
यूपी के देवरिया में सरयू नदी खतरे के निशान से लगभग 90 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. बरहज तहसील के मईल क्षेत्र में स्थित महृषि देवरहा बाबा के आश्रम में बाढ़ का पानी घुस गया है. आश्रम चारों तरफ से पानी से घिर गया है और आने-जाने के लिए सिर्फ नाव का सहारा है. जहां तक नजर दौड़ाएंगे वहां तक सिर्फ पानी ही दिखेगा. इस आश्रम में पहुंचने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर नाव की यात्रा करनी पड़ रही है, जिसके चलते श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतें हो रही हैं.
आवागमन के लिए एक छोटी नाव लगाई गई है, जो बेहद असुरक्षित है. इसमें ना लाइफ जैकेट की व्यवस्था है और ना रेस्क्यू के लिए कोई साधन. इसको लेकर देवरहा बाबा आश्रम के महंत ने कहा कि एक टूटी नौका लगाई गई है, इससे आने वालों की जान को खतरा है. आश्रम में देश और विदेश से लोग आते हैं. आश्रम में गोशाला भी है, जानवरों के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है.
जब 'आजतक' की टीम ने इस बाबत प्रशासनिक अधिकारियों से बात की तो नरियांव गांव में राजस्व निरीक्षक को भेजा गया. पूछने पर उन्होंने बताया कि लाइफ जैकेट की व्यवस्था कराई जा रही है, दो नावों की व्यवस्था भी कराई जा रही है.
देवरहा बाबा आश्रम जाने वाला मार्ग बाधित
गौरतलब है कि जिले की बरहज तहसील के लगभग दो दर्जन गांव में बाढ़ का संकट उतपन्न हो गया है. नदी किनारे इलाकों में पानी घुस गया है. फसलें डूब गई हैं. मईल के नरियांव से देवरहा बाबा आश्रम जाने वाले मार्ग चारों तरफ से बंद हो गए हैं. हर तरफ केवल पानी ही पानी दिख रहा है. फिलहाल, प्रशासन की व्यवस्था लचर नजर आ रही है. इसकी वजह से यहां के लोगों व आश्रम के महंत में काफी आक्रोश है.
आश्रम के महंत ने कही ये बात
देवरहा बाबा आश्रम के महंत श्याम सुंदर दास ने कहा कि यहां जो गौ माता को दिक्कतें हैं वो तो हैं ही, उसके अलावा श्रद्धालुओं को काफी समस्या हो रही है. प्रशासन के द्वारा जो नौका की व्यवस्था की गई है वह सुव्यवस्थित नहीं है. टूटी नौका लगाई गई है, जिससे आने-जाने वालों को जान का खतरा बना रहता है. यहां पर स्टीमर लगाई जानी चाहिए. व्यवस्था और अच्छी होनी चाहिए. मगर प्रशासन ढिलाई बरत रहा है. ऐसे महापुरुष की धरती पर जहां देश-विदेश से लोग आते हैं उसपर ध्यान नहीं दिया जा रहा.
वहीं, रामू यादव नाम के एक स्थानीय ने कहा कि सरयू का जलस्तर काफी बढ़ गया है. देवरहा बाबा आश्रम जाने वाले मार्ग पर 4 से 5 फीट तक पानी बह रहा है. सड़क नहर में बदल गई है. प्रशासन द्वारा जन्माष्टमी को देखते हुए दो नाव लगाई गई थी, जो नाकाफ़ी है. उसमें खतरा है. किसानों की फसल भी डूब गई है, उचित मुआवजा मिलना चाहिए. नाव से लोग पशुओं का चारा लेने दूर-दराज के इलाके जा रहे हैं. करीब दो दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित हैं.
ये गांव वर्षों से बाढ़ का दंश झेल रहा
बता दें कि देवरिया जिले के बरहज तहसील में एक गांव ऐसा भी है जो वर्षों से बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर है. जब राप्ती नदी में बाढ़ आती है तो यह गांव चारों तरफ से पानी से लगभग तीन महीने घिरा रहता है. महज नाव ही आने-जाने का सहारा रह जाता है. इस समय भी ऐसी ही स्थिति है. ग्रामीण परेशान हैं, पशुओं के चारे का संकट उतपन्न हो गया है. फसल भी डूब गई है. सबसे अधिक दिक्कत बुजुर्ग व बीमार लोगों को है. यदि इमरजेंसी में अस्प्ताल जाना हो तो नाव से ही जाना पड़ेगा.
यहां कोई पक्का रास्ता या सड़क स्थायी तौर पर नहीं है, जब पानी सूख जाता है तो वही उबड़-खाबड़ कच्चे रास्ते से लोग निकलते हैं. इसका ना तो सांसद संज्ञान लेते हैं और ना ही विधायक. अधिकारियों का रवैया भी ढीला है. ग्रामीणों की मांग है कि लगभग डेढ़ किलोमीटर की यदि पुलिया का निर्माण हो जाये तो यह गांव बाढ़ की विभीषिका से हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगा.
डीएम ने किया गांव का दौरा
बीते मंगलवार को डीएम दिव्या मित्तल पूरे प्रशासनिक अमले के साथ बोट/स्टीमर के जरिये इस गांव में पहुंची और किनारे उतरकर गांव का दौरा किया. साथ ही एक चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्या सुनी. यहां लोगों ने सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रास्ता व पुलिया का उठाया. उन्होंने पुलिया का निर्माण कराने की मांग की. इस पर डीएम ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने की बात कही.
डीएम दिव्या मित्तल ने 'आजतक' से बातचीत के दौरान बताया कि यहां सड़क नहीं है. नाव ही सहारा है और बाकी समय के लिए भी सही सड़क नहीं है. ऐसे में शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा. फिलहाल, यहां पर राहत सामग्री, दवाइयां आदि वितरित कराई गई है.