
उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया रहे अतीक अहमद का बस्ती से भी काफी गहरा ताल्लुक रहा है. अतीक अहमद ने बस्ती की जेल में पूरे 21 महीने तक वक्त बिताया था. यहां रहने के दौरान अतीक ने अपने नेटवर्क को काफी मजबूत किया. बता दें कि बीते शनिवार की रात प्रयागराज में जब अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को मेडिकल चेकअप के लिए के जाया जा रहा था, उसी दौरान पत्रकार बनकर आए शूटर्स ने दोनों की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
जेल प्रशासन के मुताबिक, माफिया अतीक अहमद को प्रयागराज (तब के इलाहाबाद) की नैनी सेंट्रल जेल से बस्ती जेल में 30 अप्रैल 2010 को लाया गया था. उसके बाद अतीक यहां 6 फरवरी 2012 तक हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद रहा. बस्ती जिला जेल में रहते हुए अतीक अहमद ने अपनी पूरी गैंग तैयार कर रखी थी. उसका नेटवर्क इतना टाइट था कि वो जेल में जो चाहता, वो करता था. बाकायदा यहां अतीक जेल में दरबार भी लगाया करता था. उस समय का पूरा जेल प्रशासन अतीक के आगे नतमस्तक था.
बस्ती जेल में बंद रहने के दौरान अतीक ने लड़ा था चुनाव
बता दें कि अतीक अहमद ने बस्ती जिला जेल में रहते हुए ही साल 2012 में अपना दल पार्टी से विधानसभा चुनाव में इलाहाबाद पश्चिम से नामांकन दाखिल किया था और चुनाव लड़ा था. उस दौरान मतदान होने से कुछ दिन पहले ही अतीक को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी. हालांकि उस चुनाव में अतीक को राजू पाल की पत्नी पूजा पाल से हार का सामना करना पड़ा था.
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वरिष्ठ पत्रकार पारस नाथ मौर्य का कहना है कि बस्ती जिला जेल में रहते हुए अतीक ने अपना नेटवर्क और मजबूत किया था. यहां पर उसके मिलने वालों का तांता लगा रहता था. चाहे वो सफेदपोश हों, व्यापारी हों या अधिकारी. सब के सब अतीक के दरबार में हाजिरी लगाते थे. अन्य प्रदेश से भी लोग अतीक अहमद से मिलने बस्ती जिला जेल आया करते थे. इस मामले को लेकर बस्ती के एडीएम और जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक कमलेश चन्द्र ने कहा कि अतीक यहां पर लगभग 21 महीने के करीब बंद रहा था.
शनिवार की रात कर दी गई अतीक और अशरफ की हत्या
बता दें कि प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की शनिवार रात तीन आरोपियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. तीनों हमलावर पत्रकार बनकर पहुंचे थे, और उस समय गोली मारी जब पुलिस अतीक और अशरफ को मेडिकल के लिए लेकर जा रही थी. घटना के बाद पुलिस ने तीनों हमलावरों को पकड़ लिया था.
कौन हैं अतीक और अशरफ को गोली मारने वाले शूटर?
अतीक पर हमला करने वाले तीनों शूटर यूपी के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं. अतीक और अशरफ को गोली मारने वाला शूटर लवलेश तिवारी बांदा का रहने वाला है, जबकि अरुण मौर्य कासगंज का निवासी है. वहीं तीसरा आरोपी सनी हमीरपुर का रहने वाला है. तीनों आरोपी अतीक और अशरफ की हत्या के मकसद से ही प्रयागराज पहुंचे थे.
बिखर चुका है माफिया का कुनबा
पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद का कुनबा बिखर चुका है. अतीक और उसका भाई अशरफ और बेटा असद अब दुनिया में नहीं हैं. बेटे को एनकाउंटर में STF ने मार गिराया, जबकि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की पुलिस की मौजूदगी में हत्या कर दी गई. पिछले एक हफ्ते में ही माफिया अतीक समेत परिवार के तीन लोग मारे जा चुके हैं. बाकी लोग या तो जेल में हैं, या फिर फरार हैं.
एक समय प्रयागराज में बोलती थी, तूती आज घर में सन्नाटा!
अतीक अहमद और उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन के पांच बेटे हैं. बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में बंद है. दूसरा बेटा अली प्रयागराज की नैनी जेल में है. तीसरा बेटा असद 13 अप्रैल को मुठभेड़ में एसटीएफ के हाथों मारा गया. अतीक के बाकी दो बेटे अभी नाबालिग हैं, जो बालसुधार गृह में हैं. कहा जाता है कि एक समय प्रयागराज में अतीक अहमद की तूती बोलती थी, और आज उसके घर में सन्नाटा पसरा है.
जिस संपत्ति और शोहरत के लिए अतीक ने अपराध का रास्ता चुना, उसे आज कोई देखने वाला नहीं है. हालांकि अतीक अहमद ने पिछले तीन दशक में खूब संपत्तियां बनाईं, जो बेनामी क्यों न हो? अब उसकी ये अथाह संपत्ति किसे मिलेगी, ये एक बड़ा सवाल है.
अतीक अहमद के पास घोषित कितनी संपत्ति थी?
अतीक अहमद ने साल 2019 में वाराणसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था. उसने अपने चुनावी हलफनामे में कुल संपत्ति 25 करोड़ रुपये बताई थी. हलफनामे से खुलासा हुआ था कि अतीक अहमद के एक दर्जन से अधिक बैंक खाते थे. कागजी संपत्ति को छोड़ दें तो अतीक अहमद ने अवैध तरीके से अकूत संपत्ति बनाई थी. हालांकि पिछले 2 साल में अतीक अहमद की अधिकतर अवैध संपत्ति या तो कुर्क की जा चुकी है, या उस पर बुलडोजर चला दिया गया है.
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पिछले हफ्ते प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अतीक अहमद की करीब 1169 करोड़ रुपये की संपत्ति पर या तो बुलडोजर चल गया है, या फिर उसे जब्त कर लिया गया है. इसमें से 417 करोड़ की संपत्ति को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है, और करीब 752 करोड़ की संपत्ति पर बुलडोजर चलाया गया है.
24 फरवरी को प्रयागराज में कर दी गई थी उमेश पाल की हत्या
प्रयागराज में 24 फरवरी को उमेश पाल और उनके दो सुरक्षाकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उमेश पाल प्रयागराज में हुए राजू पाल हत्याकांड में मुख्य गवाह थे. उमेश जैसे ही अपनी गाड़ी से उतरे, वैसे ही बदमाशों ने उन पर फायरिंग कर दी गई थी. इस दौरान उनकी और उनके एक गनर की गोली लगने से मौत हो गई. जबकि दूसरे गनर की इलाज की दौरान मौत हो गई थी. बदमाशों ने इस हत्याकांड को 44 सेकेंड में अंजाम दिया था. इस हत्याकांड में अतीक पर साजिश रचने का आरोप लगा था.
(रिपोर्टः मिस्बा उस्मानी)