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अपनों से दिल टूटा तो बैरागी बने 'हंसराज बाबा', साइकिल से कर रहे धार्मिक यात्रा, जाने पूरी कहानी

श्रावस्ती निवासी हंसराज बाबा अपनों के अन्याय से टूटकर वैराग्य में लीन हो गए. साइकिल पर कुछ सामान और भगवान की आस्था लेकर देशभर के धर्मस्थलों की यात्रा पर निकले. प्रयागराज संगम पहुंचकर मां गंगा का आचमन किया. कुंभ क्षेत्र में साधु-संतों से मिलने के बाद उनका अगला पड़ाव गंगासागर है.

हंसराज बाबा. हंसराज बाबा.
आनंद राज
  • प्रयागराज,
  • 20 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:25 PM IST

उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती के रहने वाले हंसराज बाबा ने अपनों से मिले दुख और अन्याय के कारण जीवन को वैराग्य के रास्ते पर समर्पित कर दिया. बचपन में पिता का देहांत हुआ और भाइयों ने उन्हें घर में हिस्सेदारी से वंचित कर दिया. परिवार से मिली चोट ने उन्हें भगवान की भक्ति में लीन कर दिया. अब वह अपना कुछ सामान लेकर साइकिल पर सवार होकर देशभर के धार्मिक स्थलों की यात्रा पर निकल पड़े हैं.

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कहते हैं जब भगवान पर आस्था होती है तो आपकी जिंदगी भगवान की हो जाती है. लेकिन जब आपके अपनों ने ही आपको दुख पहुंचाया हो और बात आपके दिल को छू जाए तो भगवान की भक्ति में डूबने का मन करता है. ऐसी ही कहानी हंसराज बाबा की है, जो अपने लोगों से आहत होकर अपने परिवार को छोड़कर बाबा बन गए. इसके बाद वे अपना कुछ सामान लेकर साइकिल पर सवार होकर देशभर के धार्मिक स्थलों की यात्रा पर निकल पड़े. अपनी कहानी बताते हुए बाबा रोने लगते हैं.

ये भी पढ़ें- Prayagraj MahaKumbh: घोड़े वाले बाबा से लेकर सोने से लदे संत तक, महाकुंभ में दिखेगा आस्था और परंपरा का अनोखा संगम

हंसराज बाबा साइकिल से वृंदावन से कुंभ नगर पहुंचे हैं. वे न केवल वेश-भूषा से बल्कि मन से भी वैरागी हैं. बाबा कहते हैं कि दुनिया के सारे रिश्ते-नाते झूठे हैं. एक ईश्वर के प्रेम में कोई दुख नहीं है. हंसराज बाबा ने जैसे ही संगम का जल हथेली में लिया, सैकड़ों किलोमीटर की साइकिल यात्रा की थकान गायब हो गई.

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हंसराज बाबा को अभी आगे गंगासागर जाना है. लेकिन बाबा की विनम्रता देखकर साफ पता चलता है कि उनके अंदर ईश्वर के प्रति आस्था जाग उठी है. इसके पीछे वजह यह है कि उन्हें उनके अपनों ने ही ठेस पहुंचाई है. बाबा जब छोटे थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया और उनके भाइयों ने उन्हें घर में हिस्सा नहीं दिया. वे दर-दर भटकने को मजबूर हो गए. इस वजह से बाबा अपने परिवार से परेशान हो गए और ईश्वर में आस्था रखने लगे.

उन्होंने अपनी साइकिल पर कुछ सामान और छाता रखा और भगवान के दर्शन के लिए निकल पड़े. पहले वे मेरठ गए. फिर अयोध्या. इसके बाद वे राजस्थान गए और इस तरह वे भारत के कई धार्मिक स्थलों से होते हुए प्रयागराज संगम पहुंचे. जहां पहुंचकर उन्होंने सबसे पहले मां गंगा को नमन किया. उन्होंने गंगाजल पिया. फिर उन्होंने जलाभिषेक किया और फिर वे साधु-संतों के दर्शन के लिए कुंभ मेला क्षेत्र में चले गए.

बता दे कि हंसराज उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती के रहने वाले है. दैनिक जीवक को त्यागकर बाबा का रूप धारण कर लिया है और देशभर के मंदिर में स्थापित भगवान के दर्शन को निकल पड़े. क्योंकि महाकुंभ 2025 लगाने की वजह से कुछ दिन संगम की रेती पर भी बिताएंगे.

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