
waqf property in up : वक्फ संशोधन बिल आज लोकसभा में पेश हो रहा है. बहस के बाद बिल पर वोटिंग कराई जाएगी. विपक्ष इस विधेयक के खिलाफ लामबंद है. सुबह 9:30 बजे कांग्रेस संसदीय दल की बैठक हुई, जिसमें विधेयक के विरोध की रणनीति पर चर्चा की गई. वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी सभी सेक्युलर दलों से बिल का पुरजोर विरोध करने की अपील की है. वहीं यूपी में योगी सरकार ने वक्फ संपत्तियों को लेकर सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक ज्यादातर जिलों ने यह रिपोर्ट नहीं भेजी है. इस लापरवाही को देखते हुए शासन ने सख्त रुख अपनाया है और अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
57792 सरकारी संपत्तियां वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज
प्रदेश में कुल 57792 सरकारी संपत्तियां वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जिनमें से कई संपत्तियां नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से वक्फ संपत्तियों के रूप में दर्ज की गई हैं. यह खुलासा होने के बाद सरकार ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. शाहजहांपुर, रामपुर, अयोध्या, जौनपुर और बरेली जैसे जिलों में वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जों की कई शिकायतें सामने आई हैं. सरकार इन मामलों की गहन जांच कर रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
लापरवाह अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
वक्फ संपत्तियों की रिपोर्ट न भेजने वाले जिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी शासन सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार, इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.
कई जिलों ने नहीं भेजी वक्फ संपत्तियों की रिपोर्ट
शासन द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के तहत वक्फ के नाम दर्ज सरकारी संपत्तियों का पूरा ब्यौरा सभी जिलों से मांगा गया था. हालांकि, कई जिलों ने अब तक यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है. इसके चलते शासन ने अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं.
बिल पर क्या विवाद?
केंद्र सरकार का कहना है कि वक्फ संशोधन विधेयक का उद्देश्य देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन में सुधार करना है. वक्फ अधिनियम 1995 मुसलमानों द्वारा दान की गई संपत्तियों के प्रबंधन को नियंत्रित करता है. वक्फ विधेयक पर विपक्ष की ओर से आवाज उठा रहे AIMIM के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना है. मुस्लिम संगठनों का दावा है कि नए संशोधन के पारित हो जाने के बाद कलेक्टर राज अस्तित्व में आ जाएगा और वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी नहीं होगा कि कौन सी संपत्ति वक्फ है और कौन सी नहीं. ओनरशिप के संबंध में कलेक्टर का फैसला आखिरी होगा.
कब संशोधन बिल आया?
वक्फ विधेयक में संशोधन के लिए पिछले साल अगस्त में संसद में बिल पेश किया गया. हालांकि, विपक्ष और विभिन्न मुस्लिम संगठनों के विरोध के बीच विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया था. कई सप्ताह तक चर्चा चली और तीखी बहस भी हुई. जेपीसी ने विधेयक में 14 संशोधनों को मंजूरी दी. विपक्षी सांसदों द्वारा प्रस्तावित 44 संशोधनों को जगदंबिका पाल के नेतृत्व वाली कमेटी ने खारिज कर दिया था. इस विधेयक को अंततः फरवरी में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दे दी गई.
बिल पर विपक्ष का क्या स्टैंड?
विपक्षी दल वक्फ संशोधन विधेयक पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और इसे असंवैधानिक और मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बीजेपी के सहयोगी दलों से इस बिल के खिलाफ वोट करने की अपील की है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ सभी विपक्षी दल एकजुट हैं. विधेयक के पीछे सरकार का एजेंडा विभाजनकारी है और इसे हराने के लिए वे संसद में मिलकर काम करेंगे.