
यूपी के एटा में 55 साल के एक शख्स ने जीते जी खुद की तेरहवीं कर डाली. उसने गांव में भव्य तरीके से मृत्यु भोज का आयोजन कराया. उसके परिवार वालों ने भी इस भोज में शिरकत की. जीते जी तेरहवीं और पिंडदान करने के पीछे की वजह बताते हुए शख्स ने कहा कि परिवार वालों से उसका भरोसा उठ गया है. मरने के बाद वो मेरी तेरहवीं करेंगे या नहीं, इसका पता नहीं. इसलिए जिंदा रहते हुए ही सारी क्रियाएं करा लीं.
बता दें कि शख्स का नाम हाकिम सिंह है. बीते दिन उन्होंने मृत्यु भोज का आयोजन कराया, जिसमें परिजनों समेत गांव वालों को भी आमंत्रित किया गया. इस दौरान ब्राह्मणों को बुलाकर विधि-विधान के साथ हवन-यज्ञ और तेरहवीं संस्कार की सभी रस्में अदा की गईं.
शख्स ने बताई वजह
हाकिम सिंह का कहना है कि मेरी कोई संतान नहीं है. परिवार में भाई-भतीजे हैं. उन्होंने मेरे घर और जमीन पर कब्जा कर लिया है. वे लोग अक्सर मेरे साथ मारपीट करते हैं. ऐसे में भरोसा नहीं हैं कि मृत्यु होने के बाद वे लोग मेरी तेरहवीं आदि करेंगे या नहीं.
इसलिए सोमवार सुबह जब तबीयत बिगड़ी तो मन में आया कि क्यों ना पंडितों और परिचितों को मृत्युभोज कराकर इस काम से मुक्ति पा ली जाए. अतः जीते जी खुद की तेरहवीं का प्लान बनाया, जिसमें करीब 800 लोग भोज करने पहुंचे.
पत्नी ने साथ छोड़ा, परिजनों ने मकान-जमीन कब्जाया
हाकिम सिंह ने बिहार की एक युवती के साथ विवाह किया था. लेकिन कुछ समय साथ रहने के बाद पत्नी उन्हें छोड़कर अपने घर चली गई. हाकिम की कोई संतान न होने के कारण परिजनों ने उनकी जमीन और मकान पर कब्जा कर लिया. उनके व्यवहार से हाकिम काफी परेशान रहते हैं.
हाकिम के मुताबिक, भाई-भतीजे मकान और 5 बीघा खेत के लिए अक्सर उनके साथ मारपीट करते है. उन्होंने कुछ दिनों पहले मारपीट कर हाथ भी तोड़ दिया था.