
नोएडा पुलिस ने विदेशी नागरिकों के एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो सोशल मीडिया पर दोस्ती कर महिलाओं से ठगी करता था. पुलिस ने बताया कि दिल्ली में 7 विदेशी नागरिक ने अपने कुछ स्थानीय साथियों की मदद से देश की 600 से 700 महिलाओं से दोस्ती कर उनसे लाखों रुपये की ठगी कर ली.
एडिशनल डीसीपी (नोएडा) शक्ति अवस्थी ने बताया कि साइबर ठगों का यह गिरोह इंस्टाग्राम और फेसबुक पर खुद को मर्चेंट नेवी अफसर बताकर महिलाओं से दोस्ती करता फिर उनसे ठगी करता था. उन्होंने बताया, 'ये लोग एक महिला से करीब 60 हजार रुपये की ठगी करते थे. उन्होंने बताया कि पुलिस ने जिस महिला की शिकायत पर कार्रवाई शुरू की, उससे इन लोगों ने 2.50 लाख रुपये ठग लिए थे.' शिकायत के बाद सेक्टर-20 की पुलिस और लोकल आईटी सेल की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई कर दी.
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एडीसीपी ने बताया कि अरेस्ट किए गए विदेशी नागरिकों में घाना, नाइजीरिया और आइवरी कोस्ट जैसे अफ्रीकी देशों के छह पुरुष और एक महिला के अलावा उनकी सिक्किम की रहने वाली महिला सहयोगी भी शामिल है. पुलिस ने आरोपियों की पहचान नाइजीरिया के नागरिक कैल्विन ओकाफोर गुइस, उचेना एग्बु, एक्सा सागिर, ओयोमा लीसा डोमेनिक; घाना के डैनियल जॉन, जोनास डेक्का और आइवरी कोस्ट के हिबिब फोफाना के रूप में की है. इसके अलावा इनकी भारतीय सहयोगी की पहचान गंगटोक निवासी राधिका के रूप में हुई है.
उन्होंने बताया कि पुलिस को छानबीन में पता चला है कि इन विदेशी नागरिकों में कुछ लोग भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं. इसके अलावा इनके पास से 31 मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं. फिलहाल पुलिस ने सभी के खिलाफ मामला दर्ज आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.
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एडीसीपी ने बताया कि ठग पहले महिला को टार्गेट कर उससे मर्चेंट नेवी का अफसर बनकर दोस्ती करते थे. फिर किसी दिन कॉल कर उससे कहते थे कि उन्होंने उसके लिए जूलरी, जूते और अंगूठी जैसे कुछ महंगे गिफ्ट भेजे हैं, लेकिन कस्टम विभाग ने उसे जब्त कर लिया है.
इसके बाद एक महिला (राधिका) टार्गेट को फोन करती है, जो खुद को कस्टम विभाग का प्रतिनिधि बताती है. वह कहती है कि विदेश से आए गिफ्ट को छोड़ने के लिए उसे कुछ फीस जमा करनी होगी और महिला के पेमेंट करती ही सभी ठग पूरी तरह से संपर्क खत्म कर लेते हैं.
नोएडा-1 के एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि ये सभी ठग दिल्ली में रह रहे थे. सभी सोशल मीडिया पर फेक प्रोफाइल बनाकर लोगों को अपना शिकार बनाते थे. उन्होंने गुड लुकिंग मर्चेट नेवी ऑफिसर के फोटो इंटरनेट से डाउनलोड कर ये प्रोफाइल बनाई थीं.
10 जनवरी 2020 को गृह मंत्री अमित शाह ने एक पोर्टल लॉन्च किया था. इसपर जाकर साइबर क्राइम की शिकायत की जा सकती है. गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च में बताया था कि इस पोर्टल पर अब तक 20 लाख से ज्यादा शिकायतें आ चुकी हैं, जिनके आधार पर 40 हजार एफआईआर दर्ज की गईं हैं. उन्होंने बताया कि पोर्टल के अलावा एक हेल्पलाइन नंबर '1930' भी जारी किया गया है, जो देशभर में 250 से ज्यादा बैंकों से कनेक्ट है. साइबर धोखाधड़ी होने पर इस पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. उन्होंने बताया कि साइबर फ्रॉड की जल्दी रिपोर्टिंग होने के कारण साइबर अपराधियों से 235 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है. ये रकम 1.33 लाख से ज्यादा लोगों से धोखाधड़ी कर जुटाई गई थी.
अब तक झारखंड के जामताड़ा को ही साइबर क्राइम का गढ़ माना जाता था. लेकिन अब सरकार ने जो बताया है कि देश के 9 राज्यों में तीन दर्जन से ज्यादा गांव और शहर ऐसे हैं जो साइबर क्राइम का गढ़ बन गए हैं. सरकार के मुताबिक हरियाणा, दिल्ली, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश, गुजरात और आंध्र प्रदेश में साइबर क्राइम के हॉटस्पॉट हैं.
1. हरियाणाः मेवात, भिवानी, नूह, पलवल, मनोटा, हसनपुर, हथन गांव.
2. दिल्लीः अशोक नगर, उत्तम नगर, शकरपुर, हरकेश नगर, ओखला, आजादपुर.
3. बिहारः बांका, बेगूसराय, जमुई, नवादा, नालंदा, गया.
4. असमः बारपेटा, धुबरी, गोलपाड़ा, मोरिगांव, नागांव.
5. झारखंडः जामताड़ा, देवघर.
6. पश्चिम बंगालः आसनसोल, दुर्गापुर.
7. गुजरातः अहमदाबाद, सूरत.
8. उत्तर प्रदेशः आजमगढ़.
9. आंध्र प्रदेशः चित्तूर.