
44 साल तक जुर्म की दुनिया में आतंक का पर्याय बने रहे अतीक अहमद को पहली बार सजा सुनाई गई है. 2006 के उमेश पाल अपहरण कांड में एमपी एमएलए कोर्ट ने अतीक अहमद, दिनेश पासी और खान शौलत हनीफ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. इसके अलावा तीनों दोषियों से उमेश पाल के परिवार को एक-एक लाख रुपये हर्जाना भरने का भी आदेश दिया गया है. अतीक अहमद इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने वाला है.
सजा सुनने के बाद अतीक अहमद ने कोर्ट से साबरमती जेल भेजने की गुजारिश की थी. अतीक ने कहा था कि मुझे साबरमती जेल भेज दीजिए, मुझे यहां नहीं रहना, पुलिस मुझपर मुकदमे लाद देगी. अतीक की गुजारिश के बाद पुलिस उसे फिर से नैनी जेल ले आई, लेकिन पुलिस के पास अतीक को नैनी जेल में रखने का आदेश नहीं था. नैनी जेल में रखने का आदेश न होने के कारण अब अतीक अहमद को साबरमती जेल भेजा जाएगा.
पुलिस को नहीं मिली उमेश पाल मर्डर केस में कस्टडी
अभी तक यूपी पुलिस को उमेश पाल हत्याकांड में भी अतीक अहमद की पुलिस कस्टडी रिमांड को लेकर कोई आदेश नहीं मिला है. ऐसे में पुलिस उसे नैनी जेल में दाखिल नहीं करा सकती है. अब उसे साबरमती जेल भेजने की तैयारी की जा रही है. 3 जून 2019 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही अतीक अहमद को नैनी जेल से साबरमती जेल भेजा गया था.
अशरफ को भी बरेली जेल भेजा गया
अतीक अहमद को आज ही साबरमती जेल रवाना किया जाएगा. नैनी जेल से अतीक अहमद को अहमदाबाद ले जाने के लिए तैयारियां शुरू की गई. आधे घंटे के अंदर अतीक अहमद को साबरमती जेल के लिए रवाना किया जाएगा. उमेश पाल अपहरण कांड में कोर्ट की तरफ से बने वारंट को साबरमती जेल अधीक्षक को बनाया गया है. इसके साथ ही अतीक के भाई अशरफ को कोर्ट से ही बरेली जेल भेजा गया है.
अतीक समेत तीन लोगों को ठहराया गया दोषी
प्रयागराज के एमपी एमएलए कोर्ट ने 2006 में हुए उमेश पाल के अपहरण कांड को लेकर दर्ज मुकदमा संख्या 270/2007 में फैसला सुनाते हुए अतीक अहमद, दिनेश पासी और खान शौलत हनीफ को आईपीसी की धारा 364ए/34, 120बी, 147, 323/149, 341, 342, 504, 506(2) और 7सीएलए एक्ट के तहत दोषी करार दिया, जिसमें 364ए/34 और120बी के तहत तीनों दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास के साथ 5-5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई.
इसके साथ ही उमेश पाल के परिवार को तीनों दोषियों की ओर से एक-एक लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश हुआ है, जबकि अतीक के भाई अशरफ समेत सात आरोपी बरी कर दिये गए. अतीक ने जुर्म की शुरुआत 1979 में की थी और पहली सजा उसे 44 साल बाद मिली है. यानी अपराध से सजा तक पहुंचने में अतीक अहमद को 44 साल लग गए. अभी उसे उमेश पाल के किडनैपिंग केस में सजा मिली है. अतीक अहमद पर उमेश पाल की हत्या का भी आरोप है.
यूपी पुलिस बोली- 66 माफियाओं की लिस्ट है तैयार
खैर अतीक अहमद जैसे माफिया के खिलाफ अब सजा सुनाए जाने की शुरुआत भी हो चुकी है. हालांकि उमेश पाल के अपहरण के मुकदमे में अतीक अहमद के भाई अशरफ समेत 7 दूसरे आरोपी बरी कर दिये गये हैं, जिसे लेकर राजू पाल और उमेश पाल के परिवारवालों के बीच अब भी भय का माहौल है. दूसरी तरफ यूपी पुलिस का दावा है कि पूरे प्रदेश में 66 माफियाओं की लिस्ट तैयार कर ली गई है औऱ सबके ऊपर कार्रवाई का सिलसिला जारी है.