
समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरे आजम खान और उनके परिवार की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही. आजम और उनके विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम को 15 साल पुराने मामले में अदालत ने दोषी करार दिया है. कोर्ट ने बाप-बेटे दोनों को दो-दो साल की सजा सुनाई है. आजम खान के बाद उनके बेटे अब्दुल्ला की भी विधायकी जानी तय है, क्योंकि दो साल की सजा हो गई है. ऐसे में आजम परिवार के सामने आगे की क्या राह है और अब्दुल्ला के पास अपनी सदस्यता बचाए रखने के लिए क्या विकल्प हैं?
उत्तर प्रदेश की सियासत में आजम खान की तूती बोलती थी. रामपुर की राजनीति के बेताज बादशाह कहे जाते थे. विधायक से लेकर संसद और मंत्री तक का सफर तय किया. इतना ही नहीं आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा संसद से विधायक तक बनी और बेटा अब्दुल्ला भी विधानसभा पहुंचे. 2017 में यूपी के सत्ता परिवर्तन और योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही आजम खान पर संकट गहराने लगे जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा.
हेट स्पीच केस में आजम खान को तीन साल की सजा सुनाई गई, जिससे उनकी विधानसभा की सदस्यता चली गई और अब उनके बेटे अब्दुल्ला को दो साल की सजा हुई है. ऐसे में अब्दुल्ला आजम की विधायकी छिन सकती है. इस तरह से आजम खान परिवार का अब कोई भी सदस्य किसी सदन का सदस्य नहीं रह जाएगा जबकि एक समय उनके परिवार से तीन लोग विधायक-सांसद थे.
अब्दुल्ला को दूसरी बार गंवानी होगी विधायकी
अब्दुल्ला आजम ऐसे विधायक हैं, जिन्हें दूसरी बार अपनी सदस्यता गंवानी पड़ रही है. योगी सरकार के पहले शासनकाल में यानी 17वीं विधानसभा में भी सदस्यता खत्म हो गई थी और अब 18वीं विधानसभा में भी उनकी सदस्यता दो साल सजा की वजह से खत्म हो रही है. अब्दुल्ला की सदस्यता पहली बार 2019 में नामांकन पत्र में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र लगाने के आरोप में हाई कोर्ट के आदेश पर रद्द की गई थी और उनका चुनाव शून्य घोषित कर दिया गया था.
हालांकि, अब्दुल्ला आजम के चुनाव लड़ने पर किसी तरह से प्रतिबंध नहीं लगा था, जिसके चलते वह 2022 के विधानसभा चुनाव में फिर स्वार सीट से विधायक चुने गए. जनवरी 2008 के मामले में आजम खान और उनके विधायक बेटे अब्दुल्ला को कोर्ट ने दो-दो साल की सजा सुनाई है, जिसके वजह से उनकी सदस्यता खत्म हो सकती है. इसकी वजह यह है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-8 के तहत किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक के सजा होने पर संबंधित सदन में उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है और सजा के बाद 6 साल तक चुनाव लड़े पर रोक लग जाती है.
मुरादाबाद एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले की कापी को अगर प्रशासन विधानसभा सचिवालय को भेज देता है तो इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष उसे स्वीकार करते ही अब्दुल्ला आजम की विधायकी खत्म हो जाएगी. अब्दुल्ला आजम को दो साल की सजा हुई है, जिसके बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. इस तरह से अब्दुल्ला आजम अब कुल आठ साल तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.
अब्दुल्ला आजम के सामने क्या विकल्प
अब्दुल्ला आजम को अपनी विधायकी को बचाए रखने के सारे रास्ते बंद नहीं हुए हैं. वो अपनी राहत के लिए सेशन कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं, जहां अगर एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले पर स्टे लग जाता है तो विधायकी बच सकती है. सेशन कोर्ट अगर स्टे नहीं देता है तो फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा. ऐसे में हाई कोर्ट से अगर स्टे मिल जाता है तो भी उनकी सदस्यता बच सकती है. मुरादाबाद कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई है. ऐसे में संभावना है कि अब्दुल्ला को अपनी विधायकी खोनी पड़ेगी. ये आजम परिवार के लिए एक बड़ा सियासी झटका साबित होगा. देखना है कि आजम खान के बेटे अपनी विधायकी को बचाने के लिए क्या ऊपरी अदालत में दस्तक देंगे?