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'जीने के लिए कुछ ही हफ्ते बचे...', मौत के दिन गिन रही महिला, बताया कैसे मिली ये सजा!

इस महिला का कहना है कि इसके पास जीने के लिए अब केवल कुछ ही हफ्तों का वक्त बचा है. पति ने कहा कि ये सब उनके लिए काफी भयानक है.

महिला के पास जीने के लिए बचे हैं कुछ हफ्ते (प्रतीकात्मक तस्वीर- Pexels) महिला के पास जीने के लिए बचे हैं कुछ हफ्ते (प्रतीकात्मक तस्वीर- Pexels)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 02 जून 2023,
  • अपडेटेड 12:17 PM IST

इस महिला का कहना है कि अब इसके पास जीने के लिए कुछ ही हफ्तों का वक्त बचा है. उसे शुरू से पता था कि कुछ तो गलत है, लेकिन जिनका काम इस गलत का पता लगाना था, उन्होंने ही ऐसा नहीं किया. ब्रिटेन की रहने वाली 48 साल की सारा मिडलटन को बीते साल मई महीने में पता चला था कि वह अडवांस नॉन-हॉजकिन लिंफोमा से पीड़ित हैं. ये एक तरह का कैंसर है. डॉक्टरों ने दो बार उनके कैंसर को नजरअंदाज करने की गलती की है.  

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मिरर यूके की रिपोर्ट के अनुसार, सारा ने कहा कि बीमारी का पता चलने से करीब दो महीने पहले वो अपने शरीर में दिखने वाले लक्षणों के चलते दो बार स्थानीय अस्पताल भी गईं. उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ था. मगर दोनों ही बार उन्हें अस्पताल में बताया गया कि कुछ भी गलत नहीं है. सारा के पति मेरियस ग्रिगोरियु ने कहा कि बाद में अस्पताल की तरफ से फोन आया और कपल को वहां बुलाया गया, ताकि मामले की जांच कर सवालों के जवाब ढूंढे जा सकें.

पति ने सबकुछ डरावना बताया

मेरियस का कहना है, 'बात ये है कि किसी चमत्कार को छोड़कर हम लगभग निश्चित रूप से सारा को खोते जा रहे हैं, ये भयानक है. उसे इस स्थिति में नहीं होना चाहिए था, जिसमें वो अभी है, अगर दो महीने पहले ही मामले का पता चल जाता. ये डरावना है. सारा बुरी तरह निराश है.' बीते साल मार्च में सीने में दर्द होने के बाद सारा को लगा कि उन्हें हार्ट अटैक आया है. उन्होंने इमरजेंसी नंबर पर फोन किया. तब उन्हें स्थानीय अस्पताल के लिए रेफर किया गया था.  

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अस्पताल जाने पर उनके ब्लड सैंपल लिए गए. जांच करने के बाद पता चला कि उनके दर्द का कारण इनमें से कोई एक हो सकता है- मैलिग्नेंसी (कैंसर का ट्यूमर) या पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में ब्लॉक्ड ब्लड वेसल). उन्हें खून पतला करने की दवा के साथ घर भेज दिया गया और दो दिन बाद स्कैन के लिए आने को कहा. इस दौरान सीने का दर्द कम हो गया था. जब स्कैन करवाया तो उसमें सब ठीक बताया गया. डॉक्टरों ने कहा कि पल्मोनरी एम्बोलिज्म नहीं है. लेकिन सारा और उनके पति को लगा कि डॉक्टरों ने मैलिग्नेंसी के मामले की जांच नहीं की है.

नर्स ने भी गलत वजह बताई

सारा ने कहा कि उन्होंने उसी वक्त नर्स से कहा कि वो जांच करके बताए कि सब ठीक तो है न. साथ ही पेट की जांच करे जिस पर सूजन आ रही है. उसने किया भी लेकिन कहा कि सूजन शायद कोरोना वायरस की वजह से आ रही है. इसलिए सारा घर आ गईं. अगले दो महीने में उनका पेट तेजी से फूलता रहा. फिर सारा अपने डॉक्टर के पास गईं. उन्होंने सीटी स्कैन करवाया. जिससे उन्हें पेट के कैंसर का पता चला. 

इसके बाद सारा का करीब चार महीने तक इलाज चला. लेकिन कुछ फरक नहीं पड़ा.  सारा 23 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती हुई थीं. इसके करीब एक हफ्ते के भीतर इलाज शुरू हुआ. परिवार ने सब तरह का इलाज करवा लिया है लेकिन किसी से कोई फरक नहीं पड़ रहा. कभी 10 किलोमीटर तक दौड़ लगाने वाली सारा को कहा गया है कि अब उनके पास जीने के लिए कुछ ही हफ्तों का वक्त बचा है.

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