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Mukhtar Ansari: पत्नी अफशां पर 11 केस, दो भाइयों पर 10 और दो बेटों पर 14 केस... कितनी फंसी है मुख्तार अंसारी की फैमिली?

माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की मौत हो गई है. वो यूपी की बांदा जेल में बंद था. मुख्तार की पत्नी अफशां अंसारी भी लंबे समय से फरार चल रही हैं. पति की मौत के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या वो सामने आएंगी या नहीं. अफशां अंसारी पर भी 11 केस दर्ज हैं और 50 हजार का इनाम घोषित है.

मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशां अंसारी की पुलिस तलाश कर रही है. (फाइल फोटो) मुख्तार अंसारी की पत्नी अफशां अंसारी की पुलिस तलाश कर रही है. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 11:56 AM IST

माफिया से नेता बने गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई. वो करीब 19 साल से जेल में बंद था. मुख्तार के खिलाफ 65 केस दर्ज हैं. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, धोखाधड़ी, गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, सीएलए एक्ट से लेकर एनएसए तक शामिल है. इनमें से उसे 8 मामलों में सजा हो चुकी थी. 21 केस विचाराधीन हैं. सिर्फ मुख्तार ही नहीं, उसके परिवार के सदस्यों पर भी कानून का शिकंजा कसा गया है. मुख्तार की बीवी अफशां अंसारी लंबे समय से फरार है. उस पर 50 हजार का इनाम है. लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है.

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अब मुख्तार अंसारी की मौत के बाद सवाल उठ रहा है कि पत्नी अफशां अंसारी सामने आएंगी या नहीं? यूपी पुलिस के लिए अफशां अंसारी की गिरफ्तारी चुनौती बनी हुई है. अफशां अंसारी पर कुल 11 केस दर्ज हैं. मुख्तार का घर गाजीपुर जिले में मुहम्मदाबाद के दर्जी टोला यूसुफपुर गांव में है.

परिवार पर दर्ज हैं 101 केस

मुख्तार अंसारी समेत उसके परिवार पर 101 केस दर्ज हैं. अकेले मुख्तार अंसारी पर कई जिलों में हत्या के 8 मुकदमे समेत 65 मामले दर्ज हैं और वो बांदा जेल में बंद था. भाई अफजाल अंसारी पर 7 मामले, भाई सिगबतुल्लाह अंसारी पर 3 केस, मुख्तार अंसारी की पत्नी अफसा अंसारी पर 11 मुकदमे, बेटे अब्बास अंसारी पर 8 तो छोटे बेटे उमर अंसारी पर 6 केस दर्ज हैं. मुख्तार अंसारी की बहू निखत पर 1 मुकदमा दर्ज है.

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पुलिस रिकॉर्ड में अफशां अंसारी IS-191 गैंग की सदस्य

अफशां पर गाजीपुर कोतवाल, मुहम्मदाबाद कोतवाली, नंदगंज, मऊ लखनऊ में भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. अफशां अंसारी पर कोतवाली थाना क्षेत्र में 406, 420, 386, 506 के तहत मामला दर्ज है. अफशां पर गजल होटल लैंड डील के अलावा नंदगंज में सरकारी जमीन को कब्जा करने का आरोप है. पुलिस रिकॉर्ड में अफशां अंसारी IS-191 गैंग की सदस्य के तौर पर चिह्नित हैं. कुछ मामलों में अफशां के साथ उसके दो भाइयों को भी पुलिस ने नामजद किया है. पुलिस ने अफशां की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी की, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा. इसके चलते अफशां पर घोषित इनाम की राशि को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया.

'15 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में आया'

मुख्तार अंसारी ने उत्तर प्रदेश में अपराध के बाद राजनीति की दुनिया में कदम रखा. गैंगस्टर से राजनेता बना और हत्या से लेकर जबरन वसूली तक के आपराधिक मामले दर्ज किए गए. विभिन्न राजनीतिक दलों के टिकट पर पांच बार विधायक चुना गया. मुख्तार अंसारी का 1963 में एक प्रभावशाली परिवार में जन्म हुआ और उसने खुद का गिरोह खड़ा किया. उसके बाद सरकारी ठेकों पर कब्जा जमाना शुरू किया. चंद समय में माफिया के रूप में पहचान बना ली और अपराध की दुनिया में प्रवेश कर लिया. अपराध से उसका जुड़ाव 1978 में ही शुरू हो गया था, तब अंसारी सिर्फ 15 साल का था. कानून के साथ उसका पहला बार सामना तब हुआ, जब उस पर गाजीपुर के सैदपुर थाने में आपराधिक धमकी की एफआईआर दर्ज करवाई गई.

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'अपराध से राजनीति में एंट्री की'

करीब एक दशक बाद 1986 में वो ठेका माफिया मंडली में एक जाना-पहचाना चेहरा बन चुका था. तब तक उसके खिलाफ गाजीपुर के मुहम्मदाबाद पुलिस स्टेशन में हत्या का एक और मामला दर्ज हो गया था. अगले दशक में मुख्तार अंसारी अपराध का एक आम चेहरा बन गया. उसके खिलाफ गंभीर आरोपों के तहत कम से कम 14 और मामले दर्ज किए गए. हालांकि, उसका बढ़ता आपराधिक ग्राफ राजनीति में एंट्री पाने में बाधा नहीं बन सका.

