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गाजियाबाद: गठिया बाय की दवा के नाम पर बेच रहे थे स्टेरॉयड, 8 लाख के कैप्सूल जब्त

गाजियाबाद के मोदीनगर में औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली गठिया बाय की दवाइयों के नाम पर स्टेरॉयड और दर्द निवारक दवाइयां बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया. 8 लाख कैप्सूल और भारी मात्रा में पैकिंग सामग्री जब्त की गई. नकली दवाइयों के सेवन से मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था.

नकली दवा के नाम पर स्टेरॉयड बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ नकली दवा के नाम पर स्टेरॉयड बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़
मयंक गौड़
  • गाजियाबाद ,
  • 11 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:26 PM IST

गाजियाबाद के मोदीनगर में औषधि विभाग ने गठिया बाय की नकली दवाइयां बनाने और बेचने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में करीब 8 लाख कैप्सूल और भारी मात्रा में दवाइयों की पैकिंग सामग्री जब्त की गईं.

औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा के अनुसार, मोदीनगर के मानवता पुरी इलाके में एक गोदाम में नकली दवाइयां तैयार की जा रही थीं. इन कैप्सूल में स्टेरॉयड (डेक्समैथाजॉन) और दर्द निवारक दवाइयों (फेनिलबिटाज़िन और पाईरॉक्सीकेम) का मिश्रण भरा जा रहा था.  इन दवाइयों को गठिया बाय की दवा के नाम पर ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किया जाता था.

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ऐसे हुआ नकली दवाओं का पर्दाफाश

औषधि विभाग को लंबे समय से यह सूचना मिल रही थी कि नकली गठिया बाय की दवाइयों की सप्लाई की जा रही है. इसके बाद विभाग ने मोदीनगर के गोदाम पर छापा मारा, जहां नकली दवाइयों की पैकिंग करते हुए टीम ने रंगे हाथ आरोपियों को पकड़ा.

डेक्समैथाजॉन जैसे स्टेरॉयड का इस्तेमाल मरीजों को फौरी राहत देने के लिए किया जाता था, लेकिन इसके गंभीर दुष्प्रभाव किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचा सकते थे. बता दें, तीनों दवाइयां के 10-10 कैप्सूल की पैकिंग बनाकर गठिया बाई की दवाई के नाम पर देशभर में सप्लाई किया जा रहा था. इनमें से डेक्समैथाजॉन एक स्टेरॉयड की श्रेणी में आता है जिससे लिवर किडनी के साथ जान का खतरा भी हो सकता है.

गोदाम के संचालक मुकेश भाटिया के खिलाफ मोदीनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है. फिलहाल गोदाम को सील कर दिया गया है और विभाग आगे की जांच में जुटा है.

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पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की

ड्रग निरीक्षक आशुतोष मिश्रा ने बताया कि आरोपित भारी मात्रा में अलग-अलग दवाओं को खरीदकर उनकी पुड़िया तैयार करते थे. चार या पांच गोली पॉलीथिन में डालकर गठिया की खुराक तैयार की जाती थी. इसके बाद इन दवाओं को दिल्ली-एनसीआर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई करते थे.

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