
कानपुर की गंगा में डूबे स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्धन सिंह की बॉडी का पांचवें दिन भी पता नहीं चल सका. आदित्य वर्धन की तलाश में स्थानीय पुलिस प्रशासन जुटा हुआ है. पीएससी की मोटरबोट से गंगा में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. हालांकि, NDRF-SDRF की टीमें लौट गई हैं.
इस बीच जिस नानामऊ घाट पर नहाते समय आदित्य डूबे थे, वहां की एक फोटो सामने आई. इसमें आदित्य अपने दोस्त योगेश मिश्रा संग पानी में नहाते हुए नजर आ रहे हैं. जबकि, उनका तीसरा दोस्त प्रदीप तिवारी बाहर से फोटो खींच रहा था. ये फोटो आदित्य वर्धन की आखिरी तस्वीर बताई जा रही है. डूबने से पहले आदित्य ने अपने मोबाइल से भी फोटो खींचने के लिए कहा था लेकिन उनकी ये 'आखिरी इच्छा' पूरी नहीं हो सकी. क्योंकि, जब तक प्रदीप उनका मोबाइल लेकर आता वो पानी में डूब गए थे.
दोस्तों के साथ गए थे नहाने
आपको बता दें कि कानपुर के नानामऊ घाट पर हुई ये घटना शनिवार, 31 अगस्त की है. यूपी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आदित्य वर्धन सिंह (45) अपने दोस्तों योगेश मिश्रा, प्रदीप तिवारी के साथ गंगा नहाने आए थे. दोस्तों का कहना है कि नहाते समय आदित्य वर्धन ने फोटो खींचने के लिए कहा. इस दौरान वो गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे. जिसपर घाट पर खड़े गोताखोरों से मदद मांगी गई. लेकिन गोताखोरों ने उन लोगों से पहले 10 हजार रुपये देने को कहा.
लेकिन आदित्य के दोस्तों के पास उस वक्त 10 हजार कैश नहीं थे. हालांकि, प्रदीप ने गोताखोरों के कहने पर एक दुकानदार के खाते में पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए थे. जिसके बाद गोताखोर आदित्य वर्धन को बचाने के लिए पानी में कूदे. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. आदित्य पानी में डूब चुके थे. आदित्य और उनके दोस्त लखनऊ के इंदिरानगर से कानपुर पहुंचे थे.
कैसे हुआ था हादसा?
बताया जा रहा है कि गंगा में नहाते समय आदित्य वर्धन ने प्रदीप से फोटो खींचने को कहा. आदित्य और योगेश पानी में थे. आदित्य ने प्रदीप से कहा कि वो उसका फोन गाड़ी से आए. क्योंकि, वह फोन अच्छा है और उससे फोटो अच्छी आएगी. प्रदीप आदित्य का फोन लेने चला गया. इसी बीच आदित्य गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे.
उनको डूबता देख प्रदीप और योगेश ने घाट के किनारे खड़े गोताखोरों से मदद की गुहार लगाई. आरोप है कि गोताखोरों ने पहले उनसे ₹10000 मांगे, जब प्रदीप ने कहा मेरे पास कैश नहीं है तो गोताखोरों ने कहा कि ऑनलाइन पेमेंट कर दो. गोताखोरों का अपना ऑनलाइन अकाउंट नहीं था, इसलिए उन्होंने घाट पर मौजूद दुकानदार शैलेश कश्यप के अकाउंट में ₹10000 ट्रांसफर कराए. पैसे का स्क्रीनशॉट देखने के बाद ही दोनों गोताखोर सुनील और राकेश गंगा में आदित्य वर्धन को बचाने कूदे. लेकिन तब तक आदित्य डूब चुके थे.
आखिरी फोटो आई सामने
जो फोटो सामने आई है उसमें आदित्य अपने दोस्त योगेश मिश्रा के साथ नहा रहे हैं. जबकि, प्रदीप तिवारी उनकी फोटो खींच रहे थे. ये आदित्य की आखिरी फोटो साबित हुई. हालांकि, दूसरी फोटो जिसको खिंचवाने के लिए उन्होंने अपना मोबाइल मंगाया था, लेकिन उससे फोटो नहीं खींची जा सकी, क्योंकि उससे पहले ही वो गंगा में डूब गए.
50 किलोमीटर के क्षेत्र में बॉडी की तलाश
पिछले 5 दिनों से पुलिस प्रशासन 50 किलोमीटर के क्षेत्र में लगातार उनकी बॉडी की तलाश कर रहा है. दर्जनों संख्या में स्टीमर बोट लगे हुए हैं. गंगा बैराज पर पुलिस टीम तैनात है, लेकिन बॉडी का कहीं पता नहीं चल रहा है. ड्रोन कैमरे भी लगाए गए हैं. आशंका जताई जा रही है कि गंगा के किनारे घनी झाड़ियों में बॉडी फंसी हो सकती है. फिलहाल, पुलिस झाड़ियां भी तलाश कर रही है.
भाई आईएएस, पत्नी जज
अभी तक आदित्य के परिजन मीडिया के सामने नहीं आए हैं. उनके चचेरे भाई बिहार में सीनियर आईएएस ऑफिसर हैं. पत्नी महाराष्ट्र में जज हैं. वहीं, माता-पिता और बहन ऑस्ट्रेलिया से लौट आए हैं. परिवार गहरे सदमे में हैं. कानपुर के एडीसीपी बृजेश द्विवेदी का कहना है कि हम हर संभव कोशिश करके बॉडी को तलाश कर रहे हैं. उम्मीद है कि जल्द ही खोज लेंगे.