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बहराइच में 29 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, हिंसा वाले इलाके के थानों में तैनात सिपाहियों पर एक्शन

Bahraich Violence: बहराइच एसपी ने 29 पुलिसकर्मियों को सक्रिय ड्यूटी से हटा दिया है. इन पुलिसकर्मियों को थाना-चौकी से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है.

बहराइच जिले के हरदी थानाक्षेत्र स्थित महराजगंज गांव में सांप्रदायिक हिंसा के बाद तैनात पुलिस बल. (PTI Photo) बहराइच जिले के हरदी थानाक्षेत्र स्थित महराजगंज गांव में सांप्रदायिक हिंसा के बाद तैनात पुलिस बल. (PTI Photo)
aajtak.in
  • बहराइच,
  • 29 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में हुई हिंसा के बाद एक्शन जारी है. बीते दिन एसपी ने 29 पुलिसकर्मियों को सक्रिय ड्यूटी से हटा दिया. इन पुलिसकर्मियों को थाना-चौकी से हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया है. जिनपर ये कार्रवाई हुई है वे हरदी और रामगांव पुलिस स्टेशन में तैनात रहे हैं. इनके स्थान पर दूसरे पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है.

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस घटनाक्रम को लेकर बहराइच की एसपी (पुलिस अधीक्षक) वृंदा शुक्ला ने रूटीन बताया है. लेकिन जिन पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन भेजा गया है उनमें अधिकांश उस एरिया के हैं जहां पर मूर्ति विसर्जन के दौरान हिंसा फैली थी. ऐसे में एसपी की इस कार्रवाई को बवाल-उपद्रव के वक्त ढिलाई बरतने वाले पुलिसवालों पर एक्शन के तौर पर देखा जा रहा है. 

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हालांकि, बहराइच पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, हरदी पुलिस स्टेशन से 14 और रामगांव पुलिस स्टेशन से 15 कर्मियों को पुलिस लाइन में स्थानांतरित कर दिया गया है. ये नियमित तबादले हैं. सिपाहियों का एक थाने में दो साल का कार्यकाल होता है. वह अवधि समाप्त हो गई, इसलिए उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया गया है.

मालूम हो कि हिंसा में मारे गए रामगोपाल मिश्रा का पैतृक गांव रेहुआ मंसूर रामगांव थाना क्षेत्र में आता है, जबकि जहां उनकी हत्या हुई वह इलाका हरदी पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में है. सोमावर (2 अक्टूबर) को इसी थाने में तैनात सिपाहियों को पुलिस लाइन भेजा गया है. 

दरअसल, जिले की महसी तहसील के महराजगंज क्षेत्र में 13 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे बजाने को लेकर हुए विवाद के बाद रामगोपाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद सांप्रदायिक हिंसा हुई, जिसके बाद आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं. मामले में लोकल पुलिस की लापरवाही उजागर हुई थी. आरोप लगे कि उन्होंने हालात को सही से नहीं संभाला. 

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