है. मामले में अदालत में मुकदमा दायर किया गया था. जिसके निपटारे के लिए न्यूयॉर्क सिटी महिलाओं को मुआवजा देने पर सहमत हुआ.
दरअसल किसी भी मामले में कार्रवाई के तहत पुरुषों और महिलाओं को फोटो खिंचवाने से पहले धार्मिक पोशाक हटानी होती है. मामले में मुकदमे पर शुक्रवार को मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में सहमति बनी और अब इसके लिए अमेरिकी जिला न्यायाधीश एनालिसा टोरेस की मंजूरी की आवश्यकता है.
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, कानूनी फीस और लागत में कटौती के बाद कुल भुगतान लगभग 13.1 मिलियन डॉलर (करीब 109 करोड़ रुपये) का होगा, और अगर 3,600 से अधिक इसी श्रेणी के सदस्य दावे पेश करते हैं, तो इसमें वृद्धि हो सकती है. फिर प्रत्येक को 7,824 डॉलर (करीब 6.50 लाख रुपये) और 13,125 डॉलर (करीब 10.93 लाख रुपये) के बीच भुगतान किया जाएगा.
इस समझौते के तहत जमीला क्लार्क और अरवा अजीज द्वारा साल 2018 में दायर किए गए एक मुकदमे का समाधान किया गया है. इन महिलाओं का कहना था कि उन्हें शर्म और आघात महसूस हुआ, जब पुलिस ने उन्हें पिछले साल मैनहट्टन और ब्रुकलिन में अपनी तस्वीरें क्लिक करने के लिए (वो तस्वीर जो किसी को गिरफ्तार किए जाने के बाद खींची जाती है) के लिए हिजाब हटाने के लिए मजबूर किया था. दोनों को सुरक्षा से जुड़े आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया था. उनके वकीलों ने हिजाब हटाने की तुलना कपड़े उतरवाकर तलाशी लेने से की थी.
क्लार्क ने अपने वकीलों द्वारा दिए गए एक बयान में कहा, 'जब उन्होंने मुझे अपना हिजाब उतारने के लिए मजबूर किया, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं नग्न कर दी गई हूं. मुझे यकीन नहीं है कि मेरे पास वैसे शब्द हैं, जो ये जाहिर कर सकें कि मैंने कितना अपमानित महसूस किया था.' मुकदमे के जवाब में, न्यूयॉर्क का पुलिस विभाग 2020 में पुरुषों और महिलाओं को मगशॉट्स (गिरफ्तारी के बाद ली जाने वाली तस्वीरें) के दौरान सिर ढकने की अनुमति देने पर सहमत हुआ था, हालांकि लोगों के चेहरे दिखने चाहिए.
शहर के कानून विभाग के प्रवक्ता निकोलस पाओलुची ने कहा, 'ये समझौता धार्मिक विश्वास के प्रति पुलिस विभाग के सम्मान और गिरफ्तारी की तस्वीरें लेने की कानूनी आवश्यकता को सावधानीपूर्वक बैलेंस करता है.' नई नीति के तहत जो बदलाव हुआ है, उसके तहत सिर पर धार्मिक परिधान पहना जा सकता है. इसमें यहूदियों द्वारा पहना जाने वाले यरमुल्क और सिखों द्वारा पहनी जाने वाली पगड़ी शामिल है.
पुलिस अधिकारी हथियारों या प्रतिबंधित सामग्री की तलाशी करने के लिए अस्थायी रूप से सिर ढकने वाले कपड़े हटा सकते हैं, लेकिन प्राइवेट स्थान पर ही ऐसा हो सकता है. पुरुषों का परिधान पुरुष अधिकारी और महिलाओं का महिला अधिकारी हटा सकती हैं.
क्लार्क और अजीज के वकील अल्बर्ट फॉक्स काह्न ने कहा, 'ये समझौता एक शक्तिशाली संदेश भेजता है कि NYPD कीमत चुकाए बिना न्यूयॉर्क वासियों के संशोधित अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता है.' 16 मार्च 2014 से 23 अगस्त 2021 के बीच जिन लोगों को सिर से कवर उतारने को मजबूर किया गया है, वो सभी इस समझौते के पात्र हैं.