
कांवड़ यात्रा के नए मार्ग के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश में 1.12 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है. यह जानकारी यूपी सरकार के पर्यावरण विभाग ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को दी है. ये पेड़ गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर के तीन वन विभागों के संरक्षित जंगलों में काटे जा रहे हैं. प्रस्तावित मार्ग गाजियाबाद के मुरादनगर से मुजफ्फरनगर के पुरकाजी तक जाएगा.
कितनी पेड़ों की कटाई हो चुकी है?
पर्यावरण विभाग के सचिव ने बताया कि अब तक 25,410 पेड़ों को चिह्नित किया गया है, जिनमें से 17,607 पेड़ों की कटाई हो चुकी है. यह काम उत्तर प्रदेश वन निगम की देखरेख में किया गया. हालांकि, 9 अगस्त 2024 से पेड़ काटने का काम रोक दिया गया है. कुछ हिस्सों में अभी कटाई शुरू भी नहीं हुई है.
पेड़ों की गिनती कैसे हुई?
NGT ने यूपी सरकार से पेड़ों की सही संख्या बताने को कहा था. जवाब में बताया गया कि जहां कटाई पूरी हो चुकी है, वहां पेड़ों और झाड़ियों की गिनती संभव नहीं है, क्योंकि सफाई अभियान में झाड़ियां भी हटा दी गईं.
कितने पेड़ों की कटाई होगी?
सरकार ने साफ किया है कि परियोजना के तहत कुल 1,12,722 पेड़ों और पौधों की कटाई होगी, लेकिन इससे ज्यादा नहीं. आगे, जब पीडब्ल्यूडी 15-20 मीटर चौड़े सड़क के नए रूट को फाइनल करेगा, तब बची हुई जगहों पर पेड़ों की गिनती और कटाई का काम किया जाएगा.
कानूनी अनुमति
यूपी सरकार ने बताया कि यह भूमि संरक्षित जंगल की श्रेणी में आती है और केंद्र सरकार से फरवरी 2023 में इसके लिए सैद्धांतिक मंजूरी ली गई थी. इसलिए इस पर यूपी ट्री एक्ट 1976 के तहत गिनती नहीं की गई.
पेड़ों की परिभाषा क्या है?
परिवेश पोर्टल के अनुसार, पेड़ों को उनके घेराव (गर्थ) के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है - 0-30 सेमी, 31-60 सेमी और 150 सेमी से अधिक. इसमें छोटे पौधों और 30 सेमी से कम घेराव वाले पेड़ों को भी शामिल किया गया है.
यूपी सरकार ने NGT को आश्वासन दिया है कि पूरी परियोजना के दौरान पेड़ों की कटाई निर्धारित संख्या से अधिक नहीं होगी. अब देखना होगा कि यह मामला आगे क्या मोड़ लेता है.