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Hathras Stampede: 'बाबा जी भगवान हैं या इंसान, यही देखने आए थे हाथरस...', लाशों के बीच अपनों को खोजने पहुंचे लोगों की जुबानी

Hathras Stampede News: यूपी के हाथरस (Hathras) में सत्संग में शामिल होने बहराइच से बस में सवार होकर कई लोग पहुंचे थे. इन लोगों का कहना है कि वे पहली बार आए. उन्हें ये जानने की उत्सुकता थी कि बाबा इंसान हैं या परमात्मा. बस में एक मां-बेटी भी थीं, जो लापता हैं. भगदड़ के बाद अपनों की तलाश में तमाम लोग सिकंदरा राव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचे.

अपनों की तलाश में अस्पताल पहुंचे लोग. (Photo: PTI) अपनों की तलाश में अस्पताल पहुंचे लोग. (Photo: PTI)
हिमांशु मिश्रा/मौसमी सिंह
  • हाथरस/नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 11:49 AM IST

Hathras Satsang Stampede: उत्तर प्रदेश के बहराइच से बस में सवार होकर कई लोग सत्संग में आए थे. सत्संग में हुई भगदड़ की घटना के बाद कई लोग मौके पर मौजूद हैं. इनका कहना है कि वे पहली बार आए हैं. उन्हें पता करना था कि बाबा इंसान हैं या भगवान. बस में एक मां और बेटी भी थीं, जो लापता हैं. ये लोग उनका इंतजार कर रहे हैं.

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कुछ लोग हादसे के तुरंत बाद बस से घर वापस लौट आए. एक व्यक्ति ने कहा कि हमारे सामने दो लोगों की मौत हो गई, हम खुशकिस्मत हैं, जो बचकर आ गए. जिस हिसाब से भीड़ थी और कम पुलिसकर्मी तैनात थे.

यह भी पढ़ें: कीचड़ में पैरों के निशान, महिलाओं-बच्चों के बिखरे पड़े चप्पल-सैंडल... हाथरस भगदड़ की ग्राउंड रिपोर्ट- VIDEO

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि जब सत्संग खत्म हो गया तो बाबा से मिलने के लिए महिलाएं उनकी गाड़ी के पीछे दौड़ीं, इसके बाद भगदड़ मच गई. भीड़ बहुत ज्यादा थी, गर्मी का मौसम था. लोग जल्दी बाहर निकलने के चक्कर में भागने लगे. जिस जगह पर चल रहे थे, वहां मिट्टी भी गीली थी, कीचड़ हो गया था. इस कारण कई लोग फिसल गए. अगर प्रशासन मुस्तैद होता तो हादसा टल सकता था.

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अखिलेश यादव बोले- भीड़ को रोकने की जिम्मेदारी सरकारी की थी

इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनका कार्यक्रम कोई पहली बार नहीं हुआ है. कार्यक्रम पहले भी हुए हैं. अगर इतनी भीड़ आ रही थी तो सुरक्षा इंतजाम की जिम्मेदारी सरकार की थी. लोगों को गाइड करने की जिम्मेदारी सरकार की थी. भीड़ इकट्ठा नहीं होने देने की जिम्मेदारी सरकार की थी.

'मैं आयोजक नहीं, मुझे नहीं पता मेरा नाम लिस्ट में क्यों लिखा'

सत्संग के आयोजक के तौर पर पंडाल के बाहर 78 लोगों के नाम और नंबर दिए गए हैं. इनमें से एक डॉक्टर मुकेश कुमार से बात की. मुकेश का नाम नंबर 20 पर लिखा है. मुकेश कुमार का कहना है कि वो बिल्कुल आयोजनकर्ता नहीं थे. चार दिन पहले घर पर चंदा मांगने आए थे. उन्हें मना कर दिया था. मुझे नहीं पता, मेरा नाम क्यों लिखा.

अब तक 121 लोगों की हो चुकी है मौत

इस घटना में अब तक कुल 121 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं कई लोग घायल हैं, जो अस्पताल में हैं. हाथरस हॉस्पिटल में 32 डेड बॉडी आई हैं, 19 का आइडेंटिफिकेशन हो चुका है. पोस्टमार्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंपा जा रहा है, उनके घर भिजवाया जा रहा है. 32 में से 11 का पोस्टमार्टम हो चुका है. एक महिला पुलिसकर्मी बेहोश हो गई थी, वह अब ठीक है, उसे घर भेज दिया गया है. 

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कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले- जीवन में ऐसा हादसा नहीं देखा

घटना को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि यहां हाथरस जिला अस्पताल में 32 शव पोस्टमार्टम के लिए आए हैं. 9 घायल इलाज के लिए भर्ती हैं, जिनमें एक सिपाही भी शामिल थी, अभी उनकी हालत स्थिर है. इस घटना में बहुत लोगों की मृत्यु हुई है. बहुत शव ऐसे हैं, जिनकी अब तक पहचान नहीं हुई है. सदन खत्म होते ही हमें प्रियंका गांधी ने यहां भेजा है. मैंने अपने जीवन में ऐसा हादसा नहीं देखा.

घटना को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?

घटना को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घटना बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली है. स्थानीय आयोजकों ने 'भोले बाबा' का कार्यक्रम आयोजित किया था. कार्यक्रम के बाद जब सत्संग के प्रचारक नीचे आ रहे थे, अचानक श्रद्धालुओं की भीड़ उन्हें छूने के लिए बढ़ने लगी और जब सेवादारों ने रोका तो वहां हादसा हो गया.

सीएम ने कहा है कि इस मामले की जांच के लिए हमने एडिशनल डीजी आगरा की अध्यक्षता में टीम गठित कर दी है. उन्हें विस्तृत रिपोर्ट देनी है. घटना के मद्देनजर राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी वहां कैंप कर रहे हैं. राज्य सरकार के तीन मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण, संदीप सिंह, असीम अरुण तीनों घटनास्थल पर हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज हाथरस पहुंचेंगे. वे यहां सत्संग में मची भगदड़ को लेकर अधिकारियों से जानकारी लेंगे.

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सूरजपाल उर्फ भोले बाबा.

सूरजपाल है बाबा का मूल नाम, 1990 में छोड़ दी थी पुलिस की नौकरी

भोले बाबा का असली नाम सूरजपाल है. वह कासगंज जिले के बहादुर नगर के मूल निवासी हैं. सूरजपाल ने साल 1990 के दशक के अंत में एक पुलिसकर्मी के रूप में नौकरी छोड़ दी थी और प्रवचन देना शुरू किया था. बाबा ने 'सत्संग' (धार्मिक उपदेश) करना शुरू कर दिया. सूरजपाल उर्फ भोले बाबा की कोई संतान नहीं है. सत्संग में बाबा की पत्नी भी साथ रहती हैं. वह अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से आते हैं. बहादुर नगर में आश्रम स्थापित करने के बाद भोले बाबा की प्रसिद्धि गरीबों और वंचित वर्गों के बीच तेजी से बढ़ी और लाखों लोग अनुयायी बन गए.

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