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परमवीर चक्र विजेता का नाम स्कूल गेट से हटाया, परिवार नाराज, भारत-पाक युद्ध में टैंकों को किया था नष्ट

परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद के परिवार ने उनके नाम को गाजीपुर के एक प्राथमिक विद्यालय के मुख्य गेट से हटाए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई है.

यह AI से बनाई गई तस्वीर है. इसका इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है. यह AI से बनाई गई तस्वीर है. इसका इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है.
aajtak.in
  • गाजीपुर,
  • 17 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 6:57 PM IST

परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद के परिवार ने उनके नाम को गाजीपुर के एक प्राथमिक विद्यालय के मुख्य गेट से हटाए जाने पर कड़ी नाराज़गी जताई है. यह वही स्कूल है, जहां उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ली थी. दरअसल, जिले के धामूपुर गांव स्थित इस स्कूल की हाल ही में रंगाई-पुताई की गई, जिसके बाद स्कूल का नाम ‘पीएम श्री कंपोजिट स्कूल’ कर दिया गया. पहले इस स्कूल के प्रवेश द्वार पर ‘शहीद हमीद विद्यालय’ लिखा हुआ था, जिसे हटा दिया गया.

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परिवार ने जताई आपत्ति
अब्दुल हमीद के पोते, जमील अहमद ने बताया कि चार दिन पहले स्कूल को फिर से रंगवाया गया, लेकिन जब उन्होंने देखा कि स्कूल गेट से उनके दादा का नाम हटा दिया गया है, तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताई. जब इस बारे में स्कूल के प्रधानाध्यापक अजय कुशवाहा से बात की गई, तो उन्होंने उन्हें बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव से संपर्क करने के लिए कहा.

परिवार का कहना है कि अधिकारी ने उन्हें बताया कि अब्दुल हमीद का नाम स्कूल की बाहरी दीवार पर लिखा गया है, लेकिन मुख्य गेट पर नहीं. इससे असंतुष्ट परिवार ने शनिवार को एक और शिकायत दर्ज कराई और शहीद के नाम को फिर से मुख्य गेट पर लिखने की मांग की.

हालांकि, अधिकारी हेमंत राव ने कहा कि शहीद अब्दुल हमीद का नाम जल्द ही स्कूल के मुख्य गेट पर दोबारा लिखा जाएगा. फिलहाल, इसे स्कूल की बाहरी दीवार पर अंकित किया गया है.'

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अब्दुल हमीद की वीरता के किस्से
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिए गए पैटन टैंकों को अजेय माना जाता था. लेकिन अब्दुल हमीद ने अपनी बहादुरी दिखाते हुए अकेले तीन पैटन टैंकों को नष्ट कर दिया, जिससे दुश्मन सेना को पीछे हटना पड़ा.

उनकी इस वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, जिसे उनकी पत्नी रसूलन बीबी ने राष्ट्रपति से प्राप्त किया था.

परिवार ने मांग की है कि शहीद के नाम को फिर से स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार पर अंकित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी वीरता को याद रख सकें.

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