
उत्तर प्रदेश के अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. इस सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) ने फैजाबाद से सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है. अजीत के सामने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार चंद्रभान पासवान की चुनौती है. मिल्कीपुर सीट के उपचुनाव में सपा ने पूरी ताकत झोंक दी है और अजीत के पक्ष में चुनाव प्रचार के लिए पूरा मुलायम कुनबा उतर आया है.
मिल्कीपुर उपचुनाव में आज यानी 28 जनवरी को सपा सांसद धर्मेंद्र यादव की रैली होनी है. वहीं, 30 जनवरी को सांसद डिंपल यादव और प्रिया सरोज रोड शो करेंगी. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन 3 फरवरी को सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी रोड शो और जनसभा कर अजीत के लिए वोट मांगेंगे. सवाल है कि एक सीट के उपचुनाव में पूरे मुलायम कुनबे को क्यों उतरना पड़ रहा है? इसे चार पॉइंट में समझा जा सकता है.
1- अयोध्या की जीत तुक्का नहीं, ये साबित करना
पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में अयोध्या जिस फैजाबाद लोकसभा सीट के तहत आता है, उस सीट से सपा के अवधेश प्रसाद जीतकर संसद पहुंचने में सफल रहे थे. अवधेश प्रसाद की जीत को आधार बनाकर विपक्ष बीजेपी को घेरता रहा है. अखिलेश यादव सीट अलॉटमेंट से पहले तक अवधेश प्रसाद को अपने साथ बैठाते रहे. अयोध्या से सपा की जीत को बीजेपी तुक्का बताती रही है.
हाल ही में मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र के पलिया मैदान में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवधेश प्रसाद को 'दुर्भाग्य से बने सांसद' कहकर संबोधित किया था. बीजेपी पूरा जोर लगा रही है कि मिल्कीपुर जीतकर लोकसभा चुनाव में सपा की जीत को तुक्का साबित किया जाए. वहीं, सपा की कोशिश है कि जीत के साथ यह साबित किया जाए कि लोकसभा चुनाव में अयोध्या की जीत तुक्का नहीं थी.
2- अपनी सीट बचाए रखने की कोशिश
मिल्कीपुर उपचुनाव के नतीजों से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ना है, लेकिन फिर भी बीजेपी पूरा जोर लगाए हुए है. सपा की कोशिश है कि 2022 के यूपी चुनाव में जीती इस सीट पर उपचुनाव में भी कब्जा बरकरार रखा जाए. मिल्कीपुर उपचुनाव दोनों ही दलों के बीच मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की लड़ाई बन गया है. शायद यही वजह है कि सीएम योगी ने अपनी चुनावी रैली में कटेहरी से कुंदरकी तक, उपचुनावों में बीजेपी की जीत का जिक्र किया. सपा की कोशिश लोकसभा चुनाव के बाद उपचुनावों में हार का सिलसिला तोड़ने की है.
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3- सीएम योगी की ताबड़तोड़ रैलियां
मिल्कीपुर के उपचुनाव में बीजेपी की ओर से राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ ही प्रदेश संगठन के तमाम नेता प्रचार के मैदान में सक्रिय हैं. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मिल्कीपुर उपचुनाव के ऐलान के बाद एक जनसभा कर चुके हैं और अब दूसरी रैली की तैयारियां अंतिम दौर में हैं. सीएम योगी की 23 जनवरी को हैरिंग्टनगंज के पलिया मैदान में रैली हुई थी और अब 31 जनवरी को सीएम की एक और रैली होनी है.
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योगी सरकार में मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके स्वतंत्रदेव सिंह से लेकर तमाम मंत्रियों और नेताओं ने चुनावी जनसभाएं कर बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान की अपील की. वहीं, अंतिम चरण में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की रैली का भी कार्यक्रम है. सीएम से लेकर मंत्रियों और वरिष्ठ बीजेपी नेताओं की फौज के प्रचार भूमि में आ जाने से भी अखिलेश यादव को अपना कुनबा मैदान में उतारना पड़ रहा है.
4- मिल्कीपुर के नतीजों का दूरगामी संदेश
मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव सांसद निर्वाचित होने के बाद अवधेश प्रसाद के इस्तीफे की वजह से हो रहे हैं और सपा ने उनके ही बेटे को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर अवधेश प्रसाद की साख भी दांव पर है. दूसरा, ये उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है जब प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन चल रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूरी कैबिनेट के साथ प्रयागराज पहुंच संगम में डुबकी लगाई. हिंदुत्व का रंग प्रयाग से लेकर अयोध्या तक चटख है और ऐसे में सपा मिल्कीपुर जीते या हारे, इसका संदेश दूरगामी होगा.