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यूपी के आगरा में आठ साल की बच्ची को आवारा कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद उसकी मां ने एंटी-रेबीज वैक्सीन की बजाय घरेलू इलाज का इस्तेमाल किया. इस वजह से उसकी तबीयत बिगड़ती गई और जब उसे अस्पताल लेकर जाया गया तो डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा सके.
बाह ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के चीफ डॉ. जितेंद्र वर्मा ने न्यूज एंजेंसी पीटीआई को बताया कि बच्ची को आखिरी समय सेंटर लाया गया था, उन्हें इलाज के लिए आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी थी, जिसे उन्होंने नजरअंदाज कर दिया था. जब बच्ची की हालत ज्यादा खराब हो गई तो एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाते समय ही रास्ते में उसकी मौत हो गई.
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मां ने किया था घरेलू इलाज
उन्होंने कहा, "लड़की को करीब 10-15 दिन पहले एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था. उसने घटना के बारे में अपनी मां के अलावा अपने परिवार में किसी को नहीं बताया. उसकी मां ने घरेलू इलाज किया, लेकिन जब लड़की की हालत बिगड़ गई तो वो उसे लेकर आईं शनिवार को सीएचसी आई."
बच्ची के पिता करते हैं मजदूरी
वह बच्ची बाह ब्लॉक के चौसंगी गांव की रहने वाली थी. मृतक बच्ची के पिता धर्मेंद्र सिंह एक मजदूर के रूप में काम करते हैं और मां एक गृहिणी हैं. डॉ. वर्मा ने कहा, "कुत्ते के काटने के बाद पीड़ित को एंटी रेबीज वैक्सीन की पहली खुराक 24 घंटे के अंदर दे देनी चाहिए. उसके बाद तीसरे दिन और उसके बाद सातवें दिन दूसरी खुराक देनी चाहिए. जबकि 28वें दिन आखिरी खुराक देनी चाहिए."
उन्होंने बताया कि कुत्ते के काटने के लक्षण हाइड्रोफोबिया (पानी से डर), गर्दन में दर्द और उल्टी हैं.