
UP News: लोकसभा चुनाव 2024 में जालसाजी और गलत सूचनाओं के प्रचार प्रसार को रोकने के लिए श्रावस्ती में दो दिवसीय डीपफेक डिटेक्शन वर्कशॉप (Deepfake Detection Workshop) हुई. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम ने पुलिस कर्मियों को बताया कि वे कैसे डीपफेक (Deepfake) सूचनाओं को पहचान सकते हैं और उन पर अंकुश लगा सकते हैं.
दरअसल, भारत सरकार के स्टार्टअप नेतृत्वशाला और एआई की नीति, नियमन एवं प्रचार पर काम करने वाली संस्था INCLUSIVE AI ने श्रावस्ती पुलिस के निर्देश पर कार्यशाला का आयोजन किया. इसमें अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ जुड़े. एआई की कुशल नेतृत्वशाला टीम ने डीपफेक डिटेक्शन वर्कशॉप के बारे में प्रैक्टिकली समझाया, इसके साथ ही एआई के दुष्प्रभावों से बचने के तरीके भी बताए.
किसी प्रकार के फोटो, वीडियो और लिंक का फैक्ट चेक करने के लिए सर्च इंजन गूगल पर मौजूद फ्री टूल्स के बारे में जानकारी दी. ये भी समझाया कि इन टूल के माध्यम से अधिकारी और कर्मचारी किस तरह अफवाहों, फेक न्यूज, गलत सूचनाओं की जांच कर एक्शन ले सकते हैं.
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इस डीपफेक वर्कशॉप (Deepfake Workshop) में विशेषज्ञों की टीम में सागर विश्नोई, भरत नायक, शुभम सिंह और प्रणव द्विवेदी व अमिय कृष्ण उपाध्याय शामिल रहे. कार्यशाला में एआई व डीपफेक मामलों की पहचान और इनके प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया गया.
ये भी समझाया गया कि आज के परिवेश में एआई की भूमिका बढ़ रही है. ऐसे में गलत कार्यों जैसे गलत तरीके से वीडियो एडिटिंग, फेस एडिटिंग, वॉइस क्लोनिंग, ब्लैकमेलिंग, सेक्सटॉर्सन, डेटाफिशिंग आदि से बचने व जागरूक होने की आवश्यकता है.
वर्कशॉप के बारे में पुलिस अधीक्षक ने क्या बताया?
पुलिस अधीक्षक घनश्याम चौरसिया ने कहा कि हमारे यहां साइबर थाने का उद्घाटन मुख्यमंत्री के द्वारा किया गया है. साइबर संबंधी अपराधों पर नियंत्रण के लिए हमारी पुलिस को जानकारी होनी जरूरी थी. इस क्रम में एक्सपर्ट टीम से साइबर संबंधी मामलों को लेकर वर्कशॉप की गई, ताकि पुलिस आम जनता की समस्याओं को समझकर उनके निदान के लिए सक्षम हो सके.