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बलिया वसूली कांड: थानाध्यक्ष पन्ने लाल की थी ऊंची पहुंच, सिर्फ मलाईदार थानों में लगवाता था अपनी ड्यूटी, अब फरार

बलिया में यूपी-बिहार चेकपोस्ट पर वसूली के मामले में नरही थानाध्यक्ष पन्ने लाल को सस्पेंड कर दिया गया है जिसके बाद अब वो फरार है. उसके साथ ही पांच अन्य आरोपी पुलिसकर्मी भी गायब हैं. अब पन्ने लाल को लेकर कई खुलासे हो रहे हैं. उसके पुलिस महकमे में ऊंची पहुंची थी जिस वजह से उसकी ड्यूटी हमेशा मलाईदार थानों में लगती थी जहां काली कमाई ज्यादा हो सके. चेक पोस्ट पर उसी के खास पुलिसकर्मी ट्रकों से पैसा वसूलते थे.

नरही थानाध्यक्ष सस्पेंड होने के बाद फरार नरही थानाध्यक्ष सस्पेंड होने के बाद फरार
आशीष श्रीवास्तव
  • बलिया,
  • 27 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 1:39 PM IST

उत्तर प्रदेश के बलिया में यूपी-बिहार बॉर्डर पर वसूली को लेकर जिस तरीक से कार्रवाई हुई है उसके बाद नरही थाने के निलंबित थानाध्यक्ष पन्ने लाल, चौकी प्रभारी राजेश कुमार प्रभाकर समेत पांच पुलिसकर्मी फरार हैं. पुलिस अभी उनके लोकेशन का पता नहीं लगा पाई है. इस मामले की जांच की जिम्मेदारी आजमगढ़ के एएसपी सुभम अग्रवाल को दी गई है जिसके बाद उन्होंने बलिया पहुंच कर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है.

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बलिया में हुई कार्रवाई के बाद थानाध्यक्ष सहित पांच पुलिसकर्मी फरार हैं. ऐसे माना जा रहा है कि सस्पेंड थानाध्यक्ष अगर हाजिर नहीं होगा तो उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी. उसके कमरे को सील कर दिया गया है जिसमें कई अहम सबूत हो सकते हैं. इसमें एक लाल डायरी का भी जिक्र है जिसमें वसूली के इस खेल का पूरा हिसाब-किताब है. 

जानकारी के मुताबिक़ बलिया में ट्रकों से पैसों की वसूली के इस मामले को लेकर DIG के पीआरओ सुशील कुमार की तहरीर पर थानाध्यक्ष पन्ने लाल, चौकी प्रभारी राजेश कुमार, प्रभाकर, सतीश गुप्ता, हरि दयाल, बलराम सिंह, दीपक मिश्रा, विष्णु यादव पर केस दर्ज किया गया है.

पांच पुलिसकर्मी फरार

इनमें से सतीश गुप्ता और हरि दयाल को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि अन्य पुलिसकर्मी अभी फ़रार हैं. भागे हुए पुलिसकर्मियों ने अपना फोन भी स्विच ऑफ कर लिया है जिस वजह से सर्विलांस से भी उनकी जानकारी नहीं मिल रही है.

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थानाध्यक्ष पन्नेलाल गोरखपुर के रहने वाले हैं और गृह जिले में तैनाती के दौरान उनकी वसूली के किस्से मशहूर थे. माना जा रहा है कि उसकी पुलिस महकमे में ऊपर तक पहुंच है इसलिए उसे मलाईदार थाना दिया जाता था. वो हमेशा ऐसे थानों में तैनात रहा जहां ज्यादा आमदनी होती थी. उसे मनमाफिक थाने मिलते रहे हैं.

पन्ने लाल के खास पुलिसकर्मियों की लगती थी चेक पोस्ट पर ड्यूटी

जानकारी के मुताबिक भारौली पुलिस चेकपोस्ट पर सबकी ड्यूटी नहीं लगायी जाती थी. जो थानाध्यक्ष पन्नेलाल का ख़ास होता था उसकी ड्यूटी ही वहां लगायी जाती थी. यही सिपाही और सब इंस्पेक्टर तैनात रहते थे.  

इसके साथ ही कुछ चुनिंदा स्थानीय लोगों को भी इस काम में लगाया जाता था जो पुलिस के संरक्षण में ट्रक को रोकते थे और उनसे पैसों की वसूली करते थे. यहां तक कि इस पोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मी थाने न जाकर सीधा अपने घर चले जाते थे और थाने से उनको कोई मतलब नहीं रहता था.

वाराणसी जोन के एडीजी पीयूष मोर्डिया के मुताबिक़, बिहार-यूपी सीमा पर बने चेकपोस्ट पर DIG की छापेमारी में पकड़े गए पुलिस कर्मियों को जेल भेजा गया है. बाकी कमरे को सील कर दिया गया है और आगे की जांच की चा रही है.

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थाने में की गई नए पुलिसकर्मियों की तैनाती

वहीं भारौली में अब नई तैनाती कर दी गई है. अभी कुछ पुलिसकर्मियों ने ज्वाइन किया है तो कुछ लोग ज्वाइन करने वाले हैं. अब थाने में लगातार नए पुलिसकर्मी आ रहे हैं. इस दौरान रोज़ाना की तरह फ़रियादी भी थाने में नहीं पहुंच रहे हैं और पुलिस मेस में भी ताला लटका रहा है.

वहीं जिस चेक पोस्ट पर वसूली की जाती थी अब वहां अलग-अलग सामानों से लदे ट्रक बिना किसी रोक टोक के निकलते रहे. इस दौरान वहां पर मौजूद दो पुलिसकर्मी अपने मोबाइल में व्यस्त रहे. वो न ही किसी को रोक रहे थे और न ही कुछ पूछताछ कर रहे थे. डीजीपी प्रशांत कुमार के मुताबिक़ हर पहलू पर जांच की जा रही है और फरार पुलिसकर्मियों की तलाश की जा रही है. जल्द चार्जशीट में नामों के साथ बड़ी कार्रवाई होगी.

हर दिन ट्रकों से पांच लाख की वसूली

बता दें कि पुलिस के इस वसूली रैकेट को लेकर डीआईज वैभव कृष्ण और वाराणसी रेंज के एडीजी ने ट्रक में खलासी बनकर वसूली गैंग का भंडाफोड़ किया था और इस मामले में नरही थाने के पुलिसकर्मियों की संलिप्तता पाई गई थी. इसके बाद दो पुलिसकर्मियों सहित 16 दलालों को गिरफ्तार किया गया था. पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि वो निजी दलालों की मदद से वहां से गुजरने वाले हर ट्रक से 500 रुपये की वसूली करते थे. यूपी-बिहार के इस बार्डर से हर रात 1000 ट्रक गुजरते थे जिससे एक दिन में पांच लाख की उगाही हो रही थी. इस तरह हर महीने पुलिस वाले डेढ़ करोड़ की काली कमाई करते थे.

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