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यूपी: बुलंदशहर में 80 साल के बुजुर्ग पर 4 साल की बच्ची से बलात्कार का आरोप

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक 80 वर्षीय व्यक्ति को अपने पड़ोस की चार वर्षीय बच्ची के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
aajtak.in
  • बुलंदशहर,
  • 23 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक 80 वर्षीय व्यक्ति को अपने पड़ोस की चार वर्षीय बच्ची के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि घटना नरसेना पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले एक गांव में हुई, जब बच्ची शनिवार शाम को अपने दादा के घर की छत पर खेल रही थी और अचानक लापता हो गई. 

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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि तलाश करने पर उसके परिवार ने बगल के घर से उसकी चीखें सुनीं, जहां 80 वर्षीय व्यक्ति रहता था. अधिकारी ने बताया कि परिवार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने व्यक्ति को बच्ची के साथ 'आपत्तिजनक स्थिति' में पाया, बच्ची के गुप्तांगों से खून बह रहा था. 

पुलिस अधीक्षक (शहर) शंकर प्रसाद ने कहा, 'नाबालिग को इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है.' उन्होंने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है.

पॉक्सो एक्ट के तहत सजा

पॉक्सो (POCSO - The Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) कानून नाबालिगों (18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों) के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को रोकने और दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए बनाया गया है. इसके तहत विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग सजा निर्धारित की गई है.

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पॉक्सो एक्ट के तहत सजा:
यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) -
3 साल तक की सजा और जुर्माना

यौन हमले (Sexual Assault) -
3 से 5 साल तक की जेल और जुर्माना

गंभीर यौन हमला (Aggravated Sexual Assault) -
10 साल से लेकर आजीवन कारावास और जुर्माना

बलात्कार (Penetrative Sexual Assault) -
10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और जुर्माना

गंभीर बलात्कार (Aggravated Penetrative Sexual Assault) -
उम्रकैद या मृत्युदंड (निर्भया केस के बाद संशोधन)

बच्चों की अश्लील सामग्री बनाना/फैलाना (Child Pornography) -
5 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना

पॉक्सो के तहत विशेष प्रावधान:
मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होती है
बच्चों की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती
बच्चियों और बच्चों दोनों को समान सुरक्षा मिलती है
18 साल से कम उम्र के आरोपी भी वयस्कों की तरह ट्रायल का सामना कर सकते हैं (निर्दिष्ट मामलों में)

पॉक्सो एक्ट के तहत अपराधियों को कड़ी सजा दी जाती है ताकि बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराधों पर रोक लगाई जा सके. हाल के वर्षों में इस कानून को और सख्त बनाया गया है ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिले.

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