
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए दिवाली के दौरान राम मंदिर की सजावट के लिए चीनी झालरों, लाइटों और अन्य वस्तुओं का उपयोग नहीं करने का फैसला किया है. अयोध्या इस साल भी भव्य दीपोत्सव के लिए तैयार है. यह रामनगरी में दीपोत्सव के आयोजन का आठवां संस्करण होगा. राम मंदिर में राम लला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद यह पहला दीपोत्सव है.
राम मंदिर परिसर को दीयों, फूलों, लाइटों समेत अन्य वस्तुओं से सजाया जा रहा है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बयान में कहा कि दिवाली के अवसर पर राम मंदिर की सजावट में स्थानीय शिल्प कौशल को बढ़ावा देने का फैसला किया गया है. 'वोकल फॉर लोकल' पहल के साथ तालमेल बिठाते हुए आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) की ओर कदम बढ़ाया गया है. दीपोत्सव कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 10,000 पुलिस कर्मियों की तैनाती होगी. उनमें से लगभग आधे सादे पोशाक में होंगे.
राम मंदिर में चीनी सजावटी वस्तुओं का उपयोग नहीं करने के फैसले के बारे में पूछे जाने पर, अयोध्या के कमिश्नर गौरव दयाल ने कहा, 'मूल रूप से, हम केवल उन वस्तुओं का उपयोग करना चाहते हैं जो स्वदेशी और स्थानीय हैं. इसके पीछे राम मंदिर ट्रस्ट का विचार यह है कि स्थानीय कारीगरों, स्थानीय कलाकारों और स्थानीय सामग्री को बढ़ावा दिया जाए, जो अधिक पर्यावरण-अनुकूल हैं.'
यह पूछे जाने पर कि क्या लोगों से चीनी सामग्री का उपयोग नहीं करने की ऐसी कोई अपील या निर्देश प्रशासन की ओर से है, उन्होंने कहा कि यह लोगों पर निर्भर है. हम किसी को मजबूर नहीं कर सकते. दिवाली से एक दिन पहले (30 अक्टूबर) अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य इस साल एक साथ सबसे अधिक संख्या में दीये जलाकर फिर से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है. राम लीला और अन्य सांस्कृतिक प्रदर्शनों का भी आयोजन होगा.