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झांसी: नवजात बच्ची को लेकर 5 घंटे इधर-उधर दौड़ता रहा पिता, नहीं मिला इलाज, तोड़ दिया दम

बच्ची ने आज सुबह ही मेडिकल कालेज में जन्म लिया था. बच्ची की जान बचाने के लिए पिता उसे गोद में लेकर इलाज के लिए एम्बुलेंस से करीब 5 घंटे इधर-उधर भटकता रहा है, लेकिन बच्ची को न तो झांसी जिला अस्पताल ने भर्ती किया और न ही मेडिकल कालेज ने. जिस कारण नवजात बच्ची ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया. 

बेटी की मौत के बाद रोने लगा पिता बेटी की मौत के बाद रोने लगा पिता
प्रमोद कुमार गौतम
  • झांसी ,
  • 24 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज में इलाज न मिलने के कारण एक नवजात बच्ची ने दम तोड़ दिया. उसके पिता ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी को भर्ती ही नहीं किया गया. बच्ची ने आज सुबह ही मेडिकल कालेज में जन्म लिया था. बच्ची की जान बचाने के लिए पिता उसे गोद में लेकर इलाज के लिए एम्बुलेंस से करीब 5 घंटे इधर-उधर भटकता रहा है, लेकिन बच्ची को न तो झांसी जिला अस्पताल ने भर्ती किया और न ही मेडिकल कालेज ने. जिस कारण नवजात बच्ची ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया. 

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दरअसल, आंखों से निकल रहे आंसूओं को पोंछता यह शख्स ललितपुर जिले के मड़वरा थानान्तर्गत ग्राम तलुवा का रहने वाला 26 वर्षीय सोनू परिहार है. सोनू परिहार अपनी गोद में लिए मृत बच्ची को कभी देखता है तो कभी अपनी किस्मत को लेकर रोता है. सोनू परिहार कहता है कि उसकी 2018 में राजाबेटी नाम की महिला से शादी हुई थी. किसी कारण उसे बच्चे नहीं हो रहे थे. पहली बार उसकी पत्नी गर्भवती हुई. समय होने पर विगत दिवस उसकी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई. वह उसे लेकर मड़ावरा सामुदायिक अस्पताल ले गया, जहां से उसे ललितपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. 

ललितपुर से उसे झांसी मेडिकल कालेज रेफर किया गया. झांसी मेडिकल कालेज में उसकी पत्नी ने ऑपरेशन से आज सुबह 7 बजे जन्म एक बच्ची को दिया. जन्म लेने के बाद बच्ची को सांस लेने में परेशानी हो रही थी. जिस कारण डॉक्टर ने यह कहते हुए उसे झांसी जिला अस्पताल भेज दिया कि यहां पर व्यवस्थाएं नहीं हैं. वह अपनी बच्ची को लेकर प्राइवेट एम्बुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचा. वहां से भी वेंटिलेटर न होने की बात कहकर भगा दिया.  

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सोनू परिहार सुबह 7 बजे से लेकर 12 बजे तक करीब 5 घंटे तक इधर से उधर भटकता रहा है और अंत में उसकी बच्ची ने एम्बुलेंस में भी दम तोड़ दिया. यह उसकी पहली बच्ची थी. 

वहीं, जब इस मामले को लेकर झांसी मेडिकल कालेज के सीएमएस सचिन महौर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पिछले साल नवंबर में हुए अग्निकांड में एनआईसीयू वार्ड जल गया था. अभी वह बनकर तैयार नहीं हुआ है. काम चल रहा है. इस कारण बच्ची को जिला अस्पताल रेफर किया गया. जब बच्ची यहां आई तब तक वह मर चुकी थी. 

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