
समय बीतने के साथ भी कुछ घाव ऐसे होते हैं, जो कभी भरते नहीं. औरैया के अजीतमल ब्लॉक के बिसलपुर गांव में आज भी एक घर में मातम पसरा हुआ है. घर के एक कोने में बेटे अरुण कुमार की आंखें अपनी मां की तस्वीर पर टिकी हैं, मानो वह उम्मीद कर रहे हों कि मां एक बार फिर उन्हें पुकारेंगी. वहीं, दूसरी ओर मनीराम अपनी पत्नी की यादों में खोए हुए हैं.
दरअसल, 2 जुलाई 2024 को हाथरस में नारायण साकार हरि के प्रवचन कार्यक्रम में जो भगदड़ मची, उसने कई लोगों की जिंदगी छीन ली. इसी भगदड़ में बिसलपुर की सुशीला देवी की भी दर्दनाक मौत हो गई थी. सुशीला देवी पिछले दस साल से इस संस्था से जुड़ी थीं. एक साधारण गृहणी होते हुए उनका झुकाव अध्यात्म की ओर था. वे कार्यक्रम में शामिल होने हाथरस गई थीं, लेकिन वापस नहीं लौट पाईं.
भगदड़ के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की. अब इस मामले में बाबा को क्लीन चिट दे दी गई है. सुशीला देवी के परिवार के लोगों से बात करने जब ‘आजतक’ की टीम उनके घर पहुंची तो पति मनीराम की आंखें नम थीं. उन्होंने गहरी सांस लेते हुए कहा कि अब कुछ बचा नहीं… हम किसी पर कोई आरोप नहीं लगा रहे, हमारा इंसान तो चला ही गया. यह कहते हुए उनकी आवाज लड़खड़ा गई और आंखों से आंसू छलक पड़े.
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सुशीला देवी का बेटा अरुण कुमार अपनी मां की तस्वीर को अपलक निहारता रहा. उसके चेहरे पर दर्द साफ झलक रहा था. उसने रुंधे गले से कहा कि हम अनाथ हो गए, मां की कमी बहुत खलती है. इस दुनिया में अब कुछ भी पहले जैसा नहीं रहा. हमारा इंसान चला गया, हम किसी पर कोई आरोप नहीं लगा रहे, जो होना था वह हो गया.
परिवार अब भी उस काली रात को नहीं भूल पाया जब सुशीला देवी की मौत की खबर आई थी. पूरे गांव में मातम पसर गया था. सुशीला देवी को जानने वाले सभी लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे. सरकार और प्रशासन भले ही आगे बढ़ चुका हो, लेकिन उन परिवारों का दर्द अभी भी वैसा ही है, जिनके अपनों ने इस भगदड़ में अपनी जान गंवा दी.