
कानपुर देहात में अतिक्रमण हटाने के दौरान मां-बेटी की आग में झुलस कर हुई मौत के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब इस मामले में घटनास्थल पर बनाए गए वीडियो फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर जांच में जुट गई है. पुलिस की तरफ से एक वीडियो बेहद महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर लिया जा रहा है. पुलिस के एक अफसर ने नाम ना छापने की शर्त पर इस वीडियो के आधार पर दावा किया है कि यह घटना दुखद है लेकिन हादसे में मां-बेटी की मौत हुई है.
यह पूरा वीडियो 2 मिनट 30 सेकंड का है. वीडियो की शुरुआत कृष्ण गोपाल दीक्षित की झोपड़ी के अंदर से होती है, जिसके अंदर शिवम दीक्षित खड़ा नजर आ रहा है और वहीं झोपड़ी में एक तरफ जनरेटर रखा नजर आ रहा है. वीडियो में 9 सेकंड से 12 सेकंड के बीच में शिवम घर से बाहर निकलता दिखाई पड़ता है और उसके पिता पीछे से हाथ में घास फूस लेकर बाहर जाता दिखाई पड़ता है.
जैसे ही दोनों लोग झोपड़ी के बाहर निकलते हैं तो कृष्ण गोपाल की पत्नी प्रमिला दिक्षित आवैं दे...आवै दे... कहते हुए झोपड़ी के अंदर आ जाती हैं. पीछे से कृष्ण गोपाल भी वापस झोपड़ी में आ जाता है और प्रमिला 'हम जान दई दे बै' कहते हुए दरवाजा बंद कर लेती है. वीडियो के 28 सेकंड पर प्रमिला झोपड़ी का दरवाजा बंद कर लेती है. इसके बाद वीडियो में बुलडोजर के आने की आवाज सुनाई पड़ती है.
वीडियो में 20 सेकंड बाद यानी 53 सेकंड पर महिला पुलिसकर्मी दरवाजे की तरफ बढ़ती नजर आती हैं और वही पीछे बुलडोजर भी नजर आता है. 58 सेकेंड पर महिला कांस्टेबल कुंडी खटखटाते हुए कहती है कि दरवाजा खोलो, लेकिन 12 सेकंड बाद दरवाजा खुलता है तो प्रमिला की आवाज आती है... 'आग लगाई दई इन लोगन ने' यानी इन लोगों ने आग लगा दी है. वीडियो के 1 मिनट 15 सेकंड पर किसी आदमी की आवाज आती है कि इन लोगों ने आग लगा दी, पानी ले आओ. यहां देखिए पूरा वीडियो-
वीडियो में 1 मिनट 22 सेकंड पर मां-बेटी झोपड़ी के अंदर खड़ी नजर आती हैं और प्रमिला चिल्लाती हैं. हाथ उठाकर कहती है कि इन लोगों ने आग लगा दी. वीडियो के इसी हिस्से में झोपड़ी के ऊपरी हिस्से में आग नजर आती है, जिसमें से चिंगारियां नीचे गिर रही हैं और मां-बेटी झोपड़ी के अंदर खड़ी है. आग लगने की सूचना पर पुरुष कॉन्स्टेबल झोपड़ी तक पहुंचते हैं.
पीले रंग की जैकेट और कंधे पर बंदूक टांगे एक सिपाही गेट पर पहुंच देखता है कि आग लगी है तो वह पानी लाओ पानी लाओ कहते हुए भागता है. वीडियो में 1 मिनट 52 सेकेंड पर जेसीबी झोपड़ी की तरफ बढ़ती नजर आती है. 10 सेकंड बाद यानी वीडियो में 2 मिनट 4 सेकंड पर जेसीबी झोपड़ी के घास पूस को लेकर बैक होते नजर आती है.
5 सेकंड के बाद 2 मिनट 11 सेकेंड पर झोपड़ी धू धू करते नजर आती है. वीडियो में 2 मिनट 18 सेकेंड पर जेसीबी अलग खड़ी नजर आती है और कंधे पर बंदूक टांगे कुछ पुलिस वाले दोबारा से झोपड़ी की तरफ भागते नजर आते हैं. 2 मिनट 30 सेकंड के इस वीडियो को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
जेसीबी ड्राइवर दीपक का बयान भी पुलिस ने ले लिया है. मौके पर फॉरेंसिक टीम ने शाम को ही घटनास्थल से तमाम सबूत इकट्ठा किए हैं. जांच की जा रही है कि झोपड़ी में आग किसी ज्वलनशील पदार्थ से तो नहीं लगी. आशंका जताई जा रही है कि मां-बेटी ने प्रशासन की कार्रवाई को रोकने के लिए खुद झोपड़ी के अंदर आग लगाई. हालांकि परिजनों का आरोप है कि आग लेखपाल ने लगाई थी, जिसे आदेश एसडीएम ने दिया था.
पुलिस टीम को इस वीडियो के साथ-साथ फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है. इस मामले की विवेचना के संबंध में आईजी रेंज कानपुर प्रशांत कुमार का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के बाद ही जांच अकबरपुर इंस्पेक्टर को सौंप दी गई थी, हम इस मामले में हर पहलू की जांच कर रहे हैं, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मौके पर बने वीडियो व गवाहों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, किसी भी निर्दोष को फंसाया नहीं जाएगा लेकिन किसी भी दोषी को छोड़ा भी नहीं जाएगा.