
उत्तर प्रदेश के हाथरस में 2 जुलाई को एक धार्मिक समागम में मची भगदड़ में 116 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए. हाल के वर्षों में इस तरह की यह सबसे भीषण त्रासदी है. इस सत्संग का आयोजन 'भोले बाबा' उर्फ बाबा नारायण हरि उर्फ साकार विश्व हरि के संगठन की ओर से किया गया था. मरने वालों और घायलों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इस दुखद हादसे के बाद आजतक की टीम उस स्थान पर पहुंची जहां सत्संग का आयोजन किया गया था. यहां के हालात ऐसे थे मानो सत्संग स्थल श्मशान घाट बन गया हो.
सत्संग खत्म होने के बाद भोले बाबा अपनी कार में बैठकर जैसे ही रवाना हुए, अनुयायियों की भीड़ अंतिम दर्शन और चरण छूने के लिए उनके पीछे दौड़ पड़ी. आजतक के संवाददाता हिमांशु मिश्रा के मुताबिक बाबा के चरण जहां-जहां पड़े, वहां की मिट्टी उठाने के लिए उनके अनुयायियों में होड़ मच गई. सड़क की दूसरी ओर पांच से छठ फीट की खाई थी. पीछे से जब लोगों का रेला आया तो दबाव पड़ने से आगे के लोग उस खाई की ओर गिरने लगे. फिर जो नीचे थे उनके ऊपर और लोग गिरते गए और यह सिलसिला चलता रहा.
पानी-कीचड़ में एकदूसरे गिरे लोग
सड़क के नीचे की ओर खेत थे जिनमें पानी भरा हुआ था और कीचड़ था. लोग भागने के चक्कर में पानी और कीचड़ में फंसकर गिरे और भीड़ में दब गए. दम घुटने और कुचलने से ज्यादातर मौतें हुईं. खेतों में लोगों के पैरों के निशान, महिलाओं और बच्चों के चप्पल और सैंडल बिखरे पड़े थे. सत्संग में 80 हजार लोगों के आने की बात कही जा रही है, लेकिन असल में आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा था. इतनी बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने की जानकारी होने के बावजूद आयोजकों ने मौके पर एंबुलेंस और अन्य व्यवस्थाएं नहीं की थीं.
स्वयंसेवक कर रहे थे भीड़ नियंत्रण
आयोजन में भीड़ को मैनेज करने की जिम्मेदारी भी बाबा के स्वयंसेवकों ने उठा रखी थी. लोग जब भोले बाबा के चरण रज लेने के लिए उनके पीछे भागे तो स्वयंसेवकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और इसी दौरान भगदड़ मच गई. स्थानीय प्रशासन से इस आयोजन के लिए स्वीकृति जरूर ली गई थी, लेकिन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए थे. आयोजन स्थल पर एंट्री और एग्जिट के लिए डेडिकेटेड गेट नहीं था. न ही बैरिकेडिंग करके अलग-अलग लाइनें बनाई गई थीं, जिससे भीड़ कई हिस्सों में बंट जाए और भगदड़ की स्थिति को टाला जा सके.
भोले बाबा घटना के बाद से फरार
घटना के बाद से भोले बाबा कहां हैं, इसकी अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पायी है. पुलिस ने मैनपुरी स्थित उनके आश्रम राम कुटिर चैरिटेबल ट्रस्ट में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन बाबा नारायण हरि उर्फ साकार विश्व हरि वहां नहीं मिले. उनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है. इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि हाथरस में 'सत्संग' के दौरान भगदड़ में मरने वाले 116 लोगों में से अधिकांश की पहचान कर ली गई है. बाकी शवों की पहचान की कोशिश की जा रही है. पहचाने गए मृतकों का पोस्टमार्टम कराके शव उनके परिजनों को सौंपे जा रहे हैं.