
शाहजहांपुर के शरद सिंह का जन्म एक लड़की के रूप में हुआ था, लेकिन उनके मन और सोच में हमेशा एक पुरुष की भावना थी. बचपन से ही वे लड़कों की तरह रहना पसंद करते थे, जिससे उनके परिवार और समाज में कई सवाल खड़े होते रहे. लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को अपनाने का साहस दिखाया.
2021-22 में, उन्होंने अपने जेंडर को बदलवाने की प्रक्रिया शुरू की. लखनऊ में हार्मोन थेरेपी से उन्होंने शारीरिक परिवर्तन शुरू किया, जिससे उनके चेहरे पर दाढ़ी उग आई और उनकी आवाज़ भारी हो गई. इसके बाद, 2023 की शुरुआत में, मध्य प्रदेश के इंदौर में उन्होंने सर्जरी करवाई और आधिकारिक रूप से पुरुष बन गए. 27 जून 2023 को तत्कालीन जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने उन्हें शरद सिंह के नाम से जेंडर बदलवाने का प्रमाण पत्र जारी किया.
सहेली से शादी और परिवार का विस्तार
शरद सिंह का सफर सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा. 23 नवंबर 2023 को उन्होंने अपनी महिला मित्र सविता सिंह से विवाह कर लिया. यह शादी उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था. सविता सिंह के साथ उनका रिश्ता सिर्फ प्यार का नहीं था, बल्कि यह विश्वास और समर्थन का एक उदाहरण भी था. दोनों ने समाज की रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने जीवन की नई शुरुआत की.
26 साल बाद घर में बेटे का जन्म
शादी के बाद, जब शरद और सविता ने संतान सुख की योजना बनाई, तो यह भी समाज के लिए एक नई सोच को जन्म देने वाला निर्णय था. कल, बुधवार को, जब सविता सिंह को प्रसव पीड़ा हुई, तो उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. शाम को ऑपरेशन के जरिए
सपना हुआ साकार
उन्होंने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया. यह न केवल शरद और सविता के लिए, बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था. शरद सिंह ने इस खुशी को साझा करते हुए कहा, मेरी पत्नी सविता सिंह ने जो सपना 10-15 साल पहले देखा था, आज वह साकार हुआ है. हमारे परिवार में 26 साल बाद पुत्र का जन्म हुआ है. हर इंसान का सपना होता है कि उसे संतान का सुख मिले, लेकिन जिन परिस्थितियों से निकलकर पिता बनने का यह अवसर मिला है, वह मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी है. शरद सिंह फिलहाल विकासखंड ददरौल के प्राथमिक विद्यालय सतवा खुर्द में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं.