
माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को रविवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में उसके पैतृक गांव में भारी सुरक्षा के बीच दफनाया गया. अतीक और उसके भाई की शनिवार देर रात प्रयागराज के अस्पताल के बाहर तीन शूटरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग करके हत्या कर दी गई थी. अब इन शूटर्स का गैंगस्टर कनेक्शन सामने आया है. Shootout@Prayagraj में अब तक क्या क्या खुलासे हुए और पुलिस की क्या थ्योरी है...आइए जानते हैं 15 बड़े अपडेट्स...
माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात को पुलिस घेरे में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई. वारदात को तीन युवकों ने अंजाम दिया, जो पत्रकार बनकर पुलिस के काफिले के नजदीक पहुंचे और ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस दौरान करीब 18 राउंड गोलियां चलीं, जिनमें से 8 गोली अतीक अहमद को लगीं. ये बात अतीक के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई है.
अतीक और अशरफ को जब पुलिस कस्टडी में प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल में मेडिकल के लिए ले जाया जा रहा था, इसी दौरान तीन आरोपियों अरुण मौर्या, सनी और लवलेश तिवारी ने उन पर तड़ातड़ गोलियां बरसा दीं. हत्याकांड के बाद तीनों हमलावरों को सरेंडर के बाद गिरफ्तार कर लिया गया.
अतीक हत्याकांड में शामिल सनी हमीरपुर, अरुण उर्फ कालिया कासगंज और लवलेश तिवारी बांदा जिले का रहने वाला है. लवलेश तिवारी बांदा के क्योतरा का रहने वाला है. लवलेश के खिलाफ चार पुलिस केस हैं. वह लड़की को थप्पड़ मारने के आरोप में जेल जा चुका है. सनी सिंह हमीरपुर जिले के कुरारा कस्बे का रहने वाला है. वो कुरारा पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर है, जिसकी हिस्ट्रीशीट नंबर 281A है. उसके खिलाफ करीब 15 केस दर्ज हैं. जबकि अरुण ने जीआरपी थाने में तैनात पुलिसकर्मी की हत्या कर दी थी, जिसके बाद से ही वो फरार है.
तीनों युवक पत्रकार बनकर आए थे और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर अतीक और अशरफ की हत्या कर दी. तीनों ने हमलावरों ने सरेंडर कर दिया. रविवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया और यहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में तीनों भेज दिए गए.
अतीक और अशरफ की हत्या में जिगाना मेड पिस्टल का इस्तेमाल किया गया है. यह पिस्टल तुर्की में बनती है और गैरकानूनी तरीके से बॉर्डर क्रॉस कर इसे यहां लाया जाता है. भारत में इस पिस्टल पर बैन लगा हुआ है. इसकी कीमत करीब 6 से 7 लाख रुपए है.
FIR के मुताबिक, शूटरों ने पूछताछ में बताया कि वे अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या की. इतना ही नहीं आरोपियों ने भी कहा कि वे पुलिस के घेरे के चलते भागने में सफल नहीं हो पाए. पुलिस के मुताबिक, तीनों शूटर रिपोर्टर बनकर आए थे, जब अतीक और उसका भाई अस्पताल से बाहर आया, तो मीडियाकर्मी उसकी बाइट लेना चाहते थे, जब दोनों मीडिया से बात कर रहे थे, तभी शूटरों ने कैमरा फेंककर गन निकाली और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी.
प्रयागराज में पुलिस कस्टडी में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या करने वाला मुख्य आरोपी सनी सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर सुंदर भाटी का गुर्गा बताया जा रहा है. सुंदर भाटी वर्तमान में सोनभद्र जेल में बंद है. आशंका जताई जा रही है कि अतीक और अशरफ की हत्या जिस जिगाना पिस्टल से हुई, वह सुंदर भाटी के नेटवर्क से ही सनी को दी गई थी
पश्चिम उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर सुंदर भाटी पर हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूट, मारपीट के 60 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं. भाटी को बीते साल ही हरेंद्र प्रधान की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. वर्तमान में वह सोनभद्र जेल में बंद है, लेकिन लगभग डेढ साल पहले सुंदर हमीरपुर जेल में बंद था. इसी हमीरपुर जेल में सनी सिंह लूट की वारदात को अंजाम देने के चलते बंद था. इसी जेल में सनी की दबंगई को देखकर गैंगस्टर भाटी उसे अपने करीब लाया और धीरे-धीरे सनी उसका चेला बन गया.
यूपी सरकार ने हत्याकांड की जांच के लिए 3 सदस्यीय न्यायिक कमीशन का गठन किया है. इस कमेटी का गठन हाईकोर्ट के जज अरविंद कुमार त्रिपाठी, रिटायर जज बृजेश कुमार सोनी, पूर्व पुलिस डीजीपी सुभाष कुमार सिंह सदस्य होंगे.
माफिया अतीक और अशरफ की हत्या का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. पुलिस कस्टडी में हत्या की जांच की मांग को लेकर वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है. इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि पुलिस कस्टडी में ऐसे हत्याकांड या फर्जी मुठभेड़ के बहाने हत्या की वारदात कानून के शासन का उल्लंघन है. विकास दुबे से लेकर असद की मुठभेड़ में हत्या या फिर अब अतीक-अशरफ की हत्या इसी श्रेणी में है. ये अराजकता लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है.
अतीक ने 2004 के संसदीय चुनावों में फूलपुर से सपा के टिकट से जीत हासिल की थी. वह 1991, 1993, 1996, 2002 और 2004 में इलाहाबाद (पश्चिम) सीट से 5 बार विधायक भी रहा है. वहीं, अशरफ भी विधायक रह चुका है. अतीक पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज थे.
अतीक और उसके भाई अशरफ पर हाल ही में प्रयागराज में हुए उमेश पाल हत्याकांड की साजिश का आरोप लगा था. इसी केस में पूछताछ के लिए यूपी पुलिस ने अतीक और उसके भाई की कस्टडी मांगी थी. अतीक को साबरमती तो उसके भाई को बरेली जेल से प्रयागराज लाया गया था, जहां उनसे पूछताछ चल रही थी.
उमेश पाल की 24 फरवरी को प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. फायरिंग में उसके साथ दो गनर आरक्षी संदीप निषाद और राघवेंद्र सिंह की मौत हो गई थी. उमेश 2005 में प्रयागराज में हुए राजूपाल हत्याकांड का गवाह था. राजूपाल हत्याकांड में भी अतीक और उसका भाई अशरफ मुख्य आरोपी थे.
उमेश पाल की पत्नी की शिकायत पर अतीक, भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता, बेटे असद, अरमान, गुलाम, गुड्डू मुस्लिम और साबिर समेत 9 लोगों पर मामला दर्ज किया गया था.
उमेश पाल हत्याकांड में शामिल 6 आरोपी मारे जा चुके हैं. जहां अरबाज और विजय चौधरी को पुलिस ने प्रयागराज में एनकाउंटर में मार गिराया था. वहीं, अतीक के बेटे और गुलाम को 13 अप्रैल को झांसी में एनकाउंटर में मार गिराया गया था. इसके बाद शनिवार को अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस मामले में अभी अतीक की पत्नी शाइस्ता, अरमान, गुड्डू मुस्लिम और साबिर फरार हैं.