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कैसे बन रही रामनगरी 'विकास'धाम ? बदली हुई अयोध्या रामलला को भी कर देगी मंत्रमुग्ध

एक शहर के रूप में जिस तरह अयोध्या का विकास हो रहा है, इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाले वक़्त में अयोध्या यूपी के अलावा देश के तामाम बड़े शहरों को कांटे की टक्कर देगी. हर दिवाली पर लाखों दीयों से जगमगाने वाली अयोध्या की हर शाम अब दीपावली की तरह ही रोशन रहेगी.

बिलाल एम जाफ़री
  • नई दिल्ली ,
  • 29 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:13 PM IST

22 जनवरी 2024. वो तारीख है जो इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी. इस दिन अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्रीराम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी. प्रधानमंत्री मोदी समेत देश की तमाम बड़ी हस्तियां अयोध्या में रहेंगी. जिक्र अगर तैयारियों का हो तो, चाहे वो एयरपोर्ट हो. या रेलवे स्टेशन. पूरे अयोध्या में कहीं भी नजर डालें, तो युद्ध स्तर पर हो रहा निर्माण. यह अपने अंतिम दौर में पहुंच रहा है. कोई शक नहीं है कि एक शहर के रूप में जिस तरह से अयोध्या का विकास हो रहा है, निकट भविष्य में कौशलपुरी यूपी के अलावा देश के तामाम बड़े शहरों को कांटे की टक्कर देगी. 

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एक उत्तर भारतीय और उसमें से भी पूर्वांचल से संबंध रखने के कारण अयोध्या से मेरा नाता कोई आज का नहीं है. मैं अयोध्या को काफी समय से देख रहा हूं. जैसी अयोध्या आज है, इसे स्वीकार करने में मुझे कोई गुरेज नहीं है कि ये अयोध्या वो तो बिलकुल नहीं है जिसे मैंने बचपन में देखा था.

उद्घाटन से पहले क्या चल रहा है अयोध्या में ? ये सवाल तमाम लोगों की तरह मेरे भी जेहन में था. जवाब की तलाश में अभी बीते दिनों मैंने भी अयोध्या का रुख किया. और जो नज़ारे देखे उन्होंने स्वतः ही इस बात की पुष्टि कर दी कि, अयोध्या के लिहाज से आने वाला वक़्त बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है.

आज की अयोध्या को समझने से पहले हमें इस बात को समझना होगा कि, शहर चाहे छोटा हो या बड़ा उसका अपना एक मनोविज्ञान होता है. जो हमें उस शहर के मिजाज से, उसके मयार और तासीर से रूबरू कराता है. अभी की अयोध्या को छोड़ दें और अब से ठीक 5 साल पहले जाएं तो मिलता है कि तब की अयोध्या ठीक वैसी ही थी जैसा कोई टियर 3 शहर होता है.

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न कोई भागदौड़. न तो मीडिया के कैमरों की चमक दमक. एक सेट पैटर्न था जिसे अपनाकर लोग अपनी ज़िन्दगी जी रहे थे. यानी सुबह होती लोग राम की पैड़ी या सरयू नदी के घाट पर स्नान करते फिर राम जन्म भूमि, हनुमान गढ़ी, दशरथ भवन जैसे स्थानों पर पूजा पाठ होता. लोगों को जो खाली समय मिलता वो किसी चाय की टपरी पर देश की राजनीति पर चर्चा में बीतता. 

कह सकते हैं तब अयोध्या में सुकून था. रोजगार के बहुत ज्यादा विकल्प थे नहीं इसलिए युवा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, नोएडा, गुरुग्राम जैसे शहरों में थे और छुट्टियों या फिर त्योहारों में अयोध्या जाते और उस सुकून को जीने की कोशिश करते थे.   

जैसा कि हम ऊपर ही इसका वर्णन कर चुके हैं कि अयोध्या एक छोटा शहर हुआ करता था इसलिए यहां भी लोगों को उन्हीं चुनौतियों का सामना करना पड़ता जैसा प्रायः छोटे शहर के साथ होता है. संकरे रास्ते, ट्रैफिक जाम. पतली गलियां, छुट्टा आवारा पशु लेकिन अब अयोध्या का मामला बिलकुल अलग है. 

उद्घाटन से पहले जिला प्रशासन ने न केवल इन बिंदुओं पर गौर किया. बल्कि जो रोड मैप तैयार हुआ उसमें इन्हें रखा गया. और आज स्थिति कैसी है इसे जानने के लिए हम करीब 13 किलोमीटर लंबे 'रामपथ'  जो अयोध्या स्थित सआदतगंज बाईपास से शुरू हुआ है और राम की पैड़ी तक गया है, का रुख कर सकते हैं. 

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करीब 13 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में जो भी काम हुआ है वो अपने में बेमिसाल है. अगर आप अयोध्या आ रहे हैं तो आपको यहां सड़क का चौड़ीकरण तो दिखेगा ही साथ ही जो इस पूरे रामपथ की थीम है वो आपका मन मोह लेगी. 

क्या है अयोध्या स्थित रामपथ की थीम 

इस सवाल के जवाब में जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार पूरे रामपथ पर बिल्डिंग चाहे कमर्शियल हो या फिर डोमेस्टिक उनका नया डिज़ाइन शहर की पुरानी इमारतों के डिज़ाइन से प्रेरित है. बालकनी को विंटेज ब्रिटिश स्टाइल में सफ़ेद रंग का रखा गया है. बिल्डिंग की सामने की दीवार पर जो पेंट करवाया जा रहा है वो क्रीम और सफ़ेद रंग के कॉम्बिनेशन में है.

अयोध्या में जो नया निर्माण हो रहा है उनमें रोचक ये भी है कि घरों की दीवारों पर कंगूरों का जो डिज़ाइन बनवाया जा रहा है वो ठीक वैसा ही है जो हमें हनुमानगढ़ी के पुराने मंदिरों में देखने को मिलेगा.  

इसके आलावा शहर को रौशन करने के लिए जो लाइट्स लगवाई गयीं हैं. वो भी एक विशेष थीम पर आधारित हैं. कुछ लाइट्स में सूर्य देव को थीम में लिया गया है तो वहीं कुछ लाइट्स ऐसी भी हैं जिनका आकार प्रकार शंख से प्रेरित है. 

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बताते चलें कि अभी अयोध्या में राम पथ और धर्म पथ का कार्य पूर्ण हो गया है. इसके बाद दूसरे फेज में कार्य होना है जिसमें भरत पथ और लक्ष्मण पथ का निर्माण किया जाएगा. जिला प्रशासन ने इसके लिए नपाई कर ली है और कहा ये गया है कि आने वाले वक़्त में अयोध्या का स्वरूप सोच और कल्पना से परे होगा. 

अंत में हम बस ये कहते हुए अपनी बातों को विराम देंगे कि वो निर्माण जिसे होने में कम से कम 4 दशक लगता वो अयोध्या में हो गया है और इसका पूरा श्रेय अयोध्या जिला प्रशासन के अलावा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है.

समय निकालिये और अयोध्या आइये. नई अयोध्या बाहें फैलाकर आपका स्वागत करने को तैयार है. 

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