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बहराइच: भेड़ियों के हमले के बीच गांवों में बढ़ी दरवाजों की डिमांड, फर्नीचर शॉप में लगी लाइन

Bahraich Bhediya Attack: एक फर्नीचर दुकानदार ने कहा कि आनन-फानन में गांववाले घरों में दरवाजे लगवा रहे हैं. हर रोज 20 से 25 दरवाजे बिक रहे हैं. अभी भी ऑर्डर आ रहे हैं. दरवाजों की कीमत 2 से 3 हजार के आस-पास है.

बहराइच: भेड़िये के डर से दरवाजों की डिमांड बढ़ी बहराइच: भेड़िये के डर से दरवाजों की डिमांड बढ़ी
समर्थ श्रीवास्तव
  • बहराइच ,
  • 04 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:58 PM IST

यूपी के बहराइच में भेड़ियों के खतरे के चलते अब लकड़ी के दरवाजों की मांग बढ़ गई है. भेड़िया प्रभावित क्षेत्रों में बनी फर्नीचर की दुकानों पर हर दिन के हिसाब से 20 से 25 दरवाजों के आर्डर आ रहे हैं और बिक रहे हैं. इसको लेकर मोहम्मद ख्याल नाम के एक दुकानदार ने बताया कि पहले इस सीजन में एक दरवाजे का ऑर्डर भी नहीं आता था, मगर अब भेड़िये के डर से ऑर्डर की भरमार है. 

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दुकानदार ने कहा कि आनन-फानन में गांववाले अपने-अपने घरों में दरवाजे लगवा रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से हर रोज 20 से 25 दरवाजे बिक रहे हैं. अभी भी ऑर्डर आ रहे हैं. दरवाजों की कीमत 2 से 3 हजार के आस-पास है. लोगों में भेड़ियों का डर ऐसा बैठा है कि वे अब बिना दरवाजे के नहीं रहना चाहते. 

फर्नीचर शॉप

बता दें कि बहराइच के महसी तहसील और उसके आसपास के 30 से अधिक गांवों में भेड़ियों का आतंक है. ये आदमखोर अबतक 10 लोगों का शिकार कर चुके हैं. दर्जनों को घायल कर चुके हैं. वन विभाग समेत पुलिस-प्रशासन की टीम उन्हें पकड़ने में लगी हुई हैं. फिलहाल, चार भेड़िये पकड़े गए, दो अभी पकड़ में नहीं आए हैं. 

पलायन करने को मजबूर हुआ परिवार!

सिकंदरपुर मक्का पुरवा गांव में भी भेड़िये की दहशत है. इस अकेले के गांव में अब तक भेड़िया 4 बार हमला कर चुका है. एक नाबालिग की जान भी ले चुका है. ऐसे में इस गांव से डर के मारे 2 परिवार पंजाब पलायन कर चुके हैं. 

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भेड़िया प्रभावित गांव का घर

दरअसल, रामू कुमार अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहते थे, लेकिन कुछ दिनों से शुरू हुए भेड़िये के हमलों के बाद वह दहशत में थे. कुछ दिन पहले उनके घर पर भी भेड़िये ने हमला किया, जिसमें उनके छोटे लड़के को ले जाने की कोशिश की. किसी तरह गांव वालों की मदद से उन्होंने भेड़िये से अपने परिवार की जान बचाई. लेकिन भेड़िये ने बच्चे को हाथ और पैर में गहरे घाव दे दिए. वह अस्पताल में भर्ती रहा, जब वह सही होकर आया तो रामू ने बहराइच छोड़ने का फैसला किया.

रामू के भाई राम कुमार ने बताया कि वह भेड़िये के हमले से बहुत परेशान हो गया था. उसे अपने बच्चों और परिवार की चिंता सता रही थी. हम लोगों ने रोकने की कोशिश की लेकिन वह अपनी फसल की बटाई कर, घर में ताला लगाकर, परिवार को लेकर चला गया. 

गौरतलब है कि बहराइच के जिस इलाके में भेड़ियों का आतंक है, वह इलाका काफी पिछड़ा हुआ है. बिजली आदि की उचित व्यवस्था नहीं है. लोग अभी भी कच्चे-पक्के घरों में रह रहे हैं. जिनमें कई में तो दरवाजे तक नहीं हैं. हालांकि, अब सब दरवाजे लगवा रहे हैं. 

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