'जेल में रहकर तीन बार चुनाव जीता'

मुख्तार अंसारी पहली बार 1996 में मऊ से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए. उसने 2002 और 2007 के विधानसभा चुनावों में निर्दलीय चुनाव लड़ा और इसी सीट पर जीत हासिल की. 2012 में उसने कौमी एकता दल लॉन्च किया और मऊ से फिर से जीत हासिल की. 2017 में वो फिर से मऊ से जीता. 2022 में उसने अपने बेटे अब्बास अंसारी के लिए सीट खाली कर दी. अब्बास ने इस सीट पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की. सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर हैं और इस समय वो यूपी सरकार में मंत्री हैं. 2022 के चुनाव के वक्त राजभर और सपा ने अलायंस में चुनाव लड़ा था. मुख्तार 2005 से जेल में है और उसने 2007, 2012 और 2017 का चुनाव जेल में रहकर ही जीता.

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'मुख्तार 19 साल से जेल में बंद था'

मुख्तार करीब 19 साल से जेल में बंद था. 2005 में उसने मऊ दंगे में नाम आने के बाद सरेंडर कर दिया था. उसके बाद से मरने तक (28 मार्च 2024) मुख्तार अंसारी यूपी और पंजाब की अलग-अलग जेलों में बंद रहा. 2005 से उसके खिलाफ हत्या समेत 28 आपराधिक मामले और यूपी के गैंगस्टर अधिनियम के तहत सात मामले दर्ज हुए. उसे सितंबर 2022 से आठ आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया गया और अलग-अलग अदालतों में 21 मामले विचाराधीन हैं.

'दो बार उम्रकैद की सजा मिली'

मुख्तार को हाल ही में करीब 37 साल पुराने केस में सजा सुनाई गई थी. उसे फर्जी तरीके से हथियार का लाइसेंस हासिल करने का दोषी पाया गया था. इस केस में एमपी-एमएलए कोर्ट ने अंसारी को आजीवन कारावास और 2.02 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी. पिछले 18 महीनों में यूपी की अलग-अलग अदालतों द्वारा यह आठवां मामला था, जिसमें मुख्तार को सजा सुनाई गई और दूसरी बार उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी.

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'गैंगस्टर एक्ट में 10 साल की सजा'

इससे पहले 15 दिसंबर, 2023 को वाराणसी की एमपी/एमएलए कोर्ट ने मुख्तार को सजा सुनाई थी. मुख्तार को बीजेपी नेता और कोयला व्यापारी नंद किशोर रूंगटा के 22 जनवरी 1997 को अपहरण और हत्या से जुड़े मामले में पांच साल और छह महीने की सजा मिली थी. 27 अक्टूबर 2023 को गाजीपुर एमपी/एमएलए कोर्ट ने 2010 में उसके खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मामले में 10 साल के कठोर कारावास और 5 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी.

'अवधेश राय हत्याकांड में आजीवन कारावास'

5 जून 2023 को वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस विधायक और वर्तमान यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की हत्या के मामले में मुख्तार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. 3 अगस्त 1991 को जब अवधेश और उनके भाई अजय वाराणसी के लहुराबीर इलाके में अपने घर के बाहर खड़े थे, तब उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था.

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'कृष्णानंद राय हत्याकांड में भी नाम आया'

29 अप्रैल 2023 को गाजीपुर एमपी/एमएलए कोर्ट ने बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में अंसारी को 10 साल कैद की सजा सुनाई थी. मुख्तार को गैंगस्टर केस में दोषी पाया गया था. इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 23 सितंबर, 2022 को अंसारी को लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में 1999 में उसके खिलाफ दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मामले में पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया था.

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'जेलर को धमकाने के आरोप में भी सजा'

15 दिसंबर, 2022 को गाजीपुर एमपी/एमएलए अदालत ने उसके खिलाफ 1996 और 2007 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के दो अलग-अलग मामलों में 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी और प्रत्येक पर 5 लाख का जुर्माना लगाया था. पिछले 13 महीनों में मुख्तार अंसारी को पहली सजा इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सुनाई. 2003 में लखनऊ जिला जेल के जेलर को धमकी देने के आरोप में उसे 21 सितंबर, 2022 को सात साल की कैद की सजा सुनाई गई थी.

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'मुख्तार दो साल से ज्यादा रोपड़ जेल में बंद रहा'

उत्तर प्रदेश सरकार को मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था. तत्कालीन बसपा विधायक अंसारी को जबरन वसूली के मामले में जनवरी 2019 में रोपड़ जेल में बंद किया गया था और वो दो साल से ज्यादा समय तक वहां रहा. उसकी वहां खातिरदारी की चर्चाएं भी खूब हुईं और AAP की भगवंत मान सरकार ने कांग्रेस पर सुविधाएं देने जैसे आरोप लगाए.

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मार्च 2021 में यूपी सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार को मुख्तार अंसारी की हिरासत यूपी को सौंपने का निर्देश दिया था. मुख्तार को मेडिकल मसले का आधार बनाकर यूपी पुलिस को नहीं सौंपा जा रहा था. अदालत ने यह भी कहा था कि एक दोषी या विचाराधीन कैदी, जो देश के कानून का उल्लंघन करता है, वो एक जेल से दूसरे जेल में अपने ट्रांसफर का विरोध नहीं कर सकता है और जब कानून के शासन को चुनौती दी जा रही हो तो अदालतों को मूकदर्शक नहीं बनना चाहिए.

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यूपी में योगी सरकार आने के बाद 2020 से मुख्तार अंसारी गिरोह पुलिस के निशाने पर था. राज्य सरकार ने गिरोह से संबंधित 608 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति को या तो जब्त कर लिया या ध्वस्त कर दिया. इस अवधि में गिरोह के 215 करोड़ रुपये से ज्यादा के अवैध कारोबार, ठेकों या टेंडरों को भी पुलिस ने रोका.

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