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बेहमई कांड: डाकू पोसा की टीबी से मौत, फूलन देवी के साथ मिलकर की थीं 20 हत्याएं

कानपुर के चर्चित बेहमई कांड में आरोपी 85 साल के डाकू पोसा की मौत हो गई है. वह टीबी का मरीज था. सोमवार देर रात तबीयत बिगड़ने के बाद जेल वार्डन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. खतरनाक डकैत फूलन देवी के साथ मिलकर 42 साल पहले उसने बेहमई कांड को अंजाम दिया था.

डाकू पोसा की हुई मौत डाकू पोसा की हुई मौत
सूरज सिंह
  • कानपुर,
  • 11 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 4:38 PM IST

उत्तर प्रदेश के चर्चित बेहमई कांड में आरोपी 85 साल के डाकू पोसा की मौत हो गई है. कानपुर जेल में बंद पोसा की तबीयत सोमवार की देर रात बिगड़ गई थी. इसके बाद उसे जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था.

जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने पोसा को मृत घोषित कर दिया. बता दें कि पोसा ने 42 साल पहले खतरनाक डाकू रही फूलन देवी के साथ मिलकर बेहमई कांड को अंजाम दिया था. पोसा जेल में बंद अकेला आरोपी था. अन्य दो आरोपी जमानत पर जेल से बाहर हैं.

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2016 में गिरफ्तार हुआ था पोसा 

16 दिसंबर 2016 को पुलिस ने पोसा को बेहमई के जंगलों से गिरफ्तार कर उसे माती जेल भेज दिया था. इसके बाद से वह जेल में ही बंद था. पोसा वृद्ध और बीमार होने के कारण तारीख पर कोर्ट में भी मौजूद नहीं रह पाता था. इससे पहले 20 मार्च की रात को भी उसकी तबीयत जेल में अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 

टीबी का मरीज था पोसा

सोमवार को भी पोसा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. इसके बाद जेल वार्डन देर रात करीब 11 बजे उसे लेकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे. हालांकि, जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. आरोपी पोसा को टीबी की बीमारी थी, जिसका इलाज कानपुर के हैलट अस्पताल में चल रहा था.

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20 ठाकुरों की हुई थी हत्या

14 फरवरी 1981 में कानपुर देहात के बेहमई गांव में दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने गांव के 20 ठाकुरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस हमले में 6 लोग घायल भी हुए थे. घटना के बाद बेहमई गांव के रहने वाले राजाराम ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया था. इसकी सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट में चल रही थी.

इस मामले में अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होनी थी. मामले में 25 लोगों को आरोपी बनाया गया था. बेहमई कांड में आरोपियों में बचे हुए डकैत श्याम बाबू, विश्वनाथ और भीखा जमानत पर जेल से बाहर थे. एक साल पहले डकैत भीखा की भी मौत हो चुकी है. इस केस में कई डकैत पुलिस गिरफ्त से बचे रहे. इस हत्याकांड में शामिल ज्यादातर लोगों की अब मौत हो चुकी है.


 

